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::::: आलेख :::::




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SWARAJ SANDARBH

मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ओपी रावत ने किया मीडियावाला न्यूज़ पोर्टल का लोकार्पण
10 April 2018
भोपाल, प्रदेश में सोशल मीडिया और पीआर की अग्रणी संस्था मीडियावाला के न्यूज़ पोर्टल मीडियावाला डॉट इन का लोकार्पण भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ओपी रावत ने होटल जहांनुमा पैलेस में ब्यूरोक्रेट्स, राजनीतिज्ञ, जाने-माने पत्रकार और समाज के अन्य क्षेत्रों के विशिष्ट लोगों की उपस्थिति में किया। मुख्य अतिथि के रुप में संबोधित करते हुए श्री ओपी रावत ने कहा कि मीडियावाला के न्यूज़ पोर्टल का लोकार्पण करते हुए मुझे खुशी है। मैं मीडियावाला ग्रुप से काफी पहले से जुड़ा हूं और इसकी सक्रियता का प्रशंसक रहा हूं। मुझे पूरा भरोसा है कि यह न्यूज़ पोर्टल कुछ अलग काम करने पर सफल होगा। भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने यह भी कहा कि भारत में शांतिपूर्ण ढंग से सफलतापूर्वक चुनाव कराने में चुनाव आयोग अगर सफल है तो इसका मतलब यह नहीं कि निर्वाचन आयोग कोई जादूगर है। जादूगर तो वो थे, जिन्होंने हमारा संविधान लिखा।जिन्होंने हमें ऐसी व्यवस्था दी, जिस कारण हम यह चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से करा पाते हैं। वे लोग सब कुछ जानते थे। वे भविष्य को देखना जानते थे। भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि हमारे संविधान निर्माताओं ने यह बात समझ ली थी कि भविष्य में क्या-क्या समस्याएं सामने आ सकती हैं, इसलिए उन्होंने इतनी अच्छी व्यवस्था की। इस मौके पर आयोजित 'चुनाव, जनमत और सोशल मीडिया' संगोष्ठी में वरिष्ठ पत्रकार महेश श्रीवास्तव, मध्यप्रदेश के संस्कृति और वाणिज्यिक कर विभाग के प्रमुख सचिव श्री मनोज श्रीवास्तव,जी हिन्दुस्तान के सम्पादक डॉ बृजेश कुमार सिंह और दैनिक भास्कर के राष्ट्रीय संस्करण के संपादक आनंद पांडे ने भी अपने विचार रखे। श्री पांडे ने कहा कि आज की दुनिया में इंटरनेट और वेब पोर्टल की महत्ता बहुत ज्यादा है। यहां तक कि इंटरनेट की खबरों से प्रभावित होकर अखबारों में खबरों को प्राथमिकता मिलने लगी है। ज़ी हिंदुस्तान के संपादक श्री बृजेश कुमार सिंह ने कहा कि मानवीय व्यवहार को सोशल मीडिया बदल देगा, इसकी आशा नहीं थी। उन्होंने 1952 के पहले आम चुनाव से लेकर आगामी 2019 के आम चुनाव तक की समीक्षा की। संस्कृति और वाणिज्यिक कर विभाग के प्रमुख सचिव श्री मनोज श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया के उपयोग और दुरूपयोग की आशंकाओं और उससे निपटने के प्रयासों के बारे में विस्तार से चर्चा की। श्री श्रीवास्तव ने कहा कि पत्रकारिता साधना थी, लेकिन अब वह एकाराधना होती नजर आ रही है। पत्रकारिता साधना है, लेकिन वर्तमान समय में वह साधन होती जा रही है। वरिष्ठ पत्रकार श्री महेश श्रीवास्तव ने कहा कि वह दिन दूर नहीं, जब मीडिया पूरी तरह से मानवीय व्यवहार को बदलने में सफल हो जाएगा। कार्यक्रम के प्रारंभ में मीडियावाला डॉट इन के सलाहकार डॉ प्रकाश हिन्दुस्तानी में मीडियावाला न्यूज पोर्टल के उद्देश्य और कार्यप्रणाली स्पष्ट करते हुए आशा व्यक्त की कि यह न्यूज़ पोर्टल निश्चित ही अपनी अलग छवि बनाने में सफल होगा। संगोष्ठी में मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ओपी रावत ने कहा कि सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव से बचने के लिए सख्त चुनाव-कानून बनाए जाना जरूरी है। सोशल मीडिया पर चलने वाली न्यूज़ पोर्टल फेक न्यूज़ और झूठी खबरों को भी कभी भी पोस्ट नहीं करें तो उनकी उपयोगिता स्पष्ट होगी। प्रकाश हिंदुस्तानी ने इस अवसर पर श्री ओपी रावत को आश्वस्त किया कि मीडियावाला न्यूज़ पोर्टल निश्चित ही इस दिशा में कदम उठाएगा। मीडियावाला डॉट इन न्यूज़ पोर्टल का संचालन मीडियावाला समूह द्वारा किया जा रहा है, जिसके प्रबंध संचालक सुरेश तिवारी ने इस अवसर पर कहा कि हम बिना किसी बड़ी भारी पूंजी या विदेशी धन के प्रयास कर रहे हैं. हमने मीडियावाला को एक साल में ही नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है मीडियावाला ने न केवल जनसंपर्क के क्षेत्र में महत्वपूर्ण काम किया है, बल्कि पुस्तकों का प्रकाशन भी कर रहा है। कार्यक्रम में श्री ओ पी रावत का शाल ओढ़ाकर और श्रीफल देकर स्वागत किया गया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध लेखिका श्रीमती स्वाति तिवारी भी मौजूद रहीं। इस मौके पर पूर्व मंत्री अजय विश्नोई, पूर्व डीजीपी एन के त्रिपाठी, जनसम्पर्क विभाग के पूर्व आयुक्त और सिया के चैयरमैन राकेश श्रीवास्तव, मध्यप्रदेश की मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुश्री सलीना सिंह, सहकारिता निर्वाचन पदाधिकारी प्रभात पाराशर, भोपाल के संभागायुक्त अजातशत्रु श्रीवास्तव, कलेक्टर सुदाम खाड़े, डीआईजी धर्मेंद्र चौधरी, अपर सचिव ,राजीव शर्मा सहित बड़ी संख्या में पत्रकार, साहित्यकार और समाजसेवी मौजूद थे।
पत्रकारों को आवास निर्माण ऋण और ब्याज अनुदान मिलेगा
10 April 2018
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने पत्रकारों के स्वास्थ्य एवं दुर्घटना समूह बीमा योजना में कैशलेस इलाज की व्यवस्था को बढ़ाकर 4 लाख रूपये करने की घोषणा की है। अभी तक यह सीमा दो लाख रूपये की है। उन्होंने पत्रकारों की मृत्यु होने पर आर्थिक सहायता देने की अधिकतम राशि को भी एक लाख से बढ़ाकर चार लाख रूपये करने, पत्रकारों के कैमरे क्षतिग्रस्त होने पर आर्थिक सहायता राशि 25 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रूपये करने और पत्रकारों को 25 लाख रूपये तक के आवास ऋण पर पाँच प्रतिशत ब्याज अनुदान दिये जाने की घोषणा की है। श्री चौहान आज मुख्यमंत्री निवास में आयोजित राष्ट्रीय, राज्य स्तरीय एवं आंचलिक पत्रकारिता सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि पत्रकारिता असाधारण और चुनौतिपूर्ण कार्य है। पत्रकार को विभिन्न परिस्थितियों में अलग-अलग दायित्वों का निर्वहन करना पड़ता है। सूचना को खबर का आकार देने की तड़प और संघर्ष आसान नहीं होता है। लोकतंत्र में पत्रकार की भूमिका महत्वपूर्ण है। व्यवस्था का आधार स्तंभ है। गलतियों को उजागर करना उनका महत्वपूर्ण दायित्व है। खबरों की खबर निकालने के लिये किये जाने वाला संघर्ष सामान्यत: दिखाई नहीं देता है। प्राकृतिक विपदा, साम्प्रदायिक तनाव या आतंकी घटनाओं की खबरों की खोज में कई बार जान का जोखिम भी उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि पत्रकार समाज की सच्चाई को सही ढ़ंग से सामने लाने और समाज को सही दिशा देने का कार्य पूरी सक्रियता और सजगता के साथ करते रहें। मध्यप्रदेश सरकार सामाजिक सरोकारों में पत्रकारों की भूमिका का सम्मान करती है और समाज के प्रति उनकी सेवा भावना को बखूबी समझती है। इसी भाव से वरिष्ठ पत्रकारों के लिये श्रद्धानिधि स्थापित की है। श्री चौहान ने पत्रकारिता के बदलते दौर का जिक्र करते हुये कहा कि देश की आजादी, स्वतंत्रता आंदोलन, आपातकाल के दौरान पत्रकारों का योगदान महत्वपूर्ण और अविस्मरणीय है। उन्होंने वर्तमान युग की पत्रकारिता पर आधुनिक तकनीक के प्रभावों का जिक्र किया। साथ ही देश और प्रदेश के मूर्धन्य पत्रकारों का उल्लेख किया। उन्होंने वर्ष 2015 एवं 2016 के लिये राष्ट्रीय, राज्य स्तरीय एवं आंचलिक पत्रकारिता सम्मान से 30 पत्रकारों को अलंकृत किया। जनसंपर्क एवं जल संसाधन मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने स्वागत उदबोधन दिया। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को निरंतर सजग और सक्रिय रहना होता है। प्रतिदिन नई चुनौतियों का सामना और दायित्वों का निर्वहन करना पड़ता है। राज्य सरकार पत्रकारों की इस भूमिका का सम्मान करती है। आभार प्रदर्शन आयुक्त जनसंपर्क श्री पी.नरहरि ने किया। इस अवसर पर सांसद श्री आलोक संजर, महापौर श्री आलोक शर्मा, मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह, प्रमुख सचिव जनसंपर्क श्री एस.के. मिश्रा सहित वरिष्ठ पत्रकार, जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित थे। कार्यक्रम में सम्मानित पत्रकारगण राष्ट्रीय सम्मान : माणिकचन्द्र बाजपेयी राष्ट्रीय पत्रकारिता सम्मान श्री रामबहादुर राय, दिल्ली और श्री रमेश पतंगे, मुम्बई को दिया गया। गणेशशंकर विद्यार्थी राष्ट्रीय पत्रकारिता सम्मान श्री अश्विनी कुमार, दिल्ली, सुश्री नलिनी सिंह, दिल्ली, विद्यानिवास मिश्र राष्ट्रीय पत्रकारिता सम्मान श्री अभिलाष खाण्डेकर, भोपाल और श्री पी. नारायणन, केरल को दिया गया। राष्ट्रीय चैनलों के मध्यप्रदेश में कार्यरत पत्रकार श्रेणी में श्री मनोज शर्मा को सम्मानित किया गया तथा राष्ट्रीय चैनलों के मध्यप्रदेश में कार्यरत कैमरामेन श्रेणी में श्री आर.सी. साहू को भी सम्मानित किया गया। राज्य-स्तरीय सम्मान : सत्यनारायण श्रीवास्तव राज्य-स्तरीय पत्रकारिता सम्मान श्री अरुण पटेल और श्री गणेश साकल्ले को दिया गया। राज्य-स्तरीय चैनलों के पत्रकारों को पत्रकारिता सम्मान श्री राकेश अग्निहोत्री और श्री अजय त्रिपाठी को दिया गया। महेन्द्र चौधरी राज्य-स्तरीय फोटो पत्रकारिता सम्मान श्री संजीव गुप्ता और श्री महेश झा को दिया गया। राज्य स्तरीय चैनलों के कैमरामेन श्रेणी में श्री मकरंद जंभोरकर और श्री अजय पाण्डेय को सम्मानित किया गया। आंचलिक पत्रकारिता सम्मान : शरद जोशी (भोपाल) आंचलिक पत्रकारिता सम्मान श्री ओ.पी. श्रीवास्तव और श्री अनिल दुबे को, राहुल बारपुते (इंदौर) आंचलिक पत्रकारिता सम्मान श्री जयप्रकाश तापड़िया और श्री रमण रावल को, रतनलाल जोशी (ग्वालियर) आंचलिक पत्रकारिता सम्मान श्री राजेन्द्र कुमार श्रीवास्तव और श्री गणेश सांवला, जीवनलाल वर्मा विद्रोही (जबलपुर) आंचलिक पत्रकारिता पुरस्कार श्री चैतन्य भट्ट और श्री योगेश कुमार को, कन्हैयालाल वैद्य (उज्जैन) पत्रकारिता सम्मान डॉ. घनश्याम बटवाल और श्री संदीप कुलश्रेष्ठ को, मास्टर बल्देव प्रसाद (सागर) आंचलिक पत्रकारिता सम्मान श्री रमेश राजपूत और श्री शैलेन्द्र ठाकुर को और श्री बनारसी दास चतुर्वेदी (रीवा) आंचलिक पत्रकारिता सम्मान से श्री गया प्रसाद श्रीवास एवं श्री संजय कुमार पयासी को सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री श्री चौहान 10 अप्रैल को पत्रकारों का करेंगे सम्मान
9 April 2018
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान 10 अप्रैल को शाम 7 बजे मुख्यमंत्री निवास में राज्य शासन के सम्मानों के लिये चयनित पत्रकारों को सम्मानित करेंगे। चयनित पत्रकारों को राष्ट्रीय, राज्य-स्तरीय एवं आंचलिक पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित किया जायेगा। समारोह में जनसम्पर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र भी उपस्थित रहेंगे। राष्ट्रीय सम्मान : माणिकचन्द्र बाजपेयी राष्ट्रीय पत्रकारिता सम्मान श्री रामबहादुर राय, दिल्ली और श्री रमेश पतंगे, मुम्बई को दिया जायेगा। गणेशशंकर विद्यार्थी राष्ट्रीय पत्रकारिता सम्मान श्री अश्विनी कुमार, दिल्ली, सुश्री नलिनी सिंह, दिल्ली, विद्यानिवास मिश्र राष्ट्रीय पत्रकारिता सम्मान श्री अभिलाष खाण्डेकर, भोपाल और श्री पी. नारायणन, केरल को दिया जायेगा। राष्ट्रीय चैनलों के मध्यप्रदेश में कार्यरत पत्रकार श्रेणी में श्री मनोज शर्मा को सम्मानित किया जायेगा। राष्ट्रीय चैनलों के मध्यप्रदेश में कार्यरत कैमरामेन श्रेणी में श्री आर.सी. साहू को सम्मानित किया जायेगा। राज्य-स्तरीय सम्मान : सत्यनारायण श्रीवास्तव राज्य-स्तरीय पत्रकारिता सम्मान श्री अरुण पटेल और श्री गणेश साकल्ले को दिया जायेगा। राज्य-स्तरीय चैनलों के पत्रकारों को पत्रकारिता सम्मान श्री राकेश अग्निहोत्री और श्री अजय त्रिपाठी को दिया जायेगा। महेन्द्र चौधरी राज्य-स्तरीय फोटो पत्रकारिता सम्मान श्री संजीव गुप्ता और श्री महेश झा को दिया जायेगा। राज्य स्तरीय चैनलों के कैमरामेन श्रेणी में श्री मकरंद जंभोरकर और श्री अजय पाण्डेय को सम्मानित किया जायेगा। आंचलिक पत्रकारिता सम्मान : शरद जोशी (भोपाल) आंचलिक पत्रकारिता सम्मान श्री ओ.पी. श्रीवास्तव और श्री अनिल दुबे को, राहुल बारपुते (इंदौर) आंचलिक पत्रकारिता सम्मान श्री जयप्रकाश तापड़िया और श्री रमण रावल को, रतनलाल जोशी (ग्वालियर) आंचलिक पत्रकारिता सम्मान श्री राजेन्द्र कुमार श्रीवास्तव और श्री गणेश सांवला, जीवनलाल वर्मा विद्रोही (जबलपुर) आंचलिक पत्रकारिता पुरस्कार श्री चैतन्य भट्ट और श्री योगेश कुमार को, कन्हैयालाल वैद्य (उज्जैन) पत्रकारिता सम्मान डॉ. घनश्याम बटवाल और श्री संदीप कुलश्रेष्ठ को, मास्टर बल्देव प्रसाद (सागर) आंचलिक पत्रकारिता सम्मान श्री रमेश राजपूत और श्री शैलेन्द्र ठाकुर को और बनारसी दास चतुर्वेदी (रीवा) आंचलिक पत्रकारिता सम्मान श्री गया प्रसाद श्रीवास एवं श्री संजय कुमार पयासी को दिया जायेगा। शासन द्वारा गठित वरिष्ठ पत्रकारों की जूरी द्वारा इन पत्रकारों का चयन किया गया है। यह सम्मान वर्ष 2015 और 2016 के लिये दिए जा रहे हैं
राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय प्रासंगिक तथा सम-सामयिक है- राज्यपाल
1 April 2018
राज्यपाल श्रीमती आनंदी बेन पटेल ने मीडिया महोत्सव-2018 को संबोधित करते हुए कहा कि मीडिया द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा को अपना केन्द्रीय विषय बनाना न सिर्फ प्रासंगिक है बल्कि सम-सामयिक भी है। भारत की सुरक्षा की जितनी जिम्मेदारी शासन- प्रशासन और सुरक्षा बलों की है उससे कम जिम्मेदारी पत्रकारों की नहीं है क्योंकि पत्रकार ही वह माध्यम होता है जो जनता को सूचनाएं प्रेषित करता है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों की भी रिर्पोटिंग पर कोई भी कोताही कितनी भारी पड़ सकती है इसका खामियाजा 2008 में मुंबई हमले के समय देख चुके हैं। इस घटना से हमें सबक लेना चाहिए और एक रूपरेखा बनाकर उसका पालन करना चाहिए। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक श्री इंद्रेश कुमार, वरिष्ठ विचारक एवं चिंतक श्री के.एन.गोविन्दाचार्य, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति श्री जगदीश उपासने, म.प्र. भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो रविन्द्र कान्हेरे, निस्केयर सीएसआईआर के निदेशक डॉ. मनोज कुमार पटेरिया, और आयोजन समिति के अध्यक्ष श्री एस.के.राउत उपस्थित थे। राज्यपाल श्रीमती आनंदी बेन पटेल ने कहा कि ने कहा कि वर्तमान समय में सूचना और सूचना तकनीक का महत्व सर्वाधिक है। सूचना और संचार के क्षेत्र में नित्य नई खोजें हो रही हैं। यह एक प्रकार से संचार-क्रांति का दौर कहा जा सकता है।उन्होंने कहा कि संचार माध्यमों और संचारकों का उद्देश्य ही ज्ञानयुक्त, शिक्षित, जागरूक और संवेदनशील समाज का निर्माण है। यह तभी संभव है जब ये गुण माध्यमों और संचारकों में भी विद्यमान हों। मीडिया चौपाल का उद्देश्य भी है कि समाज की जरूरतों के लिहाज से विकास, विज्ञान, पर्यावरण, संस्कृति और गैर राजनीतिक आदि संदेशों को भी वाजिब स्थान और समय मिले। मीडिया के अंदरूनी प्रतिस्पर्धा से भी कभी-कभी कुछ समाचारों को ज्यादा असरकारक ढंग से दिखाया जाता है, जिससे विवादास्पद स्थिति निर्मित होने का डर रहता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक श्री इंद्रेश कुमार ने कहा कि हमने भारत की 126 करोड़ जनता के सामने एक सपना रखा है कि हम एक नया भारत बनायेंगे। उन्होंने कहा कि भारत एकता,शांति और अहिंसा का पक्षधर है यहां गोली-बारी की जगह नहीं है। हमारे देश में विकास ही एक मात्र मुददा है। हमारा संविधान विश्व का सबसे लोकप्रिय संविधान है। वरिष्ठ विचारक एवं चिंतक श्री के.एन.गोविन्दाचार्य ने कहा कि भारत कोई भूखण्ड नहीं है। भारत एक सभ्यता और अखंड राष्ट्र है। उन्होंने कहा कि भारत को पश्चिमी नजरिये से देखना बंद करना चाहिए, उसे भारत की ही नजर से देखना होगा। इसलिए मीडिया को सही बात बोलना चाहिए। आयोजन समिति के अध्यक्ष श्री एस.के.राऊत ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के आयोजक अनिल सौमित्र ने स्वागत भाषण दिया।
पत्रकारों की सुरक्षा का कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू की जायेगी
1 April 2018
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि पत्रकारों की सुरक्षा के लिये कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू की जायेगी। वे आज यहां मीडिया महोत्सव 2018 के अंतर्गत आयोजित ''भारत की सुरक्षा, मीडिया, विज्ञान एवं तकनीकी की भूमिका' विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित कर रहे थे। श्री चौहान ने कहा कि व्यापक अर्थ में राष्ट्रीय सुरक्षा में महिलाओं, किसानों, श्रमिकों और गरीबों की सुरक्षा भी शामिल है। उन्होने कहा कि मीडिया की जिम्मेदारी बढ़ गई है। श्री चौहान ने कहा कि बेटियों के सम्मान से खिलवाड़ करने वालों के मानव अधिकार नहीं होते। इनका महिमामंडन किसी भी हाल में नहीं होना चाहिये। उन्होंने कहा कि बेटियों की गरिमा को धूमिल करने वालों को फांसी देने का कानून बनाया गया है। श्री चौहान ने कहा कि झूठी खबरों से भी सावधान रहने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज के सभी वर्गों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा की जरूरत होती है। इसलिये श्रमिकों को जमीन और घर देने तथा महिलाओं को सुरक्षा देने जैसे कदम उठाये गये हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में चुनावों की तैयारियां चलती रहती हैं और सरकारों को विकास पर फोकस करने के लिय कम समय मिल पाता है। इसीलिये लोक सभा और विधान सभा के चुनावों को एक साथ कराने पर चर्चा चल रही है। उन्होंने कहा कि मीडिया को भी इस विषय पर विचार करना चाहिये। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर श्री निखिल दवे की किताब ''अंतस यात्रा'' और श्री ओम प्रकाश की किताब 'सृजन समुच्चय' का लोर्कापण किया। इस अवसर पर प्रतिष्ठित विचारक श्री के एन गोविंदाचार्य, वरिष्ठ पत्रकार श्री गिरीश उपाध्याय, श्री शिव अनुराग पटैरिया, कांग्रेस प्रवक्ता सुश्री प्रियंका चतुर्वेदी और बडी संख्या में मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित थे।
50 लाख मुआवजे की मांग
26 March 2018
भोपाल,26 मार्च। सेंट्रल प्रेस क्लब ने स्टिंग ऑपरेशन कर पुलिस और रेत माफिया का गठजोड़ का भंडाफोड़ करने वाले इलेक्ट्रॉनिक चैनल के पत्रकार संदीप शर्मा की ट्रक से कुचलकर मौत की निंदा करते हुए राज्य सरकार से पत्रकार के परिवार के लिए 50 लाख रुपए मुआवजे की मांग है साथ ही प्रदेश में लगातार पत्रकारों पर हमले होने की घटनाएं बढ़ रही हैं जिसके लिए प्रदेश सरकार से मांग की है कि पत्रकारों की सुरक्षा के मद्देनजर ठोस उपाय किए जाएं। सेंट्रल प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने मृतक पत्रकार को श्रद्धांजलि देते हुए ईश्वर से प्रार्र्थना की कि परिजनों को इस गहन दुख को सहन करने शक्ति प्रदान करे।
माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के कुलपति श्री जगदीश उपासने ने किया कार्यभार ग्रहण
23 March 2018
भोपाल, 23 मार्च। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में 23 मार्च, शुक्रवार को कुलपति पद पर श्री जगदीश उपासने ने कार्यभार ग्रहण कर लिया है। पूर्व कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने श्री उपासने को कार्यभार सौंपा। इस अवसर पर एक औपचारिक एवं परिचय कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें प्रो. कुठियाला ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों एवं प्राध्यापकों से श्री उपासने का परिचय कराया। श्री उपासने युगधर्म, जनसत्ता, इंडिया टुडे, हिंदुस्थान समाचार सहित कई प्रमुख समाचार-पत्रों एवं समाचार एजेंसियों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। आप अभी पाञ्चजन्य एवं ऑर्गेनाइजर के समूह संपादक थे। इससे पूर्व श्री उपासने माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के नोएडा परिसर में अध्यापन कार्य से भी जुड़े रहे हैं।
पत्रकार सुरक्षा: केन्द्र सरकार के पत्रों की धज्जियां उडाते मध्यप्रदेश सरकार के अफसर
21 March 2018
भोपाल, 21 मार्च। एम.पी.वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन विगत चार वर्ष से पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कानून बनाने की निरंतर मांग कर रहा है। पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष राधावल्लभ शारदा ने प्रदेश भर में सड़क मार्ग द्वारा लगभगत 3200 किमी से अधिक स्थानों की यात्रा की, यूनियन के पदाधिकारियों द्वारा संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन दिए गए, परन्तु अफसोस है कि बार-बार केन्द्र सरकार के गृह विभाग द्वारा जारी गए निर्देशों, पत्रकारों के ज्ञापनों, प्रदर्शनों के उपरांत भी राज्य सरकार के संबंधित विभाग की कुंभकर्णी नींद नहीं खुली। एम.पी.वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन प्रदेश अध्यक्ष राधावल्लभ शारदा ने मांग को और मुखरता से उठाने के लिए यूनियन के युवा एवं कर्मठ पत्रकार रवि कुमार गुप्ता जौरा (मुरैना) को अधिकृत किया कि वे पत्रकारों की सुरक्षा से संबंधित मामले में केन्द्र सरकार से पत्र व्यवहार करें। इसके उपरांत प्रांतीय सह सचिव रवि कुमार गुप्ता ने पहला पत्र 8 सितम्बर 2010 को केन्द्रीय गृह मंत्री को लिखा। 23 नवम्बर 2017 को केन्द्रीय गृह विभाग ने क्र. VI/23014/12/2017-VS दिनांक 23 नवम्बर 2017 को म.प्र. के मुख्य सचिव एवं पुलिस महानिदेश को आवश्यक कार्यवाही हेतु भेजा। केन्द्र सरकार के गृह विभाग से यूनियन द्वारा पूर्व में भी पत्र व्यवहार किया गया था। उस पत्र व्यवहार पर संज्ञान लेते हुए केन्द्रीय गृह विभाग ने 24013/46/MPSC/2013 - CSR-111 दिनांक 20 अक्टूबर 2017 को संचालक एन.के.भल्ला ने देश के समस्त गृह सचिव एवं पुलिस महानिदेश को पत्र भेजा और सख्त लहजे में लिखा कि पत्रकारों के प्रकरण की जांच समय सीमा में न्याय हित में करें। जब हमने राज्य सरकार के संबंधित विभाग द्वारा केन्द्र के आदेशों को कचरा पेटी में डालते देखा तब पुन: पत्र व्यवहार किया गया तब 16 जनवरी एवं 27 फरवरी को पुन: म.प्र. के गृह सचिव को केन्द्र द्वारा पुन: प्रकरण पर संज्ञान लेने लिखा। बार-बार सरकारी अधिकारियों को टोकने और केन्द्र सरकार के निर्देशों के अनुपालन का दबाव डालने के उपरांत आखिरकार सरकार का जनसम्पर्क विभाग नींद से जागा और अपर संचालक ने 14 मार्च 2018 को प्रदेश के समस्त अधिमान्यता प्राप्त पत्रकारों को पत्र भेजा जिसमें लिखा वर्तमान कानूनी प्रावधानों के अतिरिक्त कुछ विशेष प्रावधान की आवश्यकता है तो सुझाव दें। मेरा मानना है कि प्रदेश के पत्रकारों को वर्तमान में प्रचलित प्रावधान की जानकारी नहीं होगी। मेरी जानकारी के अनुसार 6 जनवरी 2010 को जारी गृह विभाग के आदेश जो कि स्पष्ट नहीं है का भी पालन पुलिस द्वारा नहीं किया जाता और ना ही जनसम्पर्क विभाग ने उक्त आदेश के पालन हेतु प्रयास किया। बार-बार दबाव बनाने के उपरांत विभाग द्वारा बेमन से की गई कार्रवाहियों, स्पष्ट आदेश ना देने से यह प्रतीत होता है कि मध्यप्रदेश का जनसम्पर्क विभाग पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर कतई गंभीर नहीं है और केवल खानापूर्ति के लिए कार्यवाही करता है। इतना ही यूनियन ने पत्रकारों की सुरक्षा के मामले को लेकर मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखे जिसमें मांग की गई कि जब तक सुरक्षा कानून नहीं बनता तब तक एक जांच समिति ही सरकार बना दे। जांच समिति बनने से ही समस्या समाप्त हो जाएगी। परन्तु सरकार के आला अफर जो मुख्यमंत्री के निकट हैं शायद समिति नहीं बनने देंगे।
पुष्पेंद्र पाल सिंह के शोकाकुल परिवार को ढांढस बधाने उनके आवास पर पहुँचे मुख्यमंत्री
20 March 2018
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान अपनी धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह के साथ मध्यप्रदेश माध्यम के प्रधान संपादक श्री पुष्पेंद्र पाल सिंह के आवास पर उनकी पत्नी अनिता सिंह के देहांत पर शोक जताने पहुँचे। G- 2, 132 गुलमोहर कालोनी त्रिलंगा स्थित उनके आवास पर मुख्यमंत्री कल लगभग 7 बजे शाम को पहुचें। इस दुखद घड़ी में लगभग आधे घण्टे तक मुख्यमंत्री ने शोकाकुल परिवार के साथ समय बिताया।
मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा पत्रकार श्री पांडे के निधन पर शोक व्यक्त
9 March 2018
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने वरिष्ठ पत्रकार श्री प्रकाश पाण्डेय के निधन पर गहन दु:ख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने दिवंगत आत्मा की शांति और परिजनों को दु:ख सहने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की है।




