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::::: आलेख :::::




रिपोर्टर/सिटीज़न रिपोर्टर बनें (पार्ट-टाइम)
हमें ऐसे उत्साही स्नातक की आवश्यकता हैं जो पढ़ने लिखने, बातचीत करने और शहर मे हो रही विभिन्न गतिविधियों पर नज़र रखते हो, और रोज शहर के विभिन्न व्यक्तियों / अधिकारियों से मिलकर रिपोर्ट दे सके | आपके पास अपना स्कूटर / बाईक और डिजिटल केमरा होना चाहिय| अनुभवी व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जाएगी| महिला/ पुरुष (25 से 50 वर्ष) आवेदन और फोटो सहित मिलें|



Contact :

BrainPower Media India Pvt. Ltd.- Public Complaints Cell
Admin. Office : Prime Plaza, 3rd Floor, E-3/46, Arera Colony, Bhopal-16.
Phone - 0755-4055957, 98930-96880
Email - editormetromirror@gmail.com, metromirror@gmail.com


जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण पर राज्य-स्तरीय मीडिया कार्यशाला 22 नवम्बर को
Our Correspondent :27 October 2017

पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (एप्को) द्वारा 22 नवम्बर 2017 को 'जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण'' पर एक-दिवसीय राज्य-स्तरीय मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। एप्को ऑडिटोरियम भोपाल में होने वाली कार्यशाला में भोपाल, रीवा, ग्वालियर, सागर, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और शहडोल के मीडिया प्रतिनिधि भाग लेंगे। उक्त जिलों के जनसम्पर्क कार्यालयों से अपने-अपने जिले के विकासात्मक पर्यावरणीय और जलवायु परिवर्तन मुद्दों पर लिखने वाले 5-5 पत्रकारों को नामांकित कर निर्धारित प्रपत्र में जानकारी 16 नवम्बर 2017 तक ई-मेल ecoevents.epco@gmail.com पर भेजने को कहा गया है। कार्यपालन संचालक श्री अनुपम राजन ने बताया कि एप्को द्वारा जलवायु परिवर्तन के संबंध में हर जिले से निकलने वाले हिन्दी और अंग्रेजी के समाचार पत्र-पत्रिकाओं में लिखने वाले पत्रकारों के जमीनी स्तर के विचार, अनुभवों के आलेखों का संकलन कर एक मोनोग्राफ प्रकाशित किया जा रहा है। कार्यशाला इस प्रयोजन में सहायक सिद्ध होगी। जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण के बारे में जनता को जागरूक करने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। मीडिया जलवायु परिवर्तन से संबंधित विषयों पर सटीक कव्हरेज कर बड़े पैमाने पर सार्वजनिक भागीदारी बढ़ाने में सकारात्मक भूमिका निभाता है। कार्यशाला के माध्यम से मीडिया प्रतिनिधियों को जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण विषय पर गहराई से जानने और अपनी उत्सुकताओं के समाधान का मौका मिलेगा। कार्यशाला में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों के आने-जाने और ठहरने की व्यवस्था एप्को द्वारा की जाएगी।


पत्रकार पण्डित दीनदयाल जी ने दिया नया दर्शन
Our Correspondent :16 October 2017

दीनदयाल जी ने अपने राजनीतिक लेखों में एक नया वाद पैदा किया जिसे समन्वयवाद नाम दिया। राजनीतिक लिप्सा के आकांक्षी लोगों के लिए उन्होंने लिखा कि शिखर पर बैठने की इच्छा सबकी होती है मगर मंदिर के शिखर पर तो कौए भी बैठते हैं? हमें तो उस नींव का पत्थर बनने की आकांक्षा करनी चाहिए जो अपने कंधों पर मंदिर को भव्य स्वरूप देता है। उपाध्याय जी ने इसे खुद पर भी लागू किया। प्रसिद्ध विचारक दत्तोपंत ठेंगड़ी एक जगह लिखते हैं कि जनसंघ का अध्यक्ष बनने के लिए उन्हें दो बार आग्रह किया गया लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया। ---- हिन्दुस्तान की रत्नगर्भा धरा ने भारतीय पत्रकारिता में जिन महापुरूषों को जन्मा, उन्हीं में से एक पण्डित दीनदयाल उपाध्याय जी भी हैं। उनका पत्रकारीय-जीवन महज 20 साल रहा लेकिन अपने विचारों और लेखों से दुनिया को खासा प्रभावित किया। 1963 में जब दीनदयाल जी लन्दन गए और वहां पर विपक्ष के नेता के तौर पर जो उद्बोधन दिया, उस पर स्थानीय अखबार द गार्जियन ने लिखा कि यह वह शख्स है जिस पर भारत को विशेष ध्यान देना होगा। भविष्यवाणी तब सही साबित हुई जब पण्डित जी ने 1965 में दुनिया को एकात्म मानव-दर्शन दिया। इसके पहले विश्व, माक्र्सवाद और समाजवाद जैसे दर्शनों में अपना कल्याण देख रहा था। एक पत्रकार के तौर पर पण्डित जी का उद्भव सन् 1947 माना जाता है। उनके लिए धर्म और राष्ट्र से बड़ी मानवता थी इसलिए अपनी पत्रकारिता में भी इसे सर्वोपरि रखा। सृष्टि के प्रथम संचारक नारदजी हों या तिलक की लोकमान्य पत्रकारिता या जैसा गांधीजी ने 1888 में इंडियन ओपिनियन में कहा कि कोई भी धर्म या देश मनुष्यता से बड़ा नही हो सकता। इसी के समानांतर पण्डित उपाध्याय जी ने लोक कल्याण को ही पत्रकारिता का प्रमुख आधार माना। मशहूर पत्रकार थाम्पसन फ्रीडमैन के मुताबिक व्हाट वी पब्लिशड ऑर ब्राडकास्ट मे बी हर्टफुल, बट वी शुड बी अवेयर ऑफ द इम्पेक्ट ऑफ अवर वर्डस एण्ड इमेजेस ऑन द मिलियंस ऑफ लाइवस. पण्डित जी के पास खबरों का न्यायवादी दृष्टिकोण था। उनके लेखों, उपन्यासों व नियमित कॉलमों का अध्ययन करने पर हम पाते हैं कि उन्होंने निष्पक्ष आलोचना, उचित व सम्माजनक शब्दों का प्रयोग और सत्यपरक खबरों को ही मानवता के अनुकूल बताया। जुलाई 1953 में पांचजन्य ने वित्तीय बजट पर एक विशेषांक निकाला तो उन्होंने समीक्षा करते हुए लिखा कि पंचवर्षीय योजना को लेकर जिस तरह सरकार के केंद्रीय मंत्री की आलोचना हुई है, बाकी दलों को क्यों छोड़ दिया गया? उन्होंने सम्पादकीय में मूर्खतापूर्ण जैसे शब्द की जगह किसी अन्य शब्द का इस्तेमाल करने की सलाह दी। पं. दीनदयाल जी जब भी अखबार के दफतर आते तो न्यूज बनाने या शीर्षक कैसे लगाना इत्यादि पर सलाह-मशविरा करते। लखनऊ में जब संत फतेह सिंह किसी मुद्दे पर आमरण अनशन कर रहे थे तो पांचजन्य ने खबर का शीर्षक दिया : अकाल तख्त के काल.... मगर पण्डितजी ने इस शीर्षक को हटवाते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में कटुतापूर्ण शब्दों का प्रयोग नही होना चाहिए। आर्गनाइजर के पूर्व संपादक के.आर. मल्कानी के अनुसार, तीन दिनों से भी कम अवधि में जब हरियाणा, पश्चिम बंगाल तथा पंजाब की गैर-कांग्रेसी सरकारें गिरा दी गईं तो पांचजन्य ने एक व्यंगयचित्र छापा जिसमें तत्कालीन गृह मंत्री चव्हाण लोकतंत्र के बैल को काटते हुए दर्शाए गए थे। बहुतों को यह अतिवाद लगा। इस पर उपाध्याय जी की प्रतिक्रिया थी, चाहे व्यंगयचित्र में ही क्यों ना हो, गौ-हत्या का यह दृश्य मन को धक्का पहुंचाने वाला है। आज तो हम गाय काटते हुए वाीडियो देख रहे हैं। साफ है कि मानवता, पशुता के स्तर पर पहुंच गई है। राष्ट्रवादी पत्रकारिता पण्डितजी के विचारों में रची-बसी थी। इसका बेहतरीन उदाहरण देखते हैं कि तत्कालीन प्रधानमंत्री ने एक बार कहा कि अंग्रेज गए तो उन्होंने हमको बताया नही कि देश की सीमा क्या है? इसलिए कच्छ का यह हिस्सा हमारा था या नही, यह हमको पता नही। इस पर पण्डित जी ने बेबाकी से लिखा कि जिसको देश की सीमा ही मालूम नही, वह प्रधानमंत्री के दायित्वपूर्ण पद पर भला कैसे बने रह सकता है? उपाध्याय जी एक राजनीतिज्ञ थे इसलिए पत्रकारों या अखबारों की टीका-टिप्पणी को स्वच्छ आलोचना के तौर पर लेते थे। 1962 में एक अंग्रेजी अखबार ने पण्डित जी के भारत-पाक युद्ध पर लिखे लेख की कटु आलोचना की तो पण्डितजी ने उसका सहर्ष स्वागत किया। एक पत्रकार के रूप में हम गांधीजी को भी पाते हैं। 1942 में टाइम्स ऑफ इण्डिया की एक खबर पर महात्मा गांधी जी इस कदर नाराज हुए थे कि पूरा दिन उपवास कर बैठे थे! उपाध्याय जी ने अपने राजनीतिक लेखों में एक नया वाद पैदा किया जिसे समन्वयवाद नाम दिया। राजनीतिक लिप्सा के आकांक्षी लोगों के लिए उन्होंने लिखा कि शिखर पर बैठने की इच्छा सबकी होती है मगर मंदिर के शिखर पर तो कौए भी बैठते हैं? हमें तो उस नींव का पत्थर बनने की आकांक्षा करनी चाहिए जो अपने कंधों पर मंदिर को भव्य स्वरूप देता है। उपाध्याय जी ने इसे खुद पर भी लागू किया। प्रसिद्ध विचारक दत्तोपंत ठेंगड़ी एक जगह लिखते हैं कि जनसंघ का अध्यक्ष बनने के लिए उन्हें दो बार आग्रह किया गया लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया। पण्डित जी की राजनीतिक डायरी में प्रकाशित लेखों का अध्ययन करने पर मालूम चलता है और जो महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया, उसके मुताबिक उन्होंने देश की राजनीति को विकास का एम-7 मॉडल दिया। हवा-पानी-भाप-तेल-गैस-बिजली-आणविक शक्ति का न्यूनतम उपयोग करते हुए आवश्यकतानुरूप उत्पादन किया जाना चाहिए साथ ही शिल्पज्ञान को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। यह उनकी विकासवादी पत्रकारिता का प्रतीक है। स्पष्ट है कि एक पत्रकार के तौर पर पं. दीनदयाल जी की मानवतावादी दृष्टि, भारत के साथ-साथ विश्व के लिए भी मार्गदर्शीय और अनुकरणीय है। यही रास्ता पत्रकारिता का कल्याण और सर्वे भवन्तु सुखिन: के लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है।


मेधावी छात्रों का सम्मान समारोह
Our Correspondent :19 September 2017

भोपाल। खरगौन जिले के पत्रकार बंधुओं के मेधावी छात्र-छात्राओं जिन्होंने वर्ष 2017 में कक्षा 12वीं में 80 प्रतिशत अंक अर्जित किये। ऐसे मेधावी छात्र-छात्राओं को मध्यप्रदेश मीडिया संघ खरगौन द्वारा सम्मानित किया गया एवं खरगौन जिले के समाज सेवियों, पुलिस विभाग में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों का सम्मान किया गया। खरगौन के वल्लभा मैरिज गार्डन, आरती टाॅकिज, डायवर्सन रोड के हाॅल में आयोजित कार्यक्रम में भोपाल से पधारे चैरेवेति पत्रिका के प्रमुख संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार श्री जयकृष्ण गौड़, भगवानपुरा विधायक, समाजसेवी श्री जोशी जी एवं मध्यप्रदेश मीडिया संघ के प्रदेश अध्यक्ष जयवंत ठाकरे ने पुरस्कार वितरण किये। कार्यक्रम में पांच जिलों के पत्रकार बंधुआंे ने भाग लिया एवं उनके परिवारजन भी कार्यक्रम में शामिल हुए।


राजधानी में प्रारंभ होगा मीडिया उद्यमिता केन्द्र
Our Correspondent :11 September 2017

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के अंतर्गत राजधानी में एक मीडिया उद्यमिता केन्द्र की स्थापना की जाएगी। यह केन्द्र नीति आयोग की पहल के अनुरूप कार्य करेगा। मीडिया में उद्यमशीलता के प्रशिक्षण, मीडिया प्रबंधन और एक से अधिक माध्यमों में दक्षता के उद्देश्य से इस केन्द्र को महत्वपूर्ण माना गया है। जनसंपर्क मंत्री और विश्वविद्यालय की प्रबंध उप समिति के अध्यक्ष डॉ. नरोत्तम मिश्र की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में प्रबंध उप समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में केन्द्र की उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा करते हुए केन्द्र प्रारंभ करने का अनुमोदन किया गया। बैठक में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला, कुलाधिसचिव श्री लाजपत आहूजा, संचालक जनसंपर्क श्री अनिल माथुर उपस्थित थे। बैठक में बताया गया कि देश में अपनी तरह के इस प्रथम केन्द्र में मीडिया के वर्तमान परिदृश्य के अनुसार प्रशिक्षण की व्यवस्था होगी। विश्वविद्यालय की विद्या परिषद द्वारा भी बीते माह इस केन्द्र को प्रारंभ करने का अनुमोदन दिया जा चुका है। केन्द्र के लिए विशेषज्ञों और सहयोगियों संस्थाओं के चुने जाने की कार्यवाही शीघ्र की जाएगी। आज की बैठक में सोशल मीडिया के क्षेत्र में गहन शोध की जरूरत को देखते हुए विश्वविद्यालय के अंतर्गत एक शोध केन्द्र स्थापित करने पर भी चर्चा हुई। बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश की प्रत्येक तहसील में विश्वविद्यालय से सम्बद्ध केन्द्र संचालित किया जाएगा, जो विभिन्न पाठ्यक्रम से विद्यार्थियों को जोड़ेगा। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देने के संबंध में भी निर्णय लिया गया। बैठक में विश्वविद्यालय के रीवा परिसर के निर्माण, नई अध्ययन संस्थाओं को विश्वविद्यालय से प्रदान की गई सम्बद्धता और अनुमोदन से संबंधित चर्चा हुई।


गौरी लंकेश ही नहीं, आवाज बुलंद करने के बदले इन 12 पत्रकारों ने भी गंवाई जान
Our Correspondent :6 September 2017

नई दिल्ली: वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की गोली मारकर हत्या के बाद एक बार फिर से व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. हमलावरों ने गौरी लंकेश के घर में घुसकर उन्हें गोली मार दी गई. पिछले कुछ साल पर नजर डालें तो कई मौकों पर पत्रकारों की हत्या कर दी गई. हमारे देश के संविधान में पत्रकारिता को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का दर्जा दिया गया है, लेकिन हाल के कुछ वारदातों पर नजर डालें तो ऐसा लगता है कि इस पेशे से जुड़े लोगों का जीवन खतरे में है. आइए हाल के उन 12 वारदातों पर नजर डालें जिसमें पत्रकार की हत्या कर दी गई.
1--13 मई 2016 को सीवान में हिंदी दैनिक हिन्दुस्तान के पत्रकार राजदेव रंजन की गोली मारकर हत्या कर दी गई. ऑफिस से लौट रहे राजदेव को नजदीक से गोली मारी गई थी. इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है.
2-- मई 2015 में मध्य प्रदेश में व्यापम घोटाले की कवरेज करने गए आजतक के विशेष संवाददाता अक्षय सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. अक्षय सिंह की झाबुआ के पास मेघनगर में मौत हुई. मौत के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है.
3-- जून 2015 में मध्य प्रदेश में बालाघाट जिले में अपहृत पत्रकार संदीप कोठारी को जिंदा जला दिया गया. महाराष्ट्र में वर्धा के करीब स्थित एक खेत में उनका शव पाया गया.
4-- साल 2015 में ही उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में पत्रकार जगेंद्र सिंह को जिंदा जला दिया गया. आरोप है कि जगेंद्र सिंह ने फेसबुक पर उत्तर प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री राममूर्ति वर्मा के खिलाफ खबरें लिखी थीं.
5-- साल 2013 में मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान नेटवर्क18 के पत्रकार राजेश वर्मा की गोली लगने से मौत हो गई.
6-- आंध्रप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार एमवीएन शंकर की 26 नवंबर 2014 को हत्या कर दी गई. एमवीएन आंध्र में तेल माफिया के खिलाफ लगातार खबरें लिख रहे थे.
7-- 27 मई 2014 को ओडिसा के स्थानीय टीवी चैनल के लिए स्ट्रिंगर तरुण कुमार की बड़ी बेरहमी से हत्या कर दी गई.
8-- हिंदी दैनिक देशबंधु के पत्रकार साई रेड्डी की छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में संदिग्ध हथियारबंद लोगों ने हत्या कर दी थी.
9-- महाराष्ट्र के पत्रकार और लेखक नरेंद्र दाभोलकर की 20 अगस्त 2013 को मंदिर के सामने उन्हें बदमाशों ने गोलियों से भून डाला.
10-- रीवा में मीडिया राज के रिपोर्टर राजेश मिश्रा की 1 मार्च 2012 को कुछ लोगों ने हत्या कर दी थी. राजेश का कसूर सिर्फ इतना था कि वो लोकल स्कूल में हो रही धांधली की कवरेज कर रहे थे.
11-- मिड डे के मशहूर क्राइम रिपोर्टर ज्योतिर्मय डे की 11 जून 2011 को हत्या कर दी गई. वे अंडरवर्ल्ड से जुड़ी कई जानकारी जानते थे.
12-- डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के खिलाख आवाज बुलंद करने वाले पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की सिरसा में हत्या कर दी गई. 21 नवंबर 2002 को उनके दफ्तर में घुसकर कुछ लोगों ने उनको गोलियों से भून डाला.


पत्रकार बीमा योजना का लाभ लेने 4 सितम्बर तक करें आवेदन
Our Correspondent :30 Aug, 2017

पत्रकार स्वास्थ्य एवं दुर्घटना समूह बीमा योजना का लाभ लेने के लिए पात्र पत्रकार 4 सितम्बर 2017 तक आवेदन कर सकते हैं। जिन पत्रकारों की बीमा पालिसी अगस्त माह में खत्म हो रही थी, उसे 30 सितम्बर तक के लिए बढ़ा दिया गया है। जिन पत्रकारों की पालिसी अक्टूबर माह तक है, उन्हें भी 4 सितम्बर 2017 आवेदन करना अनिवार्य है। अब पालिसी एक साथ एक अक्टूबर से संचालित की जायेगी। आवेदन-पत्र, प्रीमियम की तालिका और योजना की विस्तृत जानकारी जनसम्पर्क विभाग की वेबसाइट www.mpinfo.org पर उपलब्ध है। आवेदन सीधे जनसम्पर्क संचालनालय (अधिमान्यता शाखा) भोपाल भेजना है।


जन्म-दिवस (तीन अगस्त) पर विशेष
Our Correspondent :31 July 2017


व्यक्ति नहीं, व्यक्तित्व हैं राजेंद्र शुक्ल
राजेन्द्र शुक्ल... मध्यप्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य पर एक चमकदार नक्षत्र के रूप में उपस्थित यह नाम किसी व्यक्ति भर का नहीं है, बल्कि एक सम्पूर्ण व्यक्तित्व का हैं। व्यक्ति से लेकर व्यक्तित्व तक का उनका सफर ठीक वैसा है जो सोने का कुंदन में तब्दील होने का होता है। इस सच्चाई से भला कौन इंकार कर सकता है कि समय और समाज किसी व्यक्ति को नहीं एक व्यक्तित्व को ही याद रखता है। एक अमिट व्यक्तित्व के गुण-धर्म की चर्चा की जाये तो शिखर पर पहुँचकर भी विनम्र बने रहना सबसे बड़ा गुण है। एक शब्द में इसे कहा जाये तो विनम्रता। जहाँ तक राजेंद्र शुक्ल जी की बात हैं तो शायद उन्हें विनम्रता की प्रतिपूर्ति कहना कतई अतिशयोक्ति नहीं हैं। सरलता के गुण ने श्री शुक्ल को विशिष्ट बनाया। मेरे जनसंपर्क विभाग के एक सहयोगी अधिकारी और मित्र श्री मनोज खरे की दो लाइनें इस संदर्भ में याद आती हैं:- ।
जीत नहीं सकते तुम मुझको,क्योंकि कठिन नहीं, आसान बहुत हूँ।
नि:स्वार्थ सेवा, अथक परिश्रम, गहन समर्पण, अटूट निष्ठा, जरूरतमंदों की मदद के लिए सदैव तत्परता और लक्ष्य तक पहुँचाने के लिए अविराम यात्रा की ऊर्जा ने उन्हें भीड़ में अपनी पहचान दी है। पुन: उन्हीं मित्र की कविता की दो पंक्तियाँ याद आ रही हैं-
भीड़ में भीड़ बनकर रहे तो क्या रहे?भीड़ में अपनी निजी पहचान होनी चाहिए।
वे नवोन्मेषी हैं। उनके आंतरिक मन के अंतरिक्ष में विचार-पुंज सदा गतिशील रहते हैं। उनकी निरंतर कुछ नया और कुछ विशेष करने की ऊष्मा हर पल नये विचारों का प्रस्फुटन करती रहती है। लक्ष्य और चुनौतियों से जूझने की विकट जुझारू शक्ति है उनमें। सौंपे गये दायित्वों का कुशल संपादन और निर्वहन करने की क्षमता का आकलन कर विरोधी भी प्रशंसा किये बिना नहीं रहते हैं। वे अपना जीवन हर घड़ी संघर्षों के ताप में तपने देते हैं। वे काम के प्रति अपने आपको झोंक देते हैं। उन्हें पता है कि इन्हीं काँटों भरे रास्तों से गुजरकर ही मंजिल मिलेगी। असफलताएँ उन्हें नई ऊर्जा देती हैं। मुश्किलें उनके लिए अवसर बन जाती हैं। निराशा और हताशा उनके जीवन-कोष में है ही नहीं। वे जानते हैं कि जब जीवन की परीक्षाओं के घन एक बेडौल लोहे के टुकड़े पर निरंतर पड़ते हैं तो जल्दी ही वह टुकड़ा एक आकार ग्रहण कर लेता है जो जन उपयोगी होता है... समाज उपयोगी होता है... देश उपयोगी होता है। निश्चित रूप से व्यक्तित्व के निर्माण में भी ऐसा ही होता है या यूँ कहें कि यही व्यक्तित्व के निर्माण की प्रक्रिया भी है। श्री राजेन्द्र शुक्ल के व्यक्तित्व की उदारता, सहृदयता, संवेदनशीलता और सज्जनता के अद्भुत संयोजन में ऐसा व्यक्तित्व निर्मित हुआ हैं, जिसने सरल, सहज, उदार, स्नेही व्यक्तित्व की नई इबारत लिखी हैं। विशाल व्यक्तित्व के धनी का सशक्त पहलू व्यापक विचारधारा है। उनकी चिंतन क्षमता ने उनके व्यक्तित्व में व्यवहारिकता और अध्यात्मिकता का अनूठा संयोजन किया है। उनकी सफलताओं का आधार उनके करिश्‍माई व्यक्तित्व और करिश्‍माई सोच के चलते एक अलग पहचान बना रहा है। विचारों की व्यापकता का रूचि-नीति में भी परिलक्षित होती है। उनका यहीं सेवा-भाव जरूरतमंद की मदद करने में दिखता है। श्री शुक्ल में सेवा-संकल्प का समर्पित भाव, चुनौतियों की जिद और जूनून के साथ सामना करने का जज्बा उनके व्यक्तित्व के ऐसे पहलू है, जिन्होंने राजनीति को सेवा नीति में बदल दिया है। एक योगी की तरह हर आम-खास की बात, समस्या सुनना, मनन करना और जरूरतमंदों की सेवाभाव से मदद करना उनकी प्राथमिकता में रहता है। उनका यह ऐसा गुण है, जिसमें आम “जन” के “मन” से उनका एक गहरा और आत्मीयता पूर्ण रिश्ता बन जाता है। श्री राजेन्द्र शुक्ल को कभी अपनी छवि निर्माण के लिए प्रयास नहीं करने पड़े। उनकी सद्इच्छाओं ने उनकी छवि को इतना पुख्ता कर दिया है कि लाख कोशिशें उसे धुंधला कर पाने में अक्षम हैं। व्यक्तित्व का प्रभावी पहलू उनकी विशिष्ट संवाद क्षमता है। वे सीधे और सहज भाव से श्रोताओं के साथ सीधा सम्‍पर्क स्थापित कर उनकी समस्याओं का निदान करते हैं। सीधे संवाद की विशिष्ट क्षमता, विचारों की व्यापकता व्यवहार की सहजता, व्यक्तित्व की विशालता का अद्भुत संयोजन का ही नाम श्री राजेन्द्र शुक्ल हैं। श्री राजेन्द्र शुक्ल असाधारण व्यक्ति वाले आम आदमी है। वे दिखते साधारण है लेकिन उनका व्यक्तित्व असाधारण रूप से विशाल और प्रतिभा संपन्न हैं। मानवीय संवेदनाओं, अनुभूतियों से उदार गुणों से भरा दिल है जो हर पल पीड़ित मानवता की सेवा के लिए धड़कता है। वे कार्यों पर जितनी चौकस निगाह रखते हैं, उतनी उनको चिंता है कि दरवाजे पर आए गंभीर रोग से पीड़ित और हर दुखियारे की मदद कर उसका दु:ख-दर्द दूर किया जाए। सहजता, सरलता, सौम्यता, शुचिता के साथ ही तत्परता और त्वरित गति से जन-समस्याओं का निराकरण; ये वे गुण होते हैं जो राजनीति के क्षेत्र में काम करने वाले व्यक्ति को एक मुकाम तक पहुँचाते हैं। विन्ध्य की धरती पर जन्में श्री राजेन्द्र शुक्ल के जीवन और उनके व्यक्तित्व-कृतित्व में ऐसे ही गुणों का समावेश है, जो सार्वजनिक जीवन में और राजनीति में काम करने की विशेषताएँ होती हैं, राजनीति उनके लिए सेवा का भाव रही है।
ओहदा उनके लिए कभी पहचान नहीं बना
श्री शुक्ल ने अपने संस्कारवान पिता समाजसेवी स्व. श्री भैयालाल शुक्ल के गुणों को सदैव ध्यान में रखते हुए स्वयं को ढाला। ओहदा उनके लिए कभी पहचान नहीं बना, बल्कि श्री शुक्ल से ओहदा की पहचान बनी है। घीर-गंभीर ऋषि-मुनि मानव सेवा के लक्ष्य में एक तपस्वी की तरह लीन रहना उनका लक्ष्य है। उनकी सेवा भावना की तपस्या को कभी किसी पद का लालच भंग करने का साहसी ही नहीं जुटा पाया है। लोगों के जीवन में थोड़ी खुशियाँ ला सके और उनके दिलों में यह एहसास जगा सके कि उनका अपना है, अपने इस उद्देश्य में श्री राजेन्द्र शुक्ल पूरी तरह सफल हैं। रात-दिन विन्ध्य के विकास का सपना देखने वाले श्री राजेन्द्र शुक्ल ने अपनी जन्म-भूमि विन्ध्य के विकास के प्रति अपने दायित्व को बखूबी निभाया। उन्होंने विन्ध्य क्षेत्र के आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा पर्यटन विकास को अपनी प्राथमिकता में रखा है। अपने क्षेत्र के विकास के लिए उनके ड्रीम प्रोजेक्ट्स मुकुन्दपुर व्हाईट टाईगर सफारी, चाकघाट से इलाहाबाद और हनुमना से बनारस फोर-लेन का निर्माण, हवाई पट्टी अथवा गुड़ में विश्व का सबसे बड़े 750 मेगावाट सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना हो। श्री शुक्ल ने रीवा के चौतरफा विकास में विशेष रूचि ली है। इसी के चलते रीवा विकास शहर के रूप में उभरा है। रीवा सहित पूरे विन्ध्य को यातायात और संचार के साधन मिलने के लिए उन्होंने कायाकल्प करने का संकल्प लिया है। श्री शुक्ल ने अपने समाजसेवी पिता स्व. श्री भैयालाल शुक्ल की प्रेरणा से रीवा में स्थित लक्ष्मण बाग गौ-शाला को आदर्श गौशाला बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अपनी तमाम व्यस्तता के बाद भी श्री शुक्ल लक्ष्मण बाग गौ-शाला में जाकर गायों की सेवा कर अपने पिता स्व. श्री भैयालाल शुक्ल जी को सच्ची श्रद्धाजंलि अर्पित करते हैं। रीवा में तीन अगस्त 1964 को जन्में श्री राजेन्द्र शुक्ल ने युवा अवस्था में ही राजनीति के प्रति अपनी रूचि बता दी थी, जब वे वर्ष 1986 में रीवा इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए। व्यवसाय कृषि, तैराकी के शौकीन पहली बार वर्ष 2003 में विधानसभा के लिए चुने गए। उसके बाद उन्होंने निरंतर तीसरी बार अपनी विजय को बरकरार रखा। योग्य, कुशल प्रबंधन और प्रशासनिक क्षमता के धनी श्री शुक्ल को जब भी जो जिम्मेदारी सौंपी गई, उन्होंने प्रबंधन कौशल का बेहतर प्रदर्शन कर उसे परिणाममूलक बनाया। अपने बेहतर प्रबंधन से राजनेताओं के सामने श्री शुक्ल ने अपनी पहचान को नए-नए आयाम दिए। विवादों से दूर रहकर बिना शोरगुल के काम करते रहने की नीति पर वे चले। राजनीति को राष्ट्र हित में रखते हुए वे राष्ट्रवादी चिंतन के साथ अपने कदम को आगे बढ़ाना चाहते हैं। श्री शुक्ल को तीन कार्यकाल में मंत्रीमंडल में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली। वे मंत्री पद की कसौटी पर भी सदैव खरे उतरे। नेतृत्व के प्रति निष्ठा और राज्य सरकार के लक्ष्यों और कार्यक्रमों को पूरा करने की प्रतिबद्धता श्री शुक्ल की विशेषता हैं। ऊर्जा मंत्री के रूप में बिजली संकट से जूझते हुए मध्यप्रदेश को रोशन करने की उन्हें चुनौती मिली। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की मंशा के अनुरूप उन्होंने प्रदेश को बिजली संकट से उभारा। आज मध्यप्रदेश सरप्लस बिजली राज्य के रूप में खड़ा है। श्री शुक्ल ने जनसंपर्क मंत्री के रूप में भी एक अलग पहचान स्थापित की। पत्रकारों के हित में अनेक योजनाओं को अमली जामा पहनाया। मुख्यमंत्री श्री चौहान के विश्वास पर खरे उतरते हुए श्री शुक्ल वर्तमान में उद्योग तथा खनिज विभाग के दायित्व को बखूबी निभा रहे हैं। वे प्रदेश में औद्योगिक क्रांति का संकल्प लेकर राज्य में उद्योगों का जाल बिछाने का उन्होंने लक्ष्य तय किया हैं। खनिज आधारित उद्योगों की स्थापना तथा राजस्व वृद्धि करने में सफलता पायी है।