विकास और जनकल्याण कार्यों में अग्रणी राज्य है मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री श्री चौहान
26 February 2018
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य में पॉलिटिक्स ऑफ परफार्मरमेंस का नया चलन प्रारंभ हुआ है। इसमें विकास करने वालों को ही सफलता मिलेगी। मध्यप्रदेश आज विकास और जनकल्याण कार्यों में अग्रणी राज्य है। डेढ़ दशक पूर्व इसकी पहचान पिछड़े और बीमारू राज्य के रूप में थी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश विकसित और तेजी से आगे बढ़ने वाला राज्य है। कृषि, प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना, लोक सेवा गांरटी एक्ट, पर्यटन, सौर ऊर्जा, स्वच्छता सर्वेक्षण, सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, सड़क, बिजली, सिंचाई, महिला शक्तिकरण और किसान कल्याण के कार्यों में देश का अव्वल राज्य है। श्री चौहान आज विधानसभा परिसर में कर्नाटक राज्य के पत्रकारों के साथ अनौपचारिक चर्चा कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री एस.के. मिश्रा और आयुक्त जनसम्पर्क श्री पी. नरहरि भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि राज्य सरकार ने विकास और जनकल्याण कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है, अनेक नवाचार किये हैं, प्रभावी योजनाएं बनाई हैं। महिला सशक्तिकरण के लिए स्थानीय स्वशासी सरकारों तथा शिक्षकों के पदों में 50 प्रतिशत और अन्य सभी शासकीय सेवाओं में 33 प्रतिशत (वन विभाग को छोड़कर) आरक्षण की व्यवस्था की गई है। बेटियों को परिवार बोझ नहीं मानें, शिक्षा की उचित सुविधा उपलब्ध हो; इसके लिए वर्ष 2006 में मध्यप्रदेश में लाड़ली लक्ष्मी योजना लागू की गई। आज प्रदेश में 37 लाख लाड़ली लक्ष्मियां हैं। समय-समय पर शिक्षा के लिए और 21 वर्ष की होने पर 1 लाख रूपये से अधिक की राशि इन लाड़लियों को दी जा रही है। महिला सशक्तिकरण प्रयासों के सुखद परिणाम भी दिखने लगे हैं। लैंगिक अनुपात में प्रदेश का भिंड जिला सबसे पिछड़ा था, आज वहां का लैंगिक अनुपात भी सुधर रहा है। महिलाओं के प्रति अपराधों के दोषियों को कड़ा दंड देने, बेटियों के साथ बलात्कार का जघन्य अपराध करने वाले को मृत्यु दंड देने संबंधी विधेयक विधानसभा से पारित कर राष्ट्रपति के अनुमोदन के लिये भेजा गया है। इसी तरह किसानों को प्रदेश में जीरो प्रतिशत पर ऋण दिया जाता है। प्राकृतिक आपदा के समय राज्य सरकार द्वारा भरपूर मदद की जाती है। भावांतर योजना आदि राहत के अनेक प्रभावी कदमों के साथ ही फसलों की क्षति पूर्ति भी की जाती है। क्षति आंकलन 30 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर के मान से किया जाता है। प्रयास है कि किसान विपरीत परिस्थितियों में भी हताश नहीं हों। राज्य में कानून बनाकर गरीब को रहने की जमीन का मालिक बनाया गया है। गरीब प्रतिभाओं को प्रगति के अवसर मिलें, धन का अभाव प्रतिभा के विकास में बाधा नहीं बने; इसके लिये मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी छात्रवृत्ति योजना शुरु की गयी है। इसमें मेधावी बच्चों की उच्च शिक्षा की फीस राज्य सरकार भरती है। श्री चौहान ने बताया कि मध्यप्रदेश को विगत पांच वर्षों से कृषि कर्मण पुरस्कार मिल रहा है। कृषि वृद्धि दर औसतन बीस प्रतिशत बनी हुई है। सिंचित क्षेत्र साढ़े सात लाख से बढ़ाकर चालीस लाख हेक्टेयर हो गया है। इसे अस्सी लाख हेक्टेयर तक ले जाने पर तेजी से कार्य हो रहा है। नदी जोड़ो परियोजनाओं में नर्मदा-क्षिप्रा जुड़ गयी हैं। नर्मदा-गंभीर का कार्य पूर्णता पर है। प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश प्रथम है। पर्यटन में बेस्ट राज्य का पुरस्कार भी मिला है। लोक सेवा गारंटी प्रदाय कानून बनाने वाला मध्यप्रदेश पहला राज्य है। गत वर्ष के स्वच्छता सर्वेक्षण में चयनित सौ शहरों में बाईस शहर मध्यप्रदेश के थे। पर्यावरण संरक्षण की जागरुकता और कर्तव्य बोध में भी देश का अग्रणी राज्य है मध्यप्रदेश। नर्मदा सेवा यात्रा के रुप में नदी संरक्षण का दुनिया का सबसे बड़ा अभियान यहां संचालित हुआ है। नर्मदा नदी के तटों पर बारह घंटों की अवधि में 6.73 करोड़ पौधों का रोपण प्रदेशवासियों ने किया है। श्री चौहान ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए देश में एक साथ चुनाव करवाये जाने के पक्ष का पुरजोर समर्थन किया। इस दिशा में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों को अभिनंदनीय बताते हुए उन्होंने कहा कि अलग-अलग चुनाव होने से विकास बाधित होता है। चुनाव एक साथ कराना देश के हित में है। श्री चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्रियों की शीघ्र ही होने वाली बैठक में वे स्वयं इस संबंध में चर्चा करेंगे।
पत्रकार राजनेताओ के दरबारी ना बनें : शिव चौबे
7 February 2018
भोपाल। शहीद भवन, भोपाल में आयोजित एम.पी.वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के प्रांतीय सम्मेलन एवं सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि केबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त शिव चौबे जी, अध्यक्ष मप्र खनिज विकास निगम एव रमेश शर्मा जी राज्यमंत्री एव अध्यक्ष एकता परिषद द्वारा माँ सरस्वती को माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित के उपरांत कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। अपने उद्बोधन में शिव चौबे जी ने कहा की में भी एक पत्रकार हूं, यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष श्री शारदा को आज 75 वर्ष पूर्ण होने के बाद भी एक युवा की तरह पत्रकार हित में काम करने हेतु शुभकामनाएं एवं उनके दीर्घायू होने की कामना करता हूं। उन्होंने कहा कि पत्रकार आज भी स्वाभिमान और सम्मान से जीते है और सन्देश दिया की राजनेताओ के दरबारी ना बने क्यों की आज की पत्रकारिता का पैमाना ही बदल गया है जिसके बाद श्री चौबे जी ने प्रदेशाध्यक्ष एव अन्य अतिथियो के साथ प्रदेश के कई पत्रकारो को देवऋषि नारद सम्मान से सम्मानित करा जिसके बाद माननीय श्री चौबे जी यूनियन की प्रांतीय सचिव सुश्री लक्षमी दुबे ने प्रतीक चिन्ह भेट कर शाल एवं श्रीफल से सम्मान किया। रमेश शर्मा जी ने पत्रकारो को संबोदित करते हुए कहा की हमारी सरकार ने पत्रकारो को श्रद्धा निधि एव बीमा योजना की सौगात दी है उन्होनें सरकार के द्वारा पत्रकारों के हित में किए गए कार्यों को विस्तार बताया। प्रदेश से आए 500 से अधिक पत्रकारों एवं आमंत्रित अतिथियों के बीच प्रदेश अध्यक्ष राधावल्लभ शारदा ने प्रदेश के पत्रकारों की समस्याओं का मुद्दा प्रमुखता से उठाया उन्होंने कहा कि इस मामले में प्रदेश के सभी पत्रकारों की पीड़ा को समझना जरूरी है, उन्होंने पत्रकारों की सुरक्षा कानून एवं जांच समिति बनाने का मांग भी पुरजोर तरीके उठाई। सारी परम्पराओं को तोड़कर मैंने सबसे पहले प्रदेश के पत्रकारों की समस्याओं को रखना उचित समझा, कारण स्पष्ट है आज इस मंच पर अतिथि आसीन हैं जिन्हें यूनियन का मुखिया होने के नाते सर्वानुमति से लिए गए निर्णयों से पत्र ज्ञापन के माध्यम से अवगत कराया गया था, परन्तु किन्हीं कारणों से इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई। उन्होंने अपने उद्बोधन में उमाशंकरजी गुप्ता को एक पत्र के माध्यम से अवगत कराया कि उनके द्वारा यूनियन के पत्र पर डीजीपी को समिति बनाने हेतु लिखा। परन्तु किन्हीं कारणों से तत्कालीन डीजीपी अथवा अन्य अधिकारियों ने उस पत्र पर किए आदेश का पालन नहीं दिया। सरकार याने मुख्यमंत्री, मंत्री के आदेश का पालन करना सरकारी सेवक का धर्म है। सरकार, मुख्यमंत्री, मंत्री के आदेशों का पालन करना ही उनका पहला और अंतिम कत्र्तव्य है। ना मानना हर प्रकार से अनुचित और आचरण संहिता का उल्लंघन है। इसी प्रकार हमने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को पत्रकारों के लिए भाड़ा क्रय योजना के तहत गृह निर्माण मंडल से आवास उपलब्ध करवाने हेतु पत्र लिखा था। जिसे माननीय रामपाल सिंह जी से चर्चा उपरांत 6 0 आवास देने की बात हुई। उस समय मेरे मन में विचार आया कि कार्य सामूहिक जवाबदारी का है अत: तत्कालीन यूनियन के एक उपाध्यक्ष को जिम्मेदारी दी गई परन्तु आगे क्या हुआ भरोसा तोड़ा गया, लाभ लिया गया। खैर दुनिया की रीत है उसी अनुरूप उन्होंने कार्य किया। उन्होंने कहा कि मंच पर हमारी यूनियन के संरक्षक और मुख्यमंत्री के बाल सखा, सलाहकार एवं खनिज विकास निगम के अध्यक्ष माननीय शिव चौबे जी भी मंचासीन है जो कि स्वभाव से भगवान भोलेनाथ की तरह भोले हैं के माध्यम से हमारे पत्रकार साथियों या उनके परिवार के सदस्यों को गंभीर बीमारी के अवसर पर मुख्यमंत्री आर्थिक सहायता निधि से सहायता दिलाई। इन सभी के उपरांत उन्होंने पत्रकार सुरक्षा कानून एवं जांच समिति बनाने की मांग को उद्धृत करते हुए कहा कि हम विगत 6 वर्ष से लगातार सरकार के सामने अलग-अलग माध्यम द्वारा रख रहे हैं पिछले एक माह से हमारी यूनियन के पदाधिकारी अपने-अपने जिलों में इन दोनों मांगों को लेकर ज्ञापन दे रहे हैं। सरकार को चलाने के लिए विधायिका न्यायपालिका, कार्यपालिका जितनी महत्वपूर्ण है उनसे अधिक महत्वपूर्ण खबर पालिका है। जब तक खबर पालिका जनता की समस्या को अपनी कलम के माध्यम से नहीं उठाता तब तक तीनों स्तंभों को कोई जानकारी नहीं होती है। विधायिका कई बार समाचारों को आधार बनाकर कानून बनाती है, न्यायपालिका उस कानून पर निर्णय देती है और कार्यपालिका उस कानून का क्रियान्वयन करती है, परन्तु खबर पालिका के लिए एक छोटा सा कानून बनाने में राज्य सरकार क्यों विलम्ब कर रही है समझ से परे है, या फिर भ्रष्ट तंत्र कानून नहीं बनाने दे रहा है। उन्होंने अपने उद्बोधन की अंत में कहा कि जनसम्पर्क मंत्री नरोत्तम जी के पास समाचार पत्रों और पत्रकारों से संबंधित विभाग है यदि यह विभाग श्रद्धानिधि को 6 हजार के स्थान पर 10 हजार तथा गंभीर बीमारी में त्रस्त पत्रकारों को जिन्हें श्रद्धानिधि मिलती है को बीमारी के इलाज के लिए रुपए 15 हजार प्रतिमाह की व्यवस्था करें। हम न तो विज्ञापन की बात करते और न ही अधिमान्यता की ये काम नियमों में आने पर अपने आप होते हैं। इस अवसर पर प्रदेश के पत्रकारों का देवर्षि नारद, नेताजी सुभाषचन्द्र बोस, कर्म-श्री एवं कर्मठ कार्यकर्ता सम्मान से भी सम्मानीत किया गया।
सकारात्मक खबरों को प्राथमिकता दे मीडिया : मंत्री श्री गोपाल भार्गव
4 February 2018
मध्यप्रदेश मंत्रि-परिषद् में तीन नये सदस्य नियुक्त किये गये हैं। राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने इन नये सदस्यों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। राज्यपाल श्रीमती पटेल ने श्री नारायण सिंह कुशवाह को मंत्री एवं श्री बालकृष्ण पाटीदार तथा श्री जालम सिंह पटेल को राज्य मंत्री के पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह ने शपथ ग्रहण समारोह की कार्यवाही का संचालन किया। शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, विधानसभा अध्यक्ष श्री सीतासरन शर्मा, मंत्रि-परिषद् के सदस्य, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद श्री नन्दकुमार सिंह चौहान भी उपस्थित थे।
साहित्य का अर्थ है आत्मा से संवाद'
4 February 2018