पेड न्यूज से संबंधित प्रकरणों पर हो त्वरित कार्यवाही
Our Correspondent :29 July 2017

पेड न्यूज से संबंधित प्रकरणों में रिटर्निंग आफिसर त्वरित कार्रवाई करें। कार्रवाई के बाद राज्य स्तरीय मीडिया सर्टिफिकेशन एण्ड मानीटरिंग कमेटी (एम.सी.एम.सी.) को भी जानकारी दें। राज्य स्तरीय एम.सी.एम.सी. की बैठक में पेड न्यूज से संबधित प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन के विषय में चर्चा हुई। बैठक में सदस्य श्री मोती सिंह ने कहा कि संबंधित नगरीय निकायों में प्रसारित एवं प्रकाशित खबरों पर नजर रखी जाये। सचिव राज्य निर्वाचन आयोग श्रीमती सुनीता त्रिपाठी ने कहा कि सभी रिटर्निंग आफिसर्स को इस संबंध में निर्देशित किया जा चुका है। उल्लेखनीय है कि अनुसूचित क्षेत्र की 14 नगरपालिका परिषद और 23 नगर परिषद में निर्वाचन होगा। अध्यक्ष पद का उप निर्वाचन 2 नगरपालिका परिषद और 2 नगर परिषद में होगा। अध्यक्ष को पद से वापस बुलाये जाने के लिये 2 नगरपालिका परिषद और एक नगर परिषद में निर्वाचन होगा। अनुसूचित क्षेत्र के नगरीय निकायों में खण्डवा जिले की नगर परिषद छनेरा, रतलाम जिले की नगर परिषद सैलाना, बैतूल जिले की नगरपालिका परिषद सारनी, नगर परिषद आठनेर एवं चिचोली, झाबुआ जिले की नगरपालिका परिषद झाबुआ, नगर परिषद रानापुर, थांदला, पेटलावद, अलीराजपुर जिले की नगरपालिका परिषद अलीराजपुर, नगर परिषद भाभरा, जोबट, खरगौन जिले की नगर परिषद भीकनगाँव, महेश्वर, मण्डलेश्वर, बुरहानपुर जिले की नगरपालिका परिषद नेपानगर, छिन्दवाड़ा जिले की नगरपालिका परिषद जुन्नारदेव, दमुआ, पांढुरना, सौंसर, नगर परिषद हर्रई, मोहगाँव, सिवनी जिले की नगर परिषद लखनादौन, मण्डला जिले की नगरपालिका परिषद मण्डला, नैनपुर, नगर परिषद निवास, बम्हनी बंजर, बिछिया, डिण्डोरी जिले की नगर परिषद डिण्डोरी, शहपुरा, बालाघाट जिले की नगर परिषद बैहर, शहडोल जिले की नगरपालिका परिषद शहडोल, नगर परिषद जयसिंह नगर, बुढ़ार, अनूपपुर जिले की नगरपालिका परिषद कोतमा, बिजुरी और उमरिया जिले की नगरपालिका परिषद पाली में निर्वाचन होगा। अध्यक्ष पद का उप निर्वाचन जिला खरगोन की नगरपालिका परिषद सनावद, ग्वालियर की नगरपालिका परिषद डबरा, सतना की नगर परिषद जैतवारा और मुरैना की नगर परिषद कैलारस में होगा। अध्यक्ष को पद से वापस बुलाने के लिये जिला नरसिंहपुर के नगरपालिका परिषद गाडरवारा, मुरैना जिले की नगरपालिका परिषद सबलगढ़ और विदिशा जिले की नगर परिषद शमशाबाद में निर्वाचन होगा। मतदान 11 अगस्त को और मतगणना 16 अगस्त को होगी। बैठक में उपसचिव राज्य निर्वाचन आयोग श्री गिरीश शर्मा, संयुक्त संचालक जनसंपर्क श्री आर.बी. त्रिपाठी, समिति के सदस्य श्री गिरीश उपाध्याय और श्री महावीर सिंह उपस्थित थे।


सुचरित्र युवा ही राष्ट्र निर्माण करेंगे - दीदी मंदाकिनी
Our Correspondent :28 July 2017

प्रसिद्ध कथावाचक और औजस्वी वक्ता दीदी मंदाकिनी ने युवाओं से आव्हान किया कि वे पाश्चात्य संस्कृति का अंधानुकरण न करें। पाश्चात्य संस्कृतिक की आंधी की परत जमा हो गई है, आवश्यकता इस बात की है कि हम अपनी अस्मिता को जागृत करें और उसे विकसित करें। सुचरित्र युवा और समाज ही राष्ट्र को शक्ति प्रदान करेंगे और राष्ट्र निर्माण करेंगे। रामचरितमानस मर्मज्ञ दीदी मंदाकिनी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित सत्रारंभ समारोह में द्वितीय दिवस ‘राष्ट्रनिर्माण में युवा’ विषय पर विद्यार्थियों को सम्बोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि राम राज्य में भौतिक दरिद्रता नहीं थी, रावण राज्य में भी नहीं थी, लेकिन वहां मानसिक दरिद्रता थी। युवाओं की वर्तमान स्थिति को लेकर उन्होंने कहा कि आज संस्कार, संस्कृति, ज्ञान सभी मौजूद हैं, लेकिन फिर भी युवाओं में भटकाव है। इस पर सबको मिलकर विचार करना चाहिए। उन्होंने आने वाले पत्रकारों से आव्हान किया कि वे कलम की शक्ति का सदुपयोग कर भारत को फिर से विश्व गुरु बनाएँ। सामाजिक व्यवस्था को लेकर उन्‍होंने कहा कि आज चहुँओर विकास हो रहा है। सड़कें, सेतु, विद्यालय, अस्पताल, तेज गति के वाहनों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन क्या यह वास्तव में विकास है। अस्‍पतालों की संख्या बढ़ने का अर्थ है कि रोग बढ़ रहे हैं। न्यायालयों की संख्या बढ़ रही है, इसका अर्थ है कि झगड़े बढ़ रहे हैं। तेज गति के वाहनों के कारण दूरियाँ कम हो रही हैं, लेकिन हृदयगत दूरी बढ़ रही है। रामचरितमानस के लक्ष्मण एवं सुपर्णखा के एक प्रसंग का वर्णन करते हुए दीदी मंदाकिनी ने कहा कि बढ़े हुए नाखून वासना का प्रतीक है। यह जब देह से आगे बढ़ जाये तो उसे काटना आवश्‍यक होता है, उसी प्रकार मनुष्य की वासना अमर्यादित हो जाये तो समाज में व्यक्ति के नाक-कान कट जाते हैं। प्रेम और वासना में अंतर है, पाश्चात्य संस्कृति के लोग इस बात को नहीं समझ पाते हैं। आज है विश्वास का संकट विद्यार्थियों को एक घटना का उदाहरण देते उन्होंने कहा कि आज मनुष्य को मनुष्य के ऊपर ही विश्वास नहीं रहा इसीलिए वह चैकीदारी के लिए वह कुत्ते पाल रहा है। प्रतिदिन मीडिया की खबरें देखकर, पीड़ा और दुख होता है। ऐसा लगता है कि सकारात्मक चिंतन समाप्त हो गया है । सफलता की होड़ यदि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के लिए हो तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन यह प्राणलेवा बन गई है। इसने आक्रामकता और टकराव का रूप ले लिया है। राजनीति ही नहीं कला, संगीत और खेल जगत में भी आक्रामकता देखने को मिलती है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने दीदी मंदाकिनी का शॉल-श्रीफल भेंट कर सम्मान किया। कार्यक्रम का संचालन पत्रकारिता विभाग की अध्यक्ष डॉ. राखी तिवारी ने किया।