भोपाल, 04 फरवरी, 2018। समाचार-पत्र जो काम नहीं कर सकते, वह काम साहित्य करता है। साहित्य के शब्द आत्मा से संवाद करते हैं। जब हम एकांत में होते हैं तो साहित्य के शब्द गुनगुनाते हैं। जब हम आत्मा के पास जाते हैं, तब भी हम साहित्य से संवाद करते हैं। यह विचार वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विजय बहादुर सिंह ने पंडित बृजलाल द्विवेदी अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान समारोह में व्यक्त किए। मीडिया विमर्श की ओर से आयोजित समारोह में दसवाँ पं. बृजलाल द्विवेदी सम्मान साहित्यिक पत्रिका 'अलाव' के संपादक रामकुमार कृषक को दिया गया। साहित्यिक पत्रकारिता की निष्पक्षता के संबंध में डॉ. सिंह ने कहा कि पत्रकारिता राजनीति के पक्ष में खड़ी हो सकती है, किंतु साहित्य कभी किसी के पक्ष या विपक्ष में नहीं लिखा जाता। उन्होंने कहा कि साहित्य सत्य पर टिका होता है। जब कभी सच संदिग्ध दिखाई देता है, तो लोग सच जानने के लिए साहित्य के पास जाते हैं। महाभारत और रामायण यह कभी झूठे नहीं पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में शब्द को ब्रह्म कहा गया है। वेद-उपनिषद ब्रह्म हैं। डॉ. सिंह ने जोर देकर कहा कि शब्द के ब्रह्म होने की सबसे अधिक संभावना जिस क्षेत्र में बनती है, वह साहित्य का क्षेत्र है। कवि में निवास करती है संस्कृति : साहित्यकार डॉ. विजय बहादुर सिंह ने कहा कि कवि में एक पूरी संस्कृति निवास करती है। जब पूछा जाता है कि आपकी संस्कृति क्या है, तब हम कहते हैं कि महाभारत और रामायण हमारी संस्कृति है। अर्थात् कवि हमारी संस्कृति की पहचान होते हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी विश्वविद्यालय कवि नहीं बना सकता। कवि पैदा होते हैं। जिस प्रकार पीपल का वृक्ष उगता है, पहाड़ से नदी निकलती है, उसी तरह कवि भी नैसर्गिक होता है। त्रुटियों की अपेक्षा समाधान की बात हो : कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने कहा कि हम वर्तमान परिदृश्य की त्रुटियों की ओर ध्यान देते हैं। संगोष्ठियों में सामाजिक संवाद के माध्यमों को विवादित बना कर चल देते हैं। हम समाधान और सहमति के लिए संवाद क्यों नहीं करते हैं? उन्होंने कहा कि उस समय की प्रतीक्षा है जब विमर्श में शामिल होने वाले विभिन्न विचारधारा के विद्वान सहमति बनाकर उठना शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि सामाजिक संवाद में पक्षहीन हस्तक्षेप होना चाहिए। प्रो. कुठियाला ने कहा कि नये मीडिया में युवाओं द्वारा जो सृजन किया जा रहा है, वह समाज में प्रभाव उत्पन्न कर रहा है। यह माध्यम बहुत तेजी से विस्तारित हुआ है। इसलिए हमें इस माध्यम की ओर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार के बौद्धिक आयोजनों में हमें विचार करना चाहिए कि समाज से नकारात्मकता को समाप्त करने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं। पत्रकारिता एक लोकतांत्रिक कर्म : समारोह में सम्मानित साहित्यकार एवं संपादक रामकुमार कृषक ने कहा कि पत्रकारिता एक लोकतांत्रिक, जनतांत्रिक कर्म है। इसका पक्ष-विपक्ष हो सकता है। उन्होंने कहा कि मुख्यधारा की पत्रकारिता की पहुँच समाज में व्यापक होती है। वहीं, साहित्यिक पत्रकारिता की पहुँच सीमित होती है। ऐसे में साहित्यिक पत्रकारिता के प्रयासों को जब हम सम्मान देते हैं तो इसका अर्थ होता है कि हम मूल्यों से जुड़े रहना चाहते हैं। अपनी पत्रिका अलाव के संबंध में उन्होंने कहा कि अगस्त, 1988 में अपने कुछ मित्रों के साथ उन्होंने इसकी शुरुआत की थी। वह यात्रा 51वें अंक तक पहुँच गई है। हमारी कोशिश रही है कि अपने समय के सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और भाषा-साहित्य से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से बात की जाए। इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं वरिष्ठ पत्रकार डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने कहा कि हम जिस पत्रकारिता को जी रहे हैं, उसे गणेश शंकर विद्यार्थी जैसे पत्रकारों ने सींचा है। साहित्यिक पत्रकारिता एवं साहित्यकार आज मुख्यधारा की पत्रकारिता को समृद्ध करने में अपना योगदान दे सकते हैं। डॉ. द्विवेदी ने कहा कि भारत में पत्रकारिता का गौरवशाली इतिहास रहा है। जब भी देश का प्रश्न आता है, पत्रकारिता अपने सभी प्रकार के हित छोड़कर देशहित में सामने आती है। इससे पूर्व वरिष्ठ साहित्यकार गिरीश पंकज ने श्री कृषक के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि वे विचारों की ऐसी खेती करते हैं, जिसकी फसल अलाव के रूप में सामने आती है, जो समाज का बौद्धिक पोषण करती है। उन्होंने हम देखते हैं कि आज साहित्यकारों के अनेक चश्मे हैं। किंतु, एक चश्मा ऐसा भी होना चाहिए जो वंचित समाज की पीड़ा को देख सके। मतभेद कभी भी मनभेद में परिवर्तित नहीं होने चाहिए। आज हम देखते हैं कि मतभेद न केवल मनभेद में बदले हैं, बल्कि हिंसक भी हो गए हैं। श्री पंकज ने कहा कि साहित्यिक पत्रकारिता के संपादकों को समाज को बेहतर बनाने के प्रयास करने चाहिए। इस अवसर पर कवि एवं पत्रकार डॉ. सुधीर सक्सेना ने कहा कि आज बड़े समाचार-पत्रों में साहित्य के लिए स्थान सिकुड़ता जा रहा है। जबकि एक समय में समाचार-पत्र साहित्य की नर्सरी हुआ करते थे। उन्होंने इस पुरस्कार के संबंध में कहा कि मीडिया विमर्श का यह सम्मान साहित्यिक पत्रकारिता के क्षेत्र में स्थापित हो चुका है। दस वर्षों में कभी भी पुरस्कार को लेकर कोई विवाद की स्थिति नहीं बनी। मीडिया विमर्श के चयन मण्डल ने सदैव ही श्रेष्ठता का चयन किया है। कार्यक्रम की शुरुआत में स्वागत भाषण एवं पुरस्कार की पृष्ठभूमि मीडिया विमर्श के कार्यकारी संपादक प्रो. संजय द्विवेदी ने रखी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुभद्रा राठौर ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सौरभ मालवीय ने किया। इस अवसर पर शहर के गणमान्य नागरिक, देशभर से आए पत्रकार एवं संचार के क्षेत्र में कार्यरत लोग उपस्थित रहे। पुस्तकों का विमोचन : इस अवसर पर दो पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। युवा पत्रकार केशव पटेल की पुस्तक 'न्यू मीडिया : न्यू फ्रंटियर्स ऑफ कम्युनिकेशन' और युवा पत्रकार हेमंत पाणिग्रह की पुस्तक 'मोदी युग : एक मूल्यांकन'। मोदी युग : एक मूल्यांकन प्रो. संजय द्विवेदी की पुस्तक 'मोदी युग' की समीक्षाओं का संकलन है।
जनसम्पर्क मंत्री डॉ. मिश्र ने किया शोक व्यक्त
3 February 2018
जनसम्पर्क, जल संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने वरिष्ठ पत्रकार श्री रविन्द्र जैन के पिताश्री श्री भगवानदास जी के निधन पर गहन शोक व्यक्त किया है। डॉ. मिश्र ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिये ईश्वर से प्रार्थना की है। जनसम्पर्क मंत्री ने शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।
देवर्षि नारद एवं नेताजी सुभाषचन्द्र बोस सम्मान से सम्मानित होंगे पत्रकार
31 January 2018
भोपाल, 31 जनवरी 2018 । शहीद भवन में 1 फरवरी को प्रात: 11 बजे आयोजित एक भव्य समारोह में प्रदेश भर के पत्रकारों का एम.पी.वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों द्वारा सम्मान किया जाएगा। यूनियन के प्रांतीय सम्मेलन एवं सम्मान समारोह में भोपाल एवं प्रदेशभर से लगभग 500 से अधिक पत्रकारों के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम में आमंत्रित अतिथि सर्व श्री शिवराज सिंह चौहार, मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश शासन, श्री रामपाल सिंह, लोक निर्माण मंत्री, मध्यप्रदेश, श्री शिव चौबे, अध्यक्ष खनिज विकास निगम, श्री महेश श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय एकता परिषद, श्री रमेश शर्मा, उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय एकता परिषद, श्री सुरेन्द्र नाथ सिंह, विधायक भोपाल मध्य, श्री ओम मेहता, वरिष्ठ पत्रकार, श्री अशोक त्रिपाठी, समूह संपादक, समय-जगत, श्री लोकेन्द्र पाराशर, प्रदेश मीडिया प्रभारी, भाजपा कार्यक्रम की अध्यक्ष श्री राधावल्लभ शारदा, यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष, करेंगे। अतिथियों द्वारा पत्रकारिता के विभिन्न विषयों पर उद्बोधन के उपरांत पत्रकारों को देवर्षि नारद, सुभाषचन्द्र बोस, कर्म-श्री एवं कर्मठ कार्यकर्ता सम्मान से सम्मानीत किया जाएगा। देवर्षि नारद सम्मान: साधना न्यूज चैनल: श्री हित किशोर शर्मा, सुबह सवेरे: श्री अरूण पटेल, नवदुनिया: श्री राहुल शर्मा, दैनिक भास्कर: श्री रूपेश राय, दैनिक जागरण: श्री विवेक झा, हरिभूमि: श्री चन्द्रभान सक्सेना, कर्म-श्री सम्मान: महेन्द्र नारोलिया प्रदेश टुडे: श्री प्रदीप शर्मा, सच एक्सप्रेस: श्री आत्माराम सोनी, इंडिपेंडेंट मेल: श्री प्रवीण चौहान, बिजनेस स्टेण्डर्ड: श्री शशिकांत त्रिवेदी, आंचलिक जागरण: श्री श्याम चतुर्वेदी, लटेरी दबंग दुनिया: श्री आशीष मिश्रा खंड़वा। इसी अवसर पर यूनियन के सहयागी श्री विनोद तिवारी, श्री एन.पी. अग्रवाल एवं श्री अवधेश भार्गव का भी सम्मान किया जाएगा। सुभाषचन्द्र बोस सम्मान: श्री हरीश राय, दमोह, सुश्री लक्ष्मी दुबे, बालाघाट, श्री शिव कुमार नीखरा, गाडरवारा, श्री रमाकांत पांचाल, उज्जैन, श्री मुकेश सक्सेना, राजगढ़, श्री जावेद खान, झाबुआ, श्री खेमराज राठौर, बुरहानपुर, श्री गेंदालाल तिवारी, सोनकच्छ, डॉ. भूपेन्द्र शर्मा 'विकलÓ, शिवपुरी, श्री गणेश बैरागी 'गन्नू भैयाÓ, मंडला, श्री अरूण सक्सेना, भोपाल, श्री हिदायतउल्ला खान, नीमच, श्री सुरेन्द्र सिंह अरोरा, होशंगाबाद, श्री नवल वर्मा, बैतुल, श्री गोविन्द सिंह रघुवंशी, उदयपुरा, श्री दीपक चौधरी, भिंड, श्री श्याम निगम, ब्यावरा-राजगढ़, श्री राकेश सोनी, रतलाम, श्री अभय पाठक, अनूपपुर, श्री दीपक सिंह, सिंगरौली, श्री मुकेश सक्सेना, गुना, श्री राजेश राठौड़, बड़वानी, श्री वीरेन्द्र सिंह, अनुपपुर। कर्म-श्री सम्मान: श्री व्यंकटेश शारदा, श्री श्रीनिवास चौबे 'सोनूÓ, श्री ललित कुमार, श्री अजय ताम्हने, सुश्री राखी बाला, श्री किशोर सिंह। कर्मठ कार्यकर्ता सम्मान: सर्व श्री कमलेश मिश्रा, जिला अध्यक्ष, रीवा, अखिलेश दुबे, जिला अध्यक्ष शिवपुरी, दिनेश चौरसिया, रायसेन जगदीश जोशी, जिला अध्यक्ष, रायसेन संजय पाराशर, जिला अध्यक्ष, खरगौन, रायसिंह सेंधव, जिला अध्यक्ष, देवास, संजय चौधरी, जिला महासचिव, रतलाम, श्याम पटेल, जिला अध्यक्ष, सतना, मुस्तान खान, संभागीय सचिव, जबलपुर, गयाप्रसाद सोनी, जिला अध्यक्ष, छिंदवाड़ा, संदीप ठाकुर, जिला अध्यक्ष, सिवनी, साजिद पठान, जिला अध्यक्ष, डिंडोरी सुधीर कसार, जिला अध्यक्ष, मंडला, ओ. पी. त्रिपाठी, जिला अध्यक्ष, टीकमगढ़, कमलेश पंवार, जिला अध्यक्ष, धार, डी. एस. चौहान, जिला अध्यक्ष, हरदा, दीपक चौधरी, जिला अध्यक्ष, भिंड, निलेश जाट, जिला अध्यक्ष, नरसिंहपुर, राकेश शर्मा, जिला अध्यक्ष, पन्ना, सुनील वर्मा, सदस्यता प्रभारी, शाजापुर, सलीम खान, जिला अध्यक्ष, सीहोर, घनश्याम लौहार, जिला अध्यक्ष, मंदसौर, संदीप पाठक, भोपाल, जमील खान, सदस्यता प्रभारी, गंज बासोदा, श्याम सुन्दर जैन, दमोह नीरज गुप्ता, अनूपपुर, रज़ी खान, सिरोंज, नथमल गुप्ता, सबलगढ़, मुरैना, राजीव अग्रवाल, होशंगाबाद, उम्मेदसिंह, शिवपुरी