समय, ईश्वर और स्वयंभू है- डॉ. अग्रवाल
Our Correspondent :28 July 2017

देश के राष्ट्रपति के पूर्व सचिव रहे डॉ. विजय अग्रवाल ने कहा कि समय, ईश्वर की तरह है और स्वयंभू है, जिसका निर्माण किसी ने नहीं किया। समय प्रबंधन कुछ भी नहीं है, स्वयं का प्रबंधन ही समय प्रबंधन होता है। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित सत्रारंभ समारोह के दूसरे दिन ‘समय प्रबंधन’ विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. अग्रवाल ने कहा कि अक्सर लोग समयबद्धता का पालन न करने के कारण दूसरों पर आरोप लगाकर बहाना बनाते हैं, जबकि वास्तव में कोई भी आपको आपके मन के विरूद्ध नहीं ले जा सकता और आपके समय में हस्तक्षेप कर सके। व्यक्ति ही समय प्रबंधन करने वाला मूल तत्व है। समय ईश्वर की तरह ही अदृश्य है। समय की कीमत को बताते हुए उन्होंने कहा कि समय का मापन नहीं किया जा सकता, यह एकमात्र एहसास है। समय ही जिंदगी में एकमात्र ऐसी अनमोल कीमती वस्तु है, जिसको ईश्वर ने सभी को समान रूप से दिया है। भगवान शिव ही हैं जो समय से परे हैं, इसीलिए उन्हें महाकाल कहा गया है। दुनिया में जितने भी महान लोग हुए हैं, उनके पास कुछ अतिरिक्त योग्यता नहीं थी, केवल उन्होंने समय का सही उपयोग करके खुद को महान बनाया। विद्यार्थियों को समय का सदुपयोग करने को लेकर उन्होंने कहा कि आप जिस समय जो काम करें उसी में ही तल्लीनता से लगें। इससे काम की गुणवत्ता में फर्क आयेगा। उन्होंने कहा कि समय आपकी पसंद या नापसंद के आधार पर मापा जाता है। जिस काम को आप पसंद करते हैं उसमें समय के बीतते का पता नहीं लगता। मन और समय के रिश्ते को समझना बहुत जरूरी है। ज्ञानयोग, कर्मयोग और भक्तियोग तीनों का मिश्रण ही समययोग का निर्माण करता है। इस सत्र में विश्वविद्यालय के कुलाधिसचिव श्री लाजपत आहूजा भी मंच पर मौजूद थे। सत्र का संचालन कम्प्यूटर विभाग के सह प्राध्यापक डॉ. मनीष माहेश्वरी ने किया।


पत्रकारिता के लिए संवेदनशील बने- श्री अंसारी
Our Correspondent :27 July 2017

माखनलाल चतुर्वेदी राष्‍ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में सत्रारंभ कार्यक्रम में शुभारम्‍भ के बाद तीन सत्र भी आयोजित हुए। ‘टीवी न्यूज़ का भविष्य’ विषय पर हुए सत्र को संबोधित करते हुए आज तक के न्यूज़ एंकर श्री सईद अंसारी ने कहा कि पत्रकारिता में संवेदनशील होना बहुत आवश्यक है। दूसरों के दर्द, तकलीफ को महसूस करने वाला व्यक्ति ही सफल और अच्छा पत्रकार होता है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य सिर्फ पेशा नहीं होना चाहिए,बल्कि मिशन होना चाहिए क्योंकि मिशन है तो ही मीडिया इंडस्ट्री में लम्बे समय तक टिका जा सकता है। पत्रकारिता के विद्यार्थियों को लेकर उन्होंने कहा की टीवी न्यूज़ में भविष्य उज्जवल है।आने वाले समय में विषय आधारित चैनल होंगे। स्कोप बढेगा लेकिन प्रतिस्पर्धा भी बढेगी, इसके लिए उन्हें तैयार होना चाहिए। आज टेलीविज़न न्यूज़ में भाषा और खबरों की समझ होने के साथ सृजनात्मकता होना भी आवश्यक है। एक टेलीविज़न न्यूज़ चैनल में लगभग 20 विभाग होते है जिनके लिए मानव संसाधन चाहिए। मीडिया में आने वाला समय विशेषज्ञता का होगा। विद्यार्थियों को प्रयास करना चाहिए कि इंटर्नशिप के दौरान ही वह अपनी नौकरी पक्की कर ले। टीवी न्यूज़ के भविष्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय स्तर पर शुरू हुए न्यूज़ चैनल के कारण पत्रकारों के लिए काफी अवसर उपलब्ध है। पत्रकारिता विभाग की अध्‍यक्ष डॉ राखी तिवारी ने सत्र का संचालन किया।
मनुष्‍य के मस्तिष्‍क का विस्‍तार है सिनेमा – श्री सेन
समारोह के तीसरे सत्र में फिल्‍म निदेशक श्री सुदीप्‍तो सेन ने फिल्‍म निर्माण में केरियर विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि फिल्‍म मनुष्‍य के मस्तिष्‍क और भावनाओं का विस्‍तार है, जो चीजें हम रोज महसूस करते हैं उसे सिनेमा आगे बढ़ाता है। उन्‍होंने कहा कि फिल्‍म निर्माण में केरियर के लिए हमें इस तरह से तैयार होना होता है कि फिल्‍म मैकिंग उद्योग हमें चुने। मशीन को चलाकर फिल्‍म का निर्माण नहीं किया जा सकता है। 122 वर्ष लम्‍बे इतिहास में सिनेमा पूरी तरह बदल गया है। दुनिया की नजरों में भारत बहुत बड़ा बाजार है। यह बात उन्‍होंने जब महसूस की, जब देश से अचानक लगातार कई सुंदरियां विश्‍व पटल पर उभर कर आईं और उन्‍हें मिस यूनिवर्स, मिस वर्ल्‍ड जैसे खिताब मिले। बाद में पता लगा कि एक सौंदर्य प्रसाधन की कंपनी का कारोबार 90 से लेकर 1900 करोड़ हो गया है। हॉलीवुड सिनेमा हमारे यहां की गरीबी-भुखमरी को दिखाकर करोड़ों रुपये कमा लेता है। इस सत्र का संचालन विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग के अध्‍यक्ष डॉ पवित्र श्रीवास्‍तव ने किया।‘विश्वविद्यालय एक परिचय’ पर आयोजित चतुर्थ सत्र में श्री संजय द्विवेदी ने विश्वविद्यालय का इतिहास और विकास, डॉ. पवित्र श्रीवास्‍तव ने प्रवेश अनुशासन और रैगिंग और डॉ. राखी तिवारी ने पारस्‍परिक सम्‍बन्‍ध, डॉ. राजेश पाठक ने परीक्षा विषय पर विद्यार्थियों को सम्‍बोधित किया।


नोबेल पुरस्कार विजेता श्री कैलाश सत्यार्थी ने किया युवाओं से आव्हान
Our Correspondent : 27 July 2017

‘भय मुक्त, सुरक्षित भारत बनाएँ’
शांतिदूत के रूप में पहचाने जाने वाले, नोबेल पुरस्कार से सम्‍मानित श्री कैलाश सत्यार्थी ने युवाओं से आव्हान किया कि वह भय मुक्त और सुरक्षित भारत के निर्माण के लिए आगे आएं। युवा समस्या नहीं, समाधान है। हमारी आज़ादी जब तक मुकम्मल नहीं है जब तक की हम बहन एवं बेटियों को सुरक्षित नहीं कर लेते। वेदों ने भी कहा है कि समाज के बेहतरी का विचार रखने वाले लोगो को एक साथ आना चाहिए। विश्वभर में भारत की छवि बदली है। अब हमे आशा भरी नज़रों से देखा जाने लगा है। यह विचार श्री सत्यार्थी ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के सत्रारंभ समारोह में व्‍यक्‍त किये। वे शुभारम्‍भ सत्र के मुख्‍य अतिथि थे। उन्‍होंने कहा कि हमारे मन में अन्‍याय, अत्‍याचार और गलत चीजों के खिलाफ गुस्‍सा होना चाहिए, क्‍योंकि वह एक ता‍कत है और परिवर्तनकारक होगा। दुनियाभर में नौजवानों, महिलाओं और बच्‍चों का हिंसा में उपयोग किये जाने को लेकर उन्‍होंने चिंता जताई और सवाल किया कि भारत जैसे देश में बच्‍चे कब सुरक्षित होंगे। हर घंटे, दो बच्‍चे यौन शोषण का शिकार हो रहे हैं। उन्‍होंने युवाओं से आव्हान किया कि वे परिवर्तन के लिए आगे आएं। जो लोग बाहर से सिर्फ आलोचना करते हैं वे इतिहास नहीं लिखते। इतिहास वो बनाते हैं जो हार या जीत की परवाह करे बगैर मैदान में उतर जाते हैं। दुनियाभर में बच्‍चों के शोषण को लेकर उन्‍होंने कहा कि यह तर्क पूर्णत: असत्‍य है कि गरीबी के कारण बच्‍चे पुस्‍तकों-स्‍कूलों से दूर हैं। यदि विश्‍वभर का एक सप्‍ताह के सेना का खर्च कम कर दिया जाए तो या फिर यूरोप में लिपिस्टिक-पाउडर पर खर्च होने वाला छठवां हिस्‍सा बचा लिया जाए या अमेरिका में तंबाखू पर होने वाले खर्च का पांचवा हिस्‍सा बचा लिया जाए तो दुनियाभर के सारे बच्‍चों को स्‍कूल में पढ़ाया जा सकता है। सभी बच्‍चों को प्राथमिक स्‍कूल भेजने पर मात्र 22 बिलियन डॉलर ही खर्च हो रहे हैं, जबकि सेना पर दो ट्रिलियन डॉलर प्रतिवर्ष खर्च होते हैं।
आम आदमी की ताकत से बदला संविधान
समारोह में श्री सत्‍यार्थी ने भारत में शिक्षा के अधिकार के कानून को लेकर किये गये उनके प्रयास का उल्‍लेख किया। उन्‍होंने कहा कि बालश्रम से मुक्‍त हुये बच्‍चों को स्‍कूल में दाखिला दिलाने के दौरान उन्‍हें अनुभव हुआ कि बच्‍चों की शिक्षा को लेकर कानून बनना चाहिए। लेकिन इसके लिए संविधान में संशोधन आवश्‍यक होगा। इस बारे में उन्‍होंने तत्‍कालीन प्रधानमंत्री श्री अटलबिहारी वाजपेयी से भी चर्चा की। इसके बाद उन्‍होंने कन्‍याकुमारी से यात्रा निकाली और इस यात्रा में 163 सांसद अलग-अलग स्‍थानों पर शामिल हुए। दिल्‍ली में यात्रा की समाप्ति पर प्रधानमंत्री, राष्‍ट्रपति बच्‍चों से भी मिले। यह एक आम आदमी की ताकत है कि चार महीने में भारत का संविधान बदला और शिक्षा का अधिकार कानून बना। आज इससे करोड़ों बच्‍चे लाभान्वित हो रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि हमारा देश लगातार आगे बढ़ रहा है। दुनियाभर में भारत की छवि बदली है। कई ऐसे देश हैं जो आज भारतीयों से प्रतिस्‍पर्धा के कारण चिढ़ते हैं और कुछ वीजा बंद करने की मांग कर रहे है, ऐसे भी देश हैं जहां भारतीय उनकी दौलत की बुनियाद बन चुके हैं।

नोबेल पुरस्‍कार के बाद चालीस हजार आमंत्रण मिले
विश्‍वभर में बालश्रम के विरुद्ध आंदोलन के नेतृत्वकर्ता श्री सत्‍यार्थी ने कहा कि वर्ष 2014 नोबेल पुरस्‍कार मिलने के बाद उन्‍हें विश्‍वभर से कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निमंत्रण प्राप्‍त हुए। उन्‍हें लगभग अभी तक 40 हजार आमंत्रण प्राप्‍त हुए। उनकी टीम ने इसका अध्‍ययन किया और पाया कि यदि वे इन सब कार्यक्रमों में भाग लेंगे तो उन्‍हें 175 वर्ष लगेंगे।
शिक्षा खुद को जानने की शुरुआत
श्री सत्‍यार्थी ने एक कहानी के माध्‍यम से विद्यार्थियों को बताया कि शिक्षा खुद को जानने की शुरुआत है, सही मायने में सीखने के लिए हमें अहंकार को छोड़ना होगा। उन्‍होंने मीडिया के विद्यार्थियों को कहा कि जिस पाठ्यक्रम को उन्‍होंने चुना है वह इस प्रकार का यज्ञ है जिसमें गुणात्‍मकता होगी। कलम की ताकत बहुत बड़ी होती है और लिखे और पढ़े गये शब्‍द कभी समाप्‍त नहीं होते। वे एक ईको सिस्‍टम का निर्माण करते हैं। हमारे यहां शब्‍द को आकाश भी कहा गया है। वर्तमान में टेलीविजन के टीआरपी ट्रैण्‍ड को लेकर उन्‍होंने कहा न्‍यूज चैनल में टीआरपी सैक्‍स स्‍कैण्‍डल, पॉलिटिकल स्‍कैण्‍डल और व्‍यक्तियों के आसपास ही है। टीवी मीडिया वंचित वर्ग और महिलाओं, बच्‍चों को कवर नहीं करता। जो विज्ञापन दिला सके वही कंटेंट टीवी पर नजर आता है। इस कारण समाज का एक बड़ा हिस्‍सा हमेशा पीछे छूट जाता है। उन्‍होंने कहा कि मीडिया को मुद्दों के फॉलोअप पर भी काम करना चाहिए। क्‍योंकि इसमें चेहरों के पीछे जिंदगियां होती है और काला-सफेद सत्‍य होता है।

बच्‍चों के चेहरों पर ईश्‍वर को देखा
श्री सत्‍यार्थी ने विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा किए। उन्‍होंने बताया कि किस तरह ‘संघर्ष जारी रहेगा’ पत्रिका शुरू करने के बाद पंजाब की एक घटना ने उनका जीवन बदल दिया। बंधुआ मजदूरों को पंजाब के गांव से छुड़ाने के दौरान उनकी पिटाई भी हुई। वे एक मजदूर के अनुरोध पर उसकी बेटी साबो को उन लोगों से छुड़ाने के लिए गये थे, जिसको मजदूर के मालिकों ने वेश्यावृत्ति के लिए बेच दिया था। इस मामले में उन्‍होंने दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय में बंदी प्रत्‍यक्षीकरण याचिका भी लगाई। बाद में 36 लोग न्‍यायालय के आदेश से मुक्‍त किये गये। दिल्‍ली में जब वे आये तो उन्‍होंने आजाद हुए बच्‍चों के चेहरों पर ईश्‍वर को देखा। कार्यक्रम की अध्‍यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.बृज किशोर कुठियाला ने कहा कि विद्यार्थियों को संकल्‍प लेना चाहिए कि वे केरियर के अलावा अपने देश और समाज के लिए क्‍या योगदान कर सकते हैं। नवागत विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उन्‍होंने कहा कि सत्रारंभ कार्यक्रम में समाज के प्रमुख व्‍यक्तियों को इसलिए आमंत्रित किया जाता है ताकि विद्यार्थी अपने केरियर के अतिरिक्‍त कुछ और ज्ञान भी प्राप्‍त कर सके, जो, उन्‍हें अपने जीवन में काम आए। कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम के संयोजक एवं जनसंचार विभाग के अध्‍यक्ष श्री संजय द्विवेदी ने किया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. कुठियाला ने श्री सत्‍यार्थी का शॉल-श्रीफल भेंटकर सम्‍मान भी किया। मंच पर पूर्व राष्‍ट्रपति ए.पी.जे. अब्‍दुल कलाम को श्रद्धा-सुमन भी अर्पित किए गए। प्रारम्‍भ में विद्यार्थियों ने सरस्‍वती वंदना प्रस्‍तुत की। कार्यक्रम में ‘अतुल्‍य भारतम’ और ‘मीडिया नवचिंतन’ पत्रिका के नये अंक का विमोचन भी किया गया। फोटो कैप्‍शन - फोटो नंबर – 8259 – नोबल पुरस्‍कार से सम्‍मानित श्री कैलाश सत्‍यार्थी विद्यार्थियों के साथ सेल्‍फी लेने से खुद को रोक नहीं पाए।


जनसंपर्क मंत्री डॉ. मिश्र हिन्दी पत्रकारिता दिवस समारोह में शामिल हुए
Our Correspondent :30 May 2017
जनसंपर्क, जल-संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने आज हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर माधवराव सप्रे स्मृति समाचार-पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान में अलंकरण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि हिस्सा लिया। मंत्री डॉ. मिश्र ने समारोह में पत्रकार श्री विजय मनोहर तिवारी को माधवराव सप्रे पुरस्कार और कला समीक्षक श्री विनय उपाध्याय को महेश सृजन सम्मान से सम्मानित किया। अध्यक्षता प्रधान आयकर निदेशक मध्यप्रदेश डॉ. राकेश कुमार पालीवाल ने की। जनसंपर्क मंत्री डॉ. मिश्र ने कहा कि संग्रहालय के कार्यक्रम सार्थक और उत्साहवर्धक होते हैं। सम्मानित हुए पत्रकार और लेखक अपने क्षेत्र में समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं। डॉ. मिश्र ने श्री तिवारी और श्री उपाध्याय को बधाई दी। संग्रहालय के संस्थापक-संयोजक श्री विजयदत्त श्रीधर ने डॉ. नरोत्तम मिश्र का पुष्प-गुच्छ और शाल से स्वागत किया। श्री राकेश पाठक ने संग्रहालय की गतिविधियों की जानकारी दी। श्री राकेश दीक्षित ने आभार माना। इस अवसर पर राजधानी के वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, पत्रकारिता के शोधार्थी उपस्थित थे।


नरेन्द्र मोदी भारत के लिए ईश्वरीय वरदान तीन साल में भारत की छवि विश्व शिखर पर- शिवराज सिंह चौहान

Our Correspondent :25 May 2017
भोपाल। भारतीय जनता पार्टी प्रदेश मीडिया की एक दिवसीय प्रादेशिक कार्यशाला का उद्घाटन आज प्रदेश कार्यालय पं. दीनदयाल परिसर में मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने दीप प्रज्जवलित कर किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आजादी के बाद देश को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के रूप में क्रांतिकारी, दूरदृष्टा, निर्णय लेने वाला नेतृत्व मिला है। श्री नरेन्द्र मोदी का तीन वर्ष का कार्यकाल बेमिसाल रहा है। गांव, गरीब, किसान, मजदूर, आम आदमी को अपनी सरकार होने की सुखद अनुभूति तो हुई है, वहीं श्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक नेता के रूप में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश की सम्मानजनक पहचान बनाई है। उन्होनें श्री नरेन्द्र मोदी को देश के लिए ईश्वरीय वरदान बताते हुए उनके कृतित्व और व्यक्तित्व की भूरि-भूरि सराहना की। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चैहान ने कार्यशाला में उपस्थित मीडिया प्रभारियों और प्रवक्ताओं से कहा कि श्री नरेन्द्र मोदी के उल्लेखनीय परफार्मेंस की छवि जन-जन के मानस पटल पर अंकित करने के कार्य में जुट जायें। 26 मई से 15 जून तक आयोजित ‘मोदी फेस्ट’ अभियान में जन-जन को केन्द्र सरकार की तीन वर्ष की उपलब्धियों से दृश्य-श्रव्य सभी संचार माध्यमों से रूबरू करायें। मुख्यमंत्री श्री चौहान का प्रदेश मीडिया प्रभारी श्री लोकेन्द्र पाराशर ने फूल-मालाओं से स्वागत किया। प्रदेश उपाध्यक्ष श्री विजेश लूनावत का प्रदेश सह मीडिया प्रभारी श्री संजय गोविन्द खोचे ने स्वागत किया। कार्यशाला का संचालन प्रदेश सह मीडिया प्रभारी श्री सर्वेश तिवारी ने किया। आभार प्रदर्शन प्रदेश प्रवक्ता सुश्री राजो मालवीय ने आभार व्यक्त किया। श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के तीन वर्षों के कार्यकाल को स्वर्ण युग बताते हुए कहा कि तीन वर्षों के नेतृत्व में श्री नरेन्द्र मोदी को समाजशास्त्रियों, विश्लेषकों ने युग-पुरूष, राष्ट्र ऋषि के रूप में संबोधित किया है और विश्व के सर्वमान्य नेताओं में अग्रणी बताया है। उन्होंने कहा कि एनडीए प्रथम अटलजी के नेतृत्व देश की विकास दर आठ प्रतिशत पहुंची थी, महंगाई सिमट गयी थी। यूपीए के दौर में डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में पिछले 10 वर्षो में विकास दर 4 प्रतिशत पर सिमट गयी और महंगाई ने पंख पसारे। नीतिगत अस्त व्यस्तता से श्री नरेन्द्र मोदी को सामना करना पड़ा लेकिन उनके अथक प्रयासों, शीघ्र निर्णयात्मक पहल से देश की विकास दर लगभग 8 प्रतिशत पहुँच रही है और महंगाई का दंश टूट गया है। भारत की दुनिया में नई पहचान बनी है। उन्होंने बताया कि मोदी फेस्ट के प्रारंभिक दिन 26 मई को सेतु के उदघाटन के साथ तीन वर्षो की उपलब्धियों का जश्न मनाया जायेगा। प्रदेश की जनता के नाम संबोधन सभी नगरीय निकायों के मुख्यालयों पर सुना जायेगा। इसी तरह 31 को प्रदेश की जनता के नाम मुख्यमंत्री का संबोधन 23040 ग्राम पंचायतों में सुना जायेगा। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ग्राम पंचायत से केन्द्र तक सत्ता में है। पार्टी प्रवक्ताओं, मीडिया प्रभारियों पर गंभीर दायित्व है। वे इस अभियान को गंभीर दायित्व के रूप में पूरा करें। जनता और संचार माध्यम सकारात्मक भाव से सूचना सज्जित होकर गंतव्य तक पहंुचे और पार्टी तथा राज्य एवं केन्द्र सरकार की सकारात्मक छवि का सृजन कर यश के भागीदार बनें। उत्खनन नीति की धुरी मेहनतकश होंगे श्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा कि नर्मदा सेवा यात्रा में नदी संरक्षण के अनुरूप सकारात्मक वातावरण बना है। हरे भरे मध्यप्रदेश की कल्पना साकार हुई है। प्रकृति और नदियों के संरक्षण के अनुरूप वातावरण बना है। खण्डवा के मीडिया प्रभारी श्री सुनील जैन और सिराजुद्दीन परफेक्ट छायाकार ने सिंहस्थ का चित्र भेंट किया। सभी ने छायाचित्र की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

राष्ट्रवाद, विकास, सुशासन, अंत्योदय भाजपा का विचार- श्री विजेश लुणावत


दूसरे सत्र में पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री विजेश लुणावत ने संबोधित करते हुए कहा कि 26 मई से देशव्यापी मोदी फेस्ट का 21 दिवसीय अभियान आरंभ होगा, इसमें आपकी महत्वपूर्ण भागीदारी होगी। जन-जन तक प्रचार माध्यमों से श्री नरेन्द्र मोदी के ‘‘सबका साथ सबका विकास’’ तुष्टीकरण किसी का नहीं, सभी को न्याय सभी को समान अवसर का संदेश संप्रेषित करें। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता आधारित राजनैतिक दल है। देश में पार्टी के 12 करोड़ कार्यकर्ता है। मध्यप्रदेश में कार्यकर्ताओं की शक्ति अंक बल एक करोड़ है। यही पार्टी संगठन की असली शक्ति है जिसने केन्द्र में सत्तासीन किया और प्रदेश में 13 वर्षो से भाजपा विकास और सुशासन के लिए समर्पित है। पार्टी का लक्ष्य अंत्योदय है और गांव, गरीब, किसान, मजदूर, आम आदमी पार्टी और सरकार की रचनात्मक जनहितैषी गतिविधियों की धुरी है। उन्होंने कहा कि पार्टी का विस्तार जिला, मंडल, मतदान केन्द्र, नगर ग्राम केन्द्र तक हुआ है। मतदान केन्द्र सशक्त हुए है। इन्हें आने वाली चुनौतियों के लिए सजग, तत्पर और सज्जित करना है। चुनाव की रणभूमि में विजय स्थल हमारा मतदान केन्द्र है जिसकी सुदृढ़ बनावट और सशक्तिकरण पर हमारी रणनीति निर्भर होती है। वर्ष भर में 6 कार्यक्रमों का आयोजन हमें संगठनात्मक रूप से सशक्तिकरण का मार्ग सुझाता है। श्री विजेश लुणावत ने कहा कि 1980 में भारतीय जनता पार्टी के गठन के दौरान मुंबई अधिवेशन में पार्टी का ताज ग्रहण करते हुए श्री अटलबिहारी वाजपेयी ने अंधेरा छटने, सूर्य की किरणे विकीर्ण होने की भविष्यवाणी की थी। 16 मई 2014 को लोकसभा चुनाव में पार्टी को जनादेश मिलने और 26 मई को भारत में प्रचंड बहुमत वाली श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार के गठन के साथ वह भविष्यवाणी फलित हुई है। इसी सफलता के बाद मोदी सरकार सफलता के तीन वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में देशव्यापी मोदी फेस्ट का आयोजन किया जा रहा है। केन्द्र की उपलब्धियां जन-जन तक पहुँचाने में जुट जायें, मोदी सरकार की उपलब्धियां हमारी धरोहार है। तीसरे सत्र में आईटी विभाग के प्रदेश संयोजक श्री शिवराज डाबी ने प्रजेन्टेशन दिया और कहा कि इलेक्ट्रानिक मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण हो गयी है। यह संचार का प्रभावी माध्यम है। सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने के लिए आईटी की शक्ति को अंगीकार करें। मीडिया संपर्क प्रमुख डॉ. अनिल सौमित्र ने कहा कि मोदी सरकार 26 मई को तीन वर्ष पूरे कर रही है। केन्द्र सरकार की तीन वर्षो की उपलब्धियों को जन जन तक पहंुचाने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करें। उन्होंने कहा कि आर्थिक, सामाजिक एवं विभिन्न मुद्दों पर मोदी सरकार ने ऐतिहासिक उपलब्धियां अर्जित की है।