जनसंपर्क मंत्री जी को ज्ञापन भेंट
23 January 2018
भोपाल 23 जनवरी। मध्यप्रदेश मीडिया संघ के प्रतिनिधि मण्डल ने जनसंपर्क मंत्री माननीय श्री नरोत्तम मिश्रा से भोपाल स्थित चार इमली बंगले पहुंचकर लघु पत्र-पत्रिकाओं को 25 हजार रू. का प्रति महिने विज्ञापन देने का ज्ञापन दिया। मध्यप्रदेश मीडिया संघ के प्रदेश अध्यक्ष जयवंत ठाकरे ने जनसंपर्क संचनालय के संबंध में मंत्री जी से चर्चा की। मंत्री जी से भेंट करने वालों में सर्व श्री राजेन्द्र विजवे संपादक नगरीय एवं पंचायत समाचार, श्री नरेंद्र नामदेव संपादक टाॅप स्टार न्यूज, श्रीमती रूपा शर्मा संपादक विदिशा टुडे, श्री संतोष हिगंणकर संपादक दिव्य खोज न्यूज, श्री नितीन गुप्ता संपादक नित्य नमन टाईम्स, श्री अनिल गुप्ता संपादक चन्द्र सा प्रकाश, श्री चंचल जी संपादक गोल्डन प्रभास, श्री रईस खान संपादक न्यू संचार समंदर, श्री मुनीर अंसारी जी संपादक मून लाईन एक्सप्रेस, श्री धन सिंग रिपोर्टर चन्द्र सा प्रकाश, श्री इकवाल खान संपादक एकल सत्य श्री कमल सिंह सिसोदिया जी संपादक गंगा एक्सप्रेस न्यूज, श्री लवकेश नामदेव जी विदीशा टाईम्स, श्री सुनील शर्मा जी संपादक कलम का हमला, श्री मोहन ंिसह चैहान संपादक सत्ता का मंथन अरविंद सिंह चैहान संपादक घातक रिपोर्टर, संपादक मीडिया डेमोके्रसी सहित पत्रकार बंधु उपस्थित थे।