अपनी उपयोगिता सिद्ध करें मीडिया प्रभारी - लोकेन्द्र पाराशर


समापन सत्र को संबोधित करते हुए पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी श्री लोकेन्द्र पाराशर ने कहा कि आमतौर पर सभी राजनैतिक दल एक जैसे दिखते है लेकिन भारतीय जनता पार्टी एकमात्र ऐसा राजनैतिक दल है जो अन्य दलों से भिन्न है। हमारे पास आत्मशुद्धि से परिपूर्ण नेताओं की विशाल श्रृंखला है। हमारे यहां नेतृत्व के प्रति अटूट श्रद्धा है और यही हमारे दल की पूंजी है। उन्होंने कहा कि हम राजनीति के क्षेत्र में बौद्धिक कार्य करने के लिए निकले है। समसामयिक मुद्दों और सामूहिक विषयों पर हमारी पकड़ होनी चाहिए। हमें अपनी उपयोगिता सिद्ध करनी है। उन्होंने कहा कि हम संवेदनशील सरकार और संगठन के कार्यकर्ता है। संवाद, संपर्क और समन्वय के साथ हम कार्य करें। श्री पाराशर ने दिल्ली में संपन्न हुई राष्ट्रीय मीडिया कार्यशाला के विषयों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला में प्रदेश प्रवक्ता श्री राहुल कोठारी, सुश्री राजो मालवीय, श्री हिदायतुल्ला शेख, श्री उमेश शर्मा, श्री रजनीश अग्रवाल, श्री राजपालसिंह सिसौदिया, मीडिया संपर्क प्रमुख डॉ. अनिल सौमित्र सहित संभागीय मीडिया प्रभारी, जिला मीडिया प्रभारी एवं जिला सह मीडिया प्रभारी उपस्थित थे।


सकारात्मकता और नकारात्मकता के बीच खड़ा है सोशल मीडिया

Our Correspondent :22 May 2017
भोपाल, 20 मई। सोशल मीडिया के कारण यह एक पुनर्जागरण का समय है। हमें इससे जुडऩा पड़ेगा। सोशल मीडिया ऐसा माध्यम है, जिसका सदुपयोग भी किया जा सकता है और दुरुपयोग भी। आज सोशल मीडिया नकारात्मकता और सकारात्मकता के बीच खड़ा है। आवश्यकता है कि हम इन दोनों के बीच अपने विवेक को खड़ा करें। यह विचार वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. पुरुषोत्तम दुबे ने 'सोशल मीडिया : आज का यथार्थ और भविष्य की आहटें' विषय पर आयोजित संविमर्श में व्यक्त किए। संविमर्श का आयोजन माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय और श्री मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति, इंदौर के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. पुरुषोत्तम दुबे ने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से हम अपने विचारों को अभिव्यक्त कर सकते हैं। उन्हें पुष्ट और दृढ़ कर सकते हैं। अपनी कलाओं को व्यक्त कर अपनी प्रतिभा से सबको परिचित करा सकते हैं। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत आक्षेप लगाना उचित नहीं है। हमें अपने विचार प्रकट करते समय अपशब्द और अमर्यादित भाषा का उपयोग नहीं करना चाहिए। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया का उपयोग आगे बढऩे के लिए किया जाना चाहिए। युवाओं के लिए बेहतर विकल्प : मुख्य अतिथि एवं वरिष्ठ खेल पत्रकार प्रो. सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी ने बताया कि आज युवा लेखकों के लिए समाचार पत्र एवं पत्रिकाओं में रचनात्मक लेखन के लिए स्थान नहीं है। ऐसे में युवाओं के सामने सोशल मीडिया बेहतर विकल्प की तरह आया है। प्रो. चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया के खतरों के प्रति ध्यान दिलाते हुए कहा कि युवाओं को इंटरनेट पर बहुत अधिक आश्रित नहीं रहना चाहिए। गूगल पर जानकारी तो मिल सकती है, लेकिन ज्ञान नहीं। गूगल ने हमें आलसी बना दिया है। अच्छा लिखने के लिए गूगल की जगह, किताबों को स्रोत बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के कारण हमें लिखने की जो आजादी मिली है, उसके खतरे भी हैं। लिखने की आजादी की भी एक सीमा तय होनी चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि लिखते समय हम स्वविवेक और आत्मसंयम का ध्यान रखें। 2040 तक सब डिजिटल : विश्वविद्यालय के नवीन मीडिया तकनीकी विभाग की अध्यक्ष डॉ. पी. शशिकला ने कहा कि भारत में इंटरनेट का उपयोग करने वाले लोगों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। इंटरनेट क्रांति के कारण दुनिया में भी तेजी से बदलाव आ रहा है। वर्ष 1990 में जब कुछ ही कम्प्युटर इंटरनेट के माध्यम से आपस में जुड़े थे, आज करोड़ों कम्प्युटर वर्ल्ड वाइड वेब के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2040 में कम्प्युटर और मोबाइल ही नहीं, बल्कि हमारा घर, कार और दूसरे अन्य गैजेट भी आपस में जुड़े होंगे। डॉ. शशिकला ने बताया कि लगभग 3000 साल पहले एक तमिल कवि ने अपनी कविता में कहा था कि हम सब एक ही दुनिया के नागरिक हैं और आपस में एक-दूसरे से जुड़े हैं। आज का सोशल मीडिया इसी अवधारणा पर आधारित है। आपस में प्रवृत्ति का विस्तार है सोशल मीडिया : कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि प्रकृति का नियम है परिवर्तन और मनुष्य की प्रवृत्ति है कि वह इस परिवर्तन को स्वीकार करता है और उसे नकारता भी है। भगवान ने जब मनुष्य को बनाया, तब उन्होंने उसे मस्तिष्क भी दिया। मनुष्य ने विचार किया कि उसे जो अंग दिए गए हैं,, उसकी सीमाएं हैं। अपने अंगों की कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिए ही मनुष्य ने अपने मस्तिष्का उपयोग करते हुए पहिया, औजार, मशीन, कैमरा, माइक, स्पीकर और कम्प्युटर आदि का आविष्कार किया। उन्होंने बताया कि आपस में बात करने की प्रवृत्ति का विस्तार ही सोशल मीडिया है। सोशम मीडिया में जो संवाद है, उसका स्वरूप वैसा ही है, जैसा हमारे आम जीवन और साहित्य में है। यह समाज को तय करना चाहिए कि सोशल मीडिया में किस प्रकार के संवाद को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और उसकी सीमाएं क्या होनी चाहिए। उद्बोधन से पूर्व कार्यक्रम में श्री मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति, इंदौर की ओर से प्रतिवर्ष प्रकाशित किए जाने वाले कैलेण्डर का विमोचन किया गया। इस अवसर पर संस्था के कार्य और प्रतिष्ठित पत्रिका वीणा का परिचय संपादक राकेश शर्मा ने दिया। धन्यवाद ज्ञापन विश्वविद्यालय के कुलाधिसचिव लाजपत आहूजा ने व्यक्त किया। संविमर्श में एक खुले सत्र का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन डॉ. पवन मालिक ने किया।


पीआरएसआई भोपाल के संस्थापक अध्यक्ष अरविन्द चतुर्वेदी का सम्मान

Our Correspondent :24 April 2017
राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस पर नेसेसिटी ऑफ डिसिप्लिन इन टूडेज इनवायरमेंट विषय पर आयोजित सेमिनार में भोपाल चैप्टर के संस्थापक अध्यक्ष अरविन्द चतुर्वेदी को शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह से सम्मनित किया गया। इस अवसर पर श्री चतुर्वेदी ने सभी वर्तमान पदाधिकारियों व सदस्यों को बधाई देते हुए चैप्टर के कार्यों को सराहा, साथ ही उपस्थित लोगों को अनुशासन की जीवन में महत्ता और इसका पालन करने के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि जब भोपाल चैप्टर 1986 में शुरू किया गया, उस समय मात्र 17 लोग ही इस चैप्टर से जुड़े थे। जनसंपर्क विषय को लोग प्रोफेशन के रुप में स्वीकार नहीं करते थे। पीआरएसआई के लगातार प्रयासों से आज जनसंपर्क एक प्रोफेशन के रुप में प्रतिष्ठित हो चुका है। पंडित माखनलाल चतुर्वेदी के बड़े भतीजे होने के नाते उन्होंने बाल्यकाल में दद्दा के साथ जुड़ी खट्टी-मिट्ठी यादों को लोगों के साथ साझा किया। इसी के साथ उन्होंने मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि एशिया के प्रथम पत्रकारिता विश्वविद्यालय की परिकल्पना एवं धरातल पर उतरने तक उससे जुड़े संस्मरणों को सुनाया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित मीडिया विधार्थियों से उन्होंने अत्यंत ही भावनात्मक लहजे में संवाद करके जनसंपर्क प्रोफेशन से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिन्दुओं का उल्लेख किया। इस गरिमापूर्ण कार्यक्रम में चैप्टर के अध्यक्ष पुष्पेन्द्रपाल सिंह, सचिव डॉ. संजीव गुप्ता, कोषाध्यक्ष मनोज द्विवेदी, उपाध्यक्ष डॉ. अविनाश वाजपेयी, प्रचार-प्रसार प्रभारी योगेश पटेल, नेशनल काउंसिल प्रतिनिधि विजय बोन्द्रिया, उमा भार्गव, विष्णु खन्ना, जागरण विश्वविद्यालय के प्रो. योगेन्द्र श्रीवास्तव, अभिषेक जैन सहित बड़ी संख्या में मीडिया प्रोफेशनल्स, माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय एवं जागरण विश्वविद्यालय के मीडिया विद्यार्थी उपस्थित रहे।