जनसम्पर्क मंत्री डॉ. मिश्र मिले जर्नलिस्ट यूनियन के पदाधिकारी
16 January 2018
जनसम्पर्क, जल संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र से आज निवास पर जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ मध्यप्रदेश, इंदौर शाखा के पदाधिकारियों ने सौजन्य भेंट की। भेंट करने वालों में श्री ओमप्रकाश फरकिया, श्री चम्पालाल गुर्जर, श्री राजेन्द्र पुरोहित, श्री ओमप्रकाश जैन, श्री ओम बाबा, श्री संतोष वाजपेयी, श्री घनश्याम सोनी और श्री अशोक बड़गुजर आदि शामिल थे।


डॉ. त्रिखा ने संस्कारवान पत्रकारों की पीढ़ी तैयार की : मुख्यमंत्री श्री चौहान
15 January 2018
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने वरिष्ठ पत्रकार एवं मीडिया शिक्षाविद् डा. नंद किशोर त्रिखा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। डॉ. त्रिखा का आज नई दिल्ली में निधन हो गया। वे 82 वर्ष के थे। श्री चौहान ने कहा है कि डॉ. त्रिखा ने अपने जीवन में पत्रकारिता अध्यापन और मीडिया कर्मियों के कल्याण के लिए उल्लेखनीय कार्य किये। संस्कारवान पत्रकारों की नई पीढ़ी को तैयार करने में उनका योगदान अतुलनीय है। श्री चौहान ने पुण्यात्मा की शांति के लिये ईश्वर से प्रार्थना की है और शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहन संवेदना व्यक्त की है।
साहित्य और पत्रकारिता एक दूसरे के पूरक : रीता चौधरी
13 January 2018
नई दिल्ली : राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की निदेशक और साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त लेखिका डॉ. रीता चौधरी का कहना है कि साहित्य एवं पत्रकारिता एक दूसरे के पूरक हैं और पत्रकारिता साहित्य को आगे बढ़ाने में दूत का काम करता है। डॉ. रीता चौधरी प्रगति मैदान में आयोजित विश्व पुस्तक मेले में हॉल नं. 8 स्थित साहित्य मंच पर शुक्रवार को आयोजित परिचर्चा में विचार व्यक्त कर रही थीं। परिचर्चा का विषय था ‘साहित्य और पत्रकारिता : कितने दूर, कितने पास।‘ परिचर्चा का आयोजन राष्ट्रीय साहित्य संगम के निमित्त ‘उड़ान’ एवं राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के तत्वावधान में किया गया था। डॉ. चौधरी ने इस बात पर चिंता भी जताई कि पत्रकारिता में भाषा का स्तर कमजोर होता जा रहा है। वरिष्ठ पत्रकार एवं समीक्षक अनंत विजय ने अपने वक्तव्य में देश में साहित्यकार पत्रकारों की एक लंबी और समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि साहित्य और पत्रकारिता में गंभीर संबंध है परंतु आज इन दोनों को अलग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि खांचे में बांटने से साहित्य को काफी नुकसान पहुंचाया गया है, इसी प्रकार पत्रकारिता को खांचे में बांटने से नुकसान हो रहा है। सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार डॉ. आलोक पुराणिक ने कहा कि पहले पत्रकारिता में साहित्यिक होना आवश्यक माना जाता था परंतु आज स्थिति ठीक इसके ठीक उल्टी हो गई है। उन्नीस सौ अस्सी तक साहित्य और पत्रकारिता एक दूसरे के बेहद करीब थे लेकिन उसके बाद से कलेवर बदल गए हैं। आज साहित्यिक होना पत्रकारिता में अयोग्ता मान ली जाती है जबकि सभी विषयों में साहित्य का पढ़ाया जाना अनिवार्य होना चाहिए तभी सही समझ बन सकती है। चर्चित उपन्यासकार राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि पत्रकारिता देश में आंचलिक, प्रदेश और राष्ट्रीय तीनों अलग-अलग स्तर पर चलती है। तीनों में कोई तालमेल नहीं है। आंचलिक चिंताएं राष्ट्रीय चर्चा का विषय नहीं बन रहीं। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि पत्रकारिता में आज सकारात्मक तथ्य गायब दिखते हैं। इस कार्यक्रम में भारत प्रकाशन के प्रबंध निदेशक विजय कुमार, पांचजन्य –ऑरगेनाइजर के समूह संपादक जगदीश उपासने, पांचजन्य के संपादक हितेश शंकर, सुप्रसिद्ध साहित्यकार विनोद बब्बर, वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल एवं अनुरंजन झा सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार एवं पत्रकार उपस्थित थे। कार्यक्रम का कुशल संचालन लोकसभा टीवी के जानेमाने एंकर अनुराग पुनेठा ने किया एवं इस सत्र के संयोजक संजीव सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापन किया


माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय में स्थापित होगा मीडिया इन्क्यूबेशन सेंटर
10 January 2018
मीडिया के क्षेत्र में स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन देने के लिये माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय में मीडिया इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित किया जायेगा। इसके लिये नीति आयोग से मंजूरी मिल गयी है। समाज में सामाजिक, आर्थिक विषमता फैलाने वाले कारकों और उनके समाधान के विषयों पर विश्वविद्यालय द्वारा विस्तृत अध्ययन कराया जायेगा। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज यहाँ सम्पन्न विश्वविद्यालय की प्रबंध समिति और महापरिषद की बैठक में ये निर्णय लिये गये। मुख्ममंत्री श्री चौहान ने कहा कि विश्वविद्यालय में अद्वैत वेदांत विषय पर भी शोध और अध्ययन किया जाये। नये पदों की पूर्ति उच्च शिक्षा तथा यूजीसी नियमों के अंतर्गत की जाये। बैठक में बताया गया कि विश्वविद्यालय में भाषा अध्ययन केन्द्र तथा संस्कृति अध्ययन केन्द्रों ने कार्य शुरू कर दिया है। विश्वविद्यालय में विदेशी मीडिया अध्ययन केन्द्र स्थापित किया जायेगा जिसमें पाकिस्तान, चीन और नेपाल के मीडिया में प्रकाशित समाचारों का विश्लेषण किया जायेगा। विश्वविद्यालय द्वारा बी.सी.ए. की परीक्षा ऑनलाइन ली गयी है। विश्वविद्यालय के अंतर्गत बीते एक वर्ष में 210 नयी अध्ययन संस्थाओं को मान्यता दी गई है। इस अवधि में विद्यार्थियों की संख्या 12 प्रतिशत बढ़ी है। विश्वविद्यालय द्वारा संस्कृत की पहली न्यूज मैग्जीन अतुल्य भारतम का प्रकाशन किया गया है। विश्वविद्यालय में सोशल मीडिया रिसर्च सेंटर बनाया गया है। बैठक में वित्त मंत्री श्री जयंत मलैया, जनसम्पर्क एवं जल-संसाधन मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, सांसद श्री आलोक संजर, कुलपति डॉ. बी.के. कुठियाला सहित महा-परिषद के अशासकीय और शासकीय सदस्यगण उपस्थित थे।