भास्कर समूह के चेयरमैन रमेशचंद्र अग्रवाल का निधन

Our Correspondent :12 April 2017
अच्छे लोगों को भगवान भी जल्दी बुला लेता है, सभी जगह अच्छे लोगों की कमी होती है! रमेश जी को सामाजिक चेतना और सीधे-सच्चे इंसान के रूप में हमेशा याद किया जायेगा। भगवान आत्मा को शांति दे। सादर नमन। श्रद्धांजलि।
दैनिक भास्कर समाचार पत्र समूह के चेयरमैन श्री रमेशचंद्र अग्रवाल का बुधवार सुबह निधन हो गया। वे 73 वर्ष के थे। रमेशजी सुबह 9:20 बजे की फ्लाइट से दिल्ली से रवाना हुए और 11 बजे अहमदाबाद पहुंचे। एयरपोर्ट पर उन्हें दिल का दौरा पड़ा। उन्हें अपोलो हाॅस्पिटल ले जाया गया था, लेकिन डॉक्टरों की कोशिशों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका। पीएम नरेंद्र मोदी ने रमेशजी के निधन पर शोक व्यक्त किया। मोदी ने ट्वीट किया, ''श्री रमेशचंद्र अग्रवाल के निधन से दुख पहुंचा। मीडिया जगत में उनके उल्लेखनीय योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं श्री रमेशचंद्र अग्रवाल के परिवार के साथ हैं। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे।'' मुख्यमंत्रियों ने भी जताया शोक...
- रमेशजी के निधन की सूचना मिलने पर गुजरात के सीएम विजय रूपाणी ने अहमदाबाद में उनकी पार्थिव देह के दर्शन कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
- मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट किया, ''भास्कर समूह के चेयरमैन श्री रमेश अग्रवाल जी के असामयिक निधन का समाचार अत्यंत दुखदायी है। वे संवेदनशीलता, त्वरित निर्णय के लिए याद किए जाएंगे। श्री रमेशचंद्र अग्रवाल जी के परिजनों और भास्कर समूह के प्रति संवेदना प्रकट करता हूं। मध्यप्रदेश ने वास्तव में अपना एक अनमोल रत्न खो दिया है।''
- बीजेपी प्रेसिडेंट अमित शाह ने ट्वीट किया, ''रमेशचंद्र अग्रवालजी के निधन से गहरा दुख पहुंचा है। उनका निधन पत्रकारिता और भारतीय मीडिया के लिए बड़ी क्षति है।''
- कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने रमेशजी को मीडिया जगत का पुरोधा और संवेदनशील समाजसेवी बताते हुए उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया। सिंह ने कहा कि रमेशजी उनके अभिन्न मित्र थे। उनके निधन से मीडिया जगत में जो रिक्तता पैदा हुई है, उसे भरना कठिन होगा।
- कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भास्कर समूह ने मीडिया के क्षेत्र में अनेक नए प्रतिमान स्थापित किए हैं। यही कारण है कि आज वैश्विक मीडिया जगत में भास्कर समूह और रमेशजी का नाम शीर्ष के लोगों में शुमार है। मीडिया के साथ समाजसेवा और धार्मिक गतिविधियों में भी रमेशजी के काम को हमेशा याद रखा जाएगा।
लंदन के डिप्टी मेयर ने भी दी श्रद्धांजलि
- लंदन के डिप्टी मेयर राजेश अग्रवाल ने ट्वीट किया, ''रमेशजी बहुत इन्स्पायरिंग और जिंदादिल शख्सियत थे। उनके परिवार के प्रति संवेदनाएं।''
- पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह, झारखंड के सीएम रघुवर दास, केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय और इंडिया टीवी के एडिटर इन चीफ रजत शर्मा, संत श्री भय्यूजी महाराज और गुजरात बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू वाघाणी ने भी रमेशजी के निधन पर शोक जताया।
- राज्यवर्धन सिंह राठौर ने शोक व्यक्त करते हुए ट्विटर पर लिखा, ''दैनिक भास्कर समूह के चेयरमैन रमेशचंद्र अग्रवाल के निधन से दुख हुआ। भास्कर परिवार के 4.4 करोड़ पाठक उनकी विरासत हैं।''
- वेंकैया नायडू ने लिखा, ''दैनिक भास्कर समूह के चेयरमैन रमेशचंद्र अग्रवाल जी के असमय निधन से हैरान हूं। परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएं।''
- शेखर गुप्ता ने ट्वीट किया, ''रमेशचंद्र अग्रवाल जी के निधन से काफी दुख हुआ। वो आज के दौर की पत्रकारिता के जनक थे। दैनिक भास्कर को दुनिया का सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला अखबार बनाया।''
1958 से की थी शुरुआत
- 30 नवंबर 1944 को उत्तर प्रदेश के झांसी में जन्मे रमेशजी 1956 में पिता सेठ श्री द्वारकाप्रसाद अग्रवालजी के साथ भोपाल आ गए।
- उन्होंने 1958 में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से दैनिक भास्कर की नींव रखी। 1983 में इंदौर संस्करण की शुरुआत की। 1996 में भास्कर पहली बार मध्य प्रदेश से बाहर निकला और राजस्थान पहुंचा।
- रमेशजी के विजन और स्पष्ट लक्ष्य का ही नतीजा है कि आज भास्कर 14 राज्यों में 62 संस्करण के साथ न सिर्फ देश का नंबर-वन अखबार है, बल्कि सर्कुलेशन के मामले में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा अखबार बन गया है।
- रमेशजी के ही नेतृत्व में समूह ने हिंदी अखबार दैनिक भास्कर, गुजराती अखबार दिव्य भास्कर, अंग्रेजी अखबार डीएनए, मराठी समाचार पत्र दिव्य मराठी, रेडियो चैनल माय एफएम और डीबी डिजिटल को मीडिया जगत में सबसे अग्रणी बनाया।
- रमेशजी के परिवार में बेटे सुधीर अग्रवाल, गिरीश अग्रवाल, पवन अग्रवाल और बेटी भावना अग्रवाल हैं।
देश के 50 सबसे ताकतवर लोगों में शामिल थे
- रमेशजी ने भोपाल यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस की डिग्री ली। उन्हें पत्रकारिता में राजीव गांधी लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।
- 2003, 2006 और 2007 में इंडिया टुडे ने उन्हें भारत के 50 सबसे ताकतवर लोगों की लिस्ट में शामिल किया था।
- रमेशजी को Forbes ने भारत के 100 सबसे अमीर लोगों की 2011 और 2012 की लिस्ट में शामिल किया था।
भोपाल कर्मस्थली थी, दिल ग्वालियर में था
- ग्वालियर में रमेशजी के साथ परछाई की तरह रहने वाले सत्य कुमार मिश्रा बताते हैं, ''रमेशजी ने ग्वालियर के ही विक्टोरिया कॉलेज से पढ़ाई की। आज ये एमएलबी कॉलेज कहलाता है। ग्वालियर से रमेशजी को बहुत लगाव था। भले ही भोपाल उनकी कर्मस्थली थी, लेकिन दिल हमेशा ग्वालियर में ही रहता था। देश में अग्रवाल परिचय सम्मेलन की शुरुआत रमेशजी ने ग्वालियर से कराई। ग्वालियर मेला प्राधिकरण के वे चेयरमैन भी रहे और कई सामाजिक संस्थाओं के साथ जुड़े रहे। ग्वालियर की छत्री मंडी रामलीला समिति से वे हमेशा जुड़े रहे। धार्मिक कार्यक्रमों में उनका योगदान हमेशा रहता था।''
- वे कहते हैं, ''भले ही रमेशजी को डायबिटीज थी, लेकिन बहादुरा के लड्डू और एसएस कचौरी वाले की कचौरी उन्हें बहुत ज्यादा पसंद थी। जब भी ग्वालियर आते, वे इसे खाना नहीं भूलते थे। शहर के कई लोग जो अखबार में आते रहते थे, रमेश जी उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलते थे।''


जनसंपर्क मंत्री ने दैनिक भास्कर समूह के प्रमुख श्री रमेशचंद्र अग्रवाल के निधन पर दुख व्यक्त किया
Our Correspondent :12 April 2017
जनसम्पर्क, जल-संसाधन एवं संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने दैनिक भास्कर समाचार-पत्र समूह के प्रमुख श्री रमेशचंद्र अग्रवाल के अवसान पर दुख व्यक्त किया है। जनसंपर्क मंत्री डॉ. मिश्र ने कहा कि श्री अग्रवाल ने हिन्दी पत्रकारिता के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। देश में जब अंग्रेज अखबारों के श्रंखलाबद्ध प्रकाशन होते थे उस दौर में उन्होंने हिन्दी दैनिक का विस्तार करते हुए राष्ट्र भाषा के प्रचार को भी बल दिया। जनसंपर्क मंत्री ने कहा कि स्व. श्री अग्रवाल ने पत्रकारिता के माध्यम से समाज हित में अपने दायित्वों का निर्वहन किया। श्री अग्रवाल हँसमुख स्वभाव के व्यक्ति थे। उन्होंने समाज-सेवा के कार्यों में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी सेवाओं को भुलाया नहीं जा सकता।
जनसंपर्क मंत्री ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और उनके शोकाकुल परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की है।
पुष्प चक्र अर्पित
जनसंपर्क मंत्री डॉ. मिश्र ने स्व. श्री रमेशचंद्र अग्रवाल की पार्थिव देह अहमदाबाद से आज शाम भोपाल के स्टेट हैंगर पहुँचने पर पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।


गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान समारोह 14 अप्रैल को
Our Correspondent :12 April 2017

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित 'गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान समारोह' का आयोजन रवीन्द्र भवन में 14 अप्रैल, 2017 को किया जाएगा। इस अवसर पर वर्ष 2014 के लिए गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान वरिष्ठ पत्रकार श्री उमेश उपाध्याय को और वर्ष 2015 के लिए सम्मान वरिष्ठ पत्रकार श्री विजय मनोहर तिवारी को प्रदान किया जाएगा। बाबा साहब भीमराव आंबेडकर जयंती प्रसंग पर आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रख्यात साहित्यकार श्री नरेंद्र कोहली और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष श्री नंदकुमार साय होंगे। इस अवसर पर वंचित वर्ग के समग्र विकास के लिए व्यवहारिक उपाय एवं समरस समाज के लिए मीडिया और साहित्य का दायित्व विषय पर व्याख्यान का भी आयोजन है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के सांस्कृतिक एवं खेलकूद आयोजन प्रतिभा-2017 का पुरस्कार वितरण समारोह भी आयोजित किया जाएगा।
भारतीय भाषायी पत्रकारिता के माध्यम से मूल्यों की स्थापना और संवर्धन, सत्यान्वेषण, जनपक्षधरता, गहरे सामाजिक सरोकार और अप्रतिम सृजनात्मक योगदान के लिए माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान की स्थापना की गई है। यह सम्मान किसी एक कृति, रचना या उपलब्धि के लिए न होकर सुदीर्घ साधना एवं उपलब्धि के लिए देय है। विगत वर्षों में इस सम्मान से श्री आलोक मेहता, श्री राजेंद्र शर्मा, डा. नंदकिशोर त्रिखा, श्री रामबहादुर राय, श्री रमेश नैयर, श्री मदनमोहन जोशी और श्री श्यामलाल यादव को सम्मानित किया जा चुका है। सम्मान के अंतर्गत दो लाख रुपये नकद तथा प्रशस्ति-पट्टिका प्रदान की जाती है।
वर्ष 2014 के लिए गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान से सम्मानित श्री उमेश उपाध्याय पिछले तीन दशक से मीडिया की हर विधा में अपनी छाप छोडऩे वाले देश के ख्यातनाम पत्रकार, एंकर, संचार विशेषज्ञ और शिक्षाविद् हैं। श्री उपाध्याय पीटीआई भाषा, दूरदर्शन, जीटीवी, होम टीवी, जी न्यूज, एनसीएनएल, सब टीवी, जनमत और नेटवर्क-18 सहित अन्य संस्थानों में महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वर्तमान में श्री उपाध्याय रिलांयस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रेसीडेंट एवं मीडिया डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। इसके साथ ही वे विश्वविद्यालय की महापरिषद और भारतीय जनसंचार संस्थान की कार्यपरिषद के सदस्य हैं।
वर्ष 2015 के लिए गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान से सम्मानित श्री विजय मनोहर तिवारी बीस साल के पत्रकारीय जीवन में 20 राज्यों की आठ लंबी यात्राएं कर भारत के विविध रंगों को सबके सामने लाने के लिए पहचाने जाते हैं। एक लेखक के तौर पर भी उनकी पहचान है। प्रिय पाकिस्तान, हरसूद 30 जून और भारत की खोज में मेरे पांच साल उनकी चर्चित पुस्तकें हैं।


सोशल मीडिया के प्रशिक्षण पर विचार हो - विश्वास सारंग
शिष्यों में लोकप्रिय रहे पत्रकार स्व. देवलिया के स्मृति में हुआ अनूठा आयोजन

Our Correspondent :5 March 2017
स्वाधीनता संग्राम के दौरान नेता शब्द आदर, सम्मान और समर्पण का परिचायक था लेकिन आजादी के बाद इस शब्द का सम्मान घट गया। सोशल मीडिया ने जनता की आवाज बुलंद की है,इससे समाज के बीच से अच्छे लोगों की पहचान सहज होने लगी है। सहकारिता राज्यमंत्री विश्वास सारंग ने आज कहा कि शासन के प्रतिनिधि होने के नाते वे सोशल मीडिया के शिक्षण प्रशिक्षण को पाठ्यक्रम में जगह दिलाने का प्रयास करेंगे। श्री सारंग यशस्वी पत्रकार भुवन भूषण देवलिया की स्मृति में पं. माधव राव सप्रे समाचार पत्र संग्रहालय के सभागार में आयोजित व्याख्यान माला में “सोशल मीडियाःअवसर और चुनौतियां’’ विषय पर चर्चा करते हुए विचार व्यक्त कर रहे थे।

डॉ.सर हरिसिंह गौर विवि, सागर के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग में विभागाध्यक्ष रहे वरिष्ठ पत्रकार स्व. भुवन भूषण देवलिया की स्मृति में ये कार्यक्रम छह सालों से स्व. भुवन भूषण देवलिया व्याख्यान माला समिति की ओर से आयोजित किया जा रहा है। इस अवसर पर अपने गुरू और मार्गदर्शक को याद करने के लिए सागर विवि के पत्रकारिता विभाग के पूर्व विद्यार्थियों के साथ ही अन्य पूर्व विद्यार्थी भी इस आत्मीय कार्यक्रम में उपस्थित हुए। राजधानी में आयोजित हो रहे विभिन्न कार्यक्रमों की श्रंखला में इस आयोजन ने तकनीकी आधार पर कई समाजोपयोगी सूत्र उजागर किए हैं। आज की व्याख्यान माला में राज्यसभा टीवी, नई दिल्ली के कार्यकारी निदेशक राजेश बादल, सागर के पत्रकारिता विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो.प्रदीप कृष्णात्रे, प्रो.दविंदर कौर उप्पल,माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विवि के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. कमल दीक्षित,पत्रकार शिवअनुराग पटैरया ने अपने विचार व्यक्त किए।

इस अवसर पर पत्रिका समूह इंदौर में कार्यरत मुख्य उप संपादक अर्जुन रिछारिया को राज्य स्तरीय भुवन भूषण देवलिया पत्रकारिता सम्मान से अलंकृत किया गया। इस अवसर पर सर्वश्री राजेश सिरोठिया, अशोक मनवानी, डॉ.बी.के.दुबे,सुश्री सुनीता बोहरे, और आलोक सिंघई ने अतिथियों को पुष्प गुच्छ स्मृतिचिन्ह और तुलसी के पौधे भेंट करके उनका अभिनंदन किया। सभी अतिथियों ने स्व. भुवन भूषण देवलिया के चित्र पर माल्यार्पण करके उनके प्रति अपनी श्रद्दांजलि अर्पित की।कार्यक्रम में भुवन भूषण देवलिया स्मृति व्याख्यानमाला समिति की संयोजक और स्व. देवलिया जी की धर्मपत्नी श्रीमती कीर्ति देवलिया भी उपस्थित थीं।

राज्य मंत्री श्री सारंग ने कहा कि आजादी के बाद आई सरकारों ने आम नागरिकों को अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर अराजकता भरा माहौल दिया है। इससे लोगों में देश के प्रति कर्तव्यबोध विकसित नहीं हो पाया। इसकी वजह हमारी चुनाव प्रणाली रही है। आजाद हिंदुस्तान में पहली बार लाल किले की प्राचीर से दिया गया भाषण भी राजनीतिक मजबूरियों की उपज था और आज भी देश का हर नेता राजनीतिक नजरिए से ही अपना भाषण देता है। इसकी वजह ये है कि उसे अगले पांच सालों में एक बार फिर चुनाव जीतना होता है जिसके लिए उसे अपने राजनैतिक हितों पर गौर करना पड़ता है। उन्होंने किसी राजनैतिक दल का नाम लिए बगैर कहा कि आज देश में व्यक्ति निर्माण के प्रयास किए जा रहे हैं। इसलिए वे सरकार से बात करेंगे कि आम लोगों में सोशल मीडिया के सदुपयोग की समझ पैदा करने के लिए इसे स्कूली पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि रोटी,कपडा और मकान तो जेल में भी मिल जाते हैं पर वहां जाने वाले समाज के साथ से वंचित कर दिए जाते हैं। इसलिए जब समाज सबसे महत्वपूर्ण अवयव है तो इसे जोड़ने में सोशल मीडिया का भरपूर इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे स्वयं सोशल मीडिया पर चलाए जाने वाले आधारहीन दुष्प्रचार अभियानों का शिकार होते रहे हैं। कई बार किसी व्यक्ति विशेष की राष्ट्रविरोधी दुर्भावना को भी सोशल मीडिया पर संरक्षित किया जाने लगता है। बाद में ये कैम्पेन झूठे निकलते हैं। इसलिए सोशल मीडिया पर चर्चा करने वालों की सामाजिक जवाबदारी भी तय होनी चाहिए।

प्रमुख वक्ता के तौर पर राज्यसभा टीवी नई दिल्ली के कार्यकारी निदेशक राजेश बादल ने कहा कि सीमित संसाधनों के दौर में भुवन भूषण देवलिया जैसे समर्पित पत्रकार आंचलिक पत्रकारों को जोड़ने वाली कड़ी थे। वे पत्रों के माध्यम से आंचलिक पत्रकारों से संवाद स्थापित करते थे और उनका मार्गदर्शन करते थे। देवलिया जी स्वयं पत्रकारिता के चलते फिरते संस्थान थे। उन्होंने कहा कि डॉ.सर हरिसिंह गौर विवि, सागर के पत्रकारिता विभाग को स्व. भुवन भूषण देवलिया के व्यक्तित्व और कृतित्व पर शोध कार्य करना चाहिए। इससे समाज को संवारने की इच्छा रखने वाले विद्यार्थियों को मार्गदर्शन मिलता रहेगा। श्री बादल ने कहा कि सोशल मीडिया पश्चिमी देशों में विकसित हुआ है। उन देशों ने अपने सामाजिक बिखराव को समेटने में इसका इस्तेमाल किया। जबकि हमारे देश में इसे हम सामाजिक बिखराव के कारणों पर आक्रोश व्यक्त करने के लिए उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम कभी असहिष्णु नहीं रहे पर आज सोशल मीडिया लोगों को गाली देने का माध्यम भी बन गया है। इसके बावजूद सोशल मीडिया कई सामाजिक बदलावों का जनक भी बना है। इसलिए इसके सदुपयोग के लिए लोगों को प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।

प्रमुख वक्ता के रूप में जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के दिल्ली सेंटर में प्रोफेसर और सागर विवि के पत्रकारिता के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रदीप कृष्णात्रे ने कहा कि स्व. देवलिया जी के सामाजिक संपर्कों और विभाग के अध्यापकों के बीच समन्वय के कारण ही सागर के पत्रकारिता विभाग ने उपलब्धियां हासिल कीं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ने बहुत तेजी से अपना असर जमाया है। अब यहां लोकप्रियता सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है जबकि पुरातन मीडिया में विश्वसनीयता पर अधिक जोर दिया जाता था। पहले समाचार कुछ ही समय तक चर्चा में रहता था पर सोशल मीडिया के आ जाने से समाचार की अवधि लंबी हो गई है। इसलिए घटनाओं पर काफी लंबे समय तक चर्चाएं होती रहती हैं। श्री कृष्णात्रे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जनता से जुड़ाव का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें अब प्रेस वार्ता करने की जरूरत नहीं पड़ती वे सीधे जनता के बीच पहुंच जाते हैं। इस बदले हालात में पत्रकारिता का स्वरूप कैसा होना चाहिए फिलहाल इस पर कोई स्पष्ट नजरिया अब तक नहीं बन सका है। उन्होंने कहा कि जिस तरह सड़क पर सही गाड़ी चलाने के लिए किसी आजादी की जरूरत नहीं होती उसी तरह सोशल मीडिया पर सही गलत का फैसला भी हमें स्वयं करना होगा। न तो इस पर किसी प्रकार का अंकुश लगाया जाना चाहिए और न ही इस पर समाज विरोधी लोगों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। जिस तरह मिलिटरी रूम में दुश्मन के सभी पहलुओं पर विचार होता है उसी तरह सोशल मीडिया पर समाज के सभी पहलुओं पर विचार होना चाहिए। सही गलत का फैसला जनता स्वयं कर लेती है। समिति की ओर से वरिष्ठ पत्रकार शिव अनुराग पटैरया ने कार्यक्रम के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आधुनिक पत्रकारिता के प्रति स्व. भुवन भूषण देवलिया जी की जो सोच थी ये कार्यक्रम उस संकल्प का प्रकटीकरण है। इससे पता चलता है कि आपके अच्छे कामों की पदचाप आपके जाने के बाद भी गूंजती रहती है। पत्रकार राजेश सिरोठिया ने भी अपने विचार व्यक्त किए। जनसंपर्क अधिकारी अशोक मनवानी ने कहा कि श्री देवलिया के अवसान के 26 वर्ष बाद भी उनके विद्यार्थी उन्हें शिद्दत से याद करते हैं। उनका दृष्टिकोण राष्ट्रीय था और उन्होंने सैकड़ों नवोदित पत्रकारों को लेखन के गुर सिखाए।

कार्यक्रम का संचालन कर रहे श्री पद्म भंडारी ने सोशल मीडिया पर बढ़ रहे अवसरों और चुनौतियों पर चर्चा के लिए खुले सत्र का आयोजन भी किया जिसमें कई लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए। आयोजन में पूर्व संचालक भाषा और इतिहासकार श्री शम्भू दयाल गुरू, स्व. देवलिया के सुपुत्र श्री आशीष देवलिया, श्री सतीश एलिया, सुश्री अपर्णा एलिया, श्री व्ही.के. दुबे, सुश्री अरुणा दुबे, उप संचालक जनंसपर्क श्री अजय वर्मा, श्री मनोज पाठक, श्री पुष्पेन्द्र पाल सिंह, सागर से आए पत्रकार रजनीश जैन सहित अनेक पत्रकार, जनसंपर्क अधिकारी और नागरिकगण उपस्थित थे।


स्व. भुवन भूषण देवलिया सम्मान-व्याख्यान 5 मार्च को
एक आंचलिक युवा पत्रकार को मिलेगा पुरस्कार

Our Correspondent :11 Feb. 2017
भोपाल 10 फरवरी 2017 / वरिष्ठ पत्रकार स्व. भुवन भूषण देवलिया की जयंती के अवसर पर राजधानी में रविवार, 5 मार्च को आयोजन हो रहा है। स्व. भुवन भूषण देवलिया व्याख्यान माला समिति, भोपाल का यह आयोजन का छठवां वर्ष है। इस अवसर पर स्व. भुवन भूषण देवलिया स्मृति पुरस्कार से एक युवा पत्रकार को सम्मानित भी किया जाएगा। जल्द ही इसकी घोषणा होगी।
माधव राव सप्रे समाचार पत्र संग्रहालय में स्व. देवलिया जी की जयंती के अवसर पर प्रासंगिक विषय पर व्याख्यान भी आयोजित किया जा रहा है। व्याख्यान को अनेक वरिष्ठ पत्रकार सम्बोधित करेंगे। श्री बी.बी.देवलिया (1937-1991) ने सागर में रहकर पत्रकारिता, वकालत, साहित्य और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया।
उल्लेखनीय है कि इस आयोजन में स्थानीय पत्रकारों, लेखकों सहित डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के अनेक पूर्व विद्यार्थी हिस्सा लेते हैं।


जनसंपर्क मंत्री डॉ. मिश्र ने किया शोक व्यक्त
Our Correspondent :11 Feb. 2017
जनसंपर्क, जलसंसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने भोपाल के वरिष्ठ प्रेस छायाकार श्री रज्जाक खान के निधन पर दुख व्यक्त किया है।
मंत्री डॉ. मिश्र ने श्री खान को श्रद्धांजलि देते हुए शोकाकुल परिजन को यह दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की है।


जनसंपर्क मंत्री डॉ. मिश्र ने दी पत्रकार श्री तिवारी को बधाई
-आलोक सिंघई

Our Correspondent :11 Feb. 2017
जनसंपर्क, जलसंसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र आज भारत भवन में आयोजित एक पुस्तक विमोचन समारोह में सम्मिलित हुए।
मंत्री डॉ. मिश्र ने पुस्तक लेखक वरिष्ठ पत्रकार श्री विजय मनोहर तिवारी को उनकी नव प्रकाशित कृति के लिए बधाई दी। डॉ. मिश्र ने समारोह के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत से भी भेंट कर उनका अभिवादन किया।


सरसंघचालक ने किया माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कैलेंडर का विमोचन
भारत की ज्ञान परंपरा पर केंद्रित है विश्वविद्यालय का कैलेंडर

Our Correspondent :11 Feb. 2017
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कैलेंडर का विमोचन किया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला भी उपस्थित थे।
सरसंघचालक डॉ. भागवत ने कैलेंडर के विषय और उसके आकल्पन की सराहना की है।
विश्वविद्यालय का वर्ष 2017 का कैलेंडर भारत की ज्ञान परंपरा पर केन्द्रित है। 12 पृष्ठीय कैलेंडर में पृथक-पृथक पृष्ठों पर चार वेदों ऋग्वेद, यजुर्वेद, अथर्वेद एवं सामवेद की व्याख्या के साथ उपनिषद्, रामायण, महाभारत और गीता को रेखांकित किया गया है। इसके साथ ही प्राचीन भारत के शिक्षा के चार केंद्र नालंदा, तक्षशिला, विक्रमशिला एवं सांदीपनी आश्रम का उल्लेख हैं। कैलेंडर में भारतीय तिथियों को भी दर्शाया गया है। महत्वपूर्ण तीज-त्यौहारों के साथ शासकीय अवकाश की भी जानकारी कैलेंडर में शामिल की गयी है। विगत वर्ष (2016) का कैलेंडर सिंहस्थ पर केन्द्रित था, जिसमें कुम्भ की संचार परंपरा को वर्णित किया गया था।


जनसंपर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने दी पत्रकारों को बधाई

Our Correspondent :25 Jan. 2017
जनसंपर्क, जल संसाधन एवं संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने राजधानी में पं. माधवराव सप्रे समाचार पत्र संग्रहालय और शोध संस्थान द्वारा सम्मानित सभी पत्रकार बंधुओं को हार्दिक बधाई दी है।
जनसंपर्क मंत्री डॉ. मिश्र ने कहा कि प्रिंट, इलेक्ट्रानिक मीडिया और सोशल मीडिया से जुड़े कलमकारों के प्रोत्साहन के लिए राज्य सरकार भी प्रतिबद्ध है। सप्रे संग्रहालय द्वारा पत्रकारों का सम्मान सराहनीय और अनुकरणीय है।
जनसंपर्क मंत्री डॉ. मिश्र ने पत्रकार सम्मान समारोह की आयोजक संस्था सप्रे संग्रहालय के प्रमुख श्री विजयदत्त श्रीधर को भी बधाई दी है।


 
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