हिन्दू अखबार के आठ संपादकों को मिली थी जेल की सजा ।
6 January 2018
एक व्यवसायी प्रधान समाज होते हुए भी सिंधी पत्र-पत्रिकाओं के प्रकाशन का लम्बा इतिहास रहा है। देश के स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में भी सिंधी अखबारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। वर्ष 1911 मील का पत्थर था, जब राष्ट्रवादी विचार धारा के लोकुराम शर्मा ने सिंध से भास्कर नामक अखबार प्रकाशित किया था। तत्कालीन ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीति के कारण उन्हें कारावास जाना पड़ा। जिसकी वजह से अखबार बंद हो गया। लेकिन लोकुराम शर्मा ने हिम्मत नहीं हारी और कुछ वर्ष बाद कारावास से बाहर आने के बाद वर्ष 1924 में दैनिक अखबार हिंदू का प्रकाशन शुरू कर दिया। कराची से वर्ष 1947 तक निरंतर यह अखबार प्रकाशित हुआ और बाद में इसका नाम हिन्दुस्तान हो गया। इस अखबार के एक के बाद एक आठ संपादक ब्रिटिश सरकार द्वारा बंदी बनाए गए। लेकिन उन्होंने हार न मानी और बाधाओं के बावजूद बार-बार फिर से अखबार का प्रकाशन प्रारंभ कर जन जागृति के लिए सक्रिय भूमिका अदा की गई। स्वतंत्रता प्राप्ति और देश विभाजन के बाद भी लगभग 45 वर्ष अर्थात 1992 तक यह अखबार निरंतर छपा। बलदेव गजरा जैसे संपादक ने भी इस अखबार को लोकप्रिय बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। यह जानकारी आज विधायक विश्राम गृह परिसर स्थित शहीद भवन, भोपाल में केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा अखण्ड सिंधु संसार से सहयोग से आयोजित सिंधी पत्रकारिता पर दो दिवसीय संगोष्ठी में प्रदान की गई। संगोष्ठी का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र पर दीप जलाकर किया गया। संगोष्ठी के प्रथम सत्र में डॉ. रोशन गोलाणी, अहमदाबाद, डॉ. सुरेश बबलाणी, अजमेर और बल्लू चौइथाणी, भोपाल ने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इस अवसर पर इंदौर के किशोर कोडवानी ने उनके पिता स्व. श्री दीपक कोडवानी के संपादन में निकले मातृभूमि और शकुंतला समाचार पत्रों की लोकप्रियता और प्रभाव का विवरण दिया। संगोष्ठी के संयोजक ज्ञान लालवानी ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर अजमेर से डॉ. कमला गोकलाणी, अहमदाबाद से चंदर सावनाणी, इंदौर से ईश्वर झामनाणी, भुसावल से दीपक चांदवाणी, रायपुर से प्रेम तनवाणी, कटनी से संजय खूबचंदानी, शहडोल से चंदन बहरानी, इटारसी से श्याम शिवदासानी, मनोज बुधवानी, बिलासपुर से विजय दुसेजा और भोपाल के अनेक पत्रकार और संपादक उपस्थित थे। संगोष्ठी में सिंधी समाचार पत्रों द्वारा भाषा संरक्षण और सामाजिक एकता के लिए निभाई जा रही भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए पत्र-पत्रिकाओं के प्रकाशन से संबंधित समस्याओं पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। रविवार को संगोष्ठी दोपहर 3 बजे से समन्वय भवन, न्यू मार्केट, भोपाल में आयोजित की जाएगी। अशोक बुलानी के निर्देशन में शाम 6 बजे से दो सिंधी नाटक भी मंचित किए जाएंगे।



श्री सुहालका ने डा॰ नरोत्तम मिश्रा को नववर्ष की शुभकामनाए दी ।
2 January 2018
आज जनसम्पर्क मंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा से डिजिटल प्रैस क्लब के अध्यक्ष ओर मेट्रोमिरर डॉट कॉम के प्रधान संपादक श्री शिव हर्ष सुहालका ने उनके निवास पर भेट कर नववर्ष की शुभकामनाए दी । श्री सुहालका ने उन्हे नववर्ष 2018 शुभ व फलदायी होने की कामना की।



aaमूर्धन्य पत्रकार कवि, लेखक श्री महेश श्रीवास्तव सरस्वती सम्मान से सम्मानित


27 December 2017

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज यहां शब्द साधक एवं मूर्धन्य पत्रकार श्री महेश श्रीवास्तव को सरस्वती सम्मान से विभूषित किया । नगर निगम भोपाल द्वारा सरस्वती सम्मान प्रभावशाली पत्रकारिता, लेखक से समाज को नई दिशा प्रदान करने वाले कवि को सम्मानित करने के लिये स्थापित किया गया है। श्री महेश जी को सम्मान में शाल श्रीफल और दो लाख रूपये की सम्मान निधि भेंट की गई। यह सम्मान समारोह नगर निगम भोपाल का रचनात्मक प्रयास है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि श्री महेश श्रीवास्तव गद्य और पद्य दोनों पर एक समान अधिकार के साथ लेखन करते है। उन्हें पढ़ते हुए कविता पढ़ने का सहल आभाष होता है। उनका लेखन कवितामय लेखन है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश को एकसूत्र में बांधने का गीत श्री महेशजी ने लिखा। प्रदेश की भावनात्मत्मक एकता के बिना विकास संभाव नही है। मध्य प्रदेश गान लिखकर उन्होंने अद्भुत कार्य किया है। उन्होंने कहा कि श्री महेशजी में अद्भुत प्रतिभा है। वे ज्ञान, भक्ति और कर्म के संगम है। वे मध्यप्रदेश रत्न है। श्री महेश श्रीवास्तव ने अपने सम्मान के भावनात्मक उत्तर में कहा कि नागरिको के प्रेम की नदियां मुझमें गिर रही है और मैं समुद्र हो गया हूँ। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान जनता की सेवा करने वाले मुख्यमंत्री है। उन्होंने पत्रकारिता की नई पीढ़ी को सीख देते हुए कहा कि जो पत्रकार झुकता नही है वही पत्रकारिता की मूर्ति गढ़ते है। पत्रकार को डूबने का खतरा उठाना सीखना चाहिए। विभिन्न संस्थाओं ने भी श्री महेश श्रीवास्तव का सम्मान किया। माधवराव सप्रे समाचार पत्र संग्रहालय के संस्थापक श्री विजयदत्त श्रीधर ने कहा कि श्री महेश श्रीवास्तव ने जो कहा और लिखा उसे आम नागरिकों ने शब्दशः समझा। यही अभिव्यक्ति की सुंदरता है। उन्होंने कहा श्री महेशजी संपादकीय गरिमा के सशक्त हस्ताक्षर है। भोपाल के नागरिकों को उन पर गर्व है। महापौर भोपाल श्री आलोक शर्मा ने कहा कि नगर निगम को श्री महेश श्रीवास्तव को सम्मानित करते हुए गर्व है। वे आदर और प्रेरणा के केंद्र है। वे पत्रकारिता के चलते फिरते विश्वविद्यालय हैं। उन्होंने श्री महेश श्रीवास्तव की संपादकीय टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होने पत्रकारिता को नई दिशा दी है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने महेश जी के व्यक्तित्व और रचनाकर्म पर केन्द्रित स्मारिका का विमोचन किया। राजस्व मंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता, सहकारिता राज्य मंत्री श्री विश्वास सारंग, पूर्व सांसद श्री कैलाश सारंग, श्री महेश श्रीवास्तव की धर्मपत्नि श्रीमती पुष्पा श्रीवास्तव, नागरिक आपूर्ति निगम ने अध्यक्ष डॉ हितेश वाजपेयी, भोपाल विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष्र श्री ओम यादव और राजधानी के गणमान्य नागरिक लेखक, पत्रकार बुद्धिजीवी उपस्थित थे। अध्यक्ष नगर निगम श्री सुरजीत सिंह चौहान ने आभार व्यक्त किया।


aaसिंचाई रकबा बढ़ाने नदी जोड़ो अभियान को देंगे नई गति : मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र


17 December 2017

नदी जोड़ो अभियान को नई गति देते हुए मध्यप्रदेश में सिंचाई क्षेत्र में आशातीत वृद्धि की जाएगी। जिस तरह नर्मदा और क्षिप्रा को जोड़ा गया, उस पद्धति से अन्य नदियों को भी परस्पर जोड़ने की परियोजनाएं अमल में लाई जाएगी। जो रोडमेप तैयार किया गया है, उसके अनुसार प्रदेश का सिंचित रकबा वर्ष 2022-23 तक 60 लाख हेक्टेयर तक ले जाया जाएगा। यह बात जनसम्पर्क, जल संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने आज एक निजी चैनल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कही। जनसम्पर्क मंत्री ने कार्यक्रम के विशेष सत्र में उपस्थित नागरिकों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए। डॉ. मिश्र ने बताया कि आज प्रदेश का सिंचाई रकबा चालीस लाख हेक्टेयर तक पहुँच गया है। मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान के विकास के दृढ़ संकल्प का ही परिणाम है कि आज प्रदेश में अच्छी सिंचाई के फलस्वरूप कृषि क्षेत्र की तस्वीर बदल गई है। यह क्रम जारी रहेगा। हर खेत तक पानी पहुँचाने के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी के संकल्प 'पर ड्राप मोर क्रॉप'' को भी गंभीरता से क्रियान्वित किया जाएगा। जनसम्पर्क मंत्री ने मध्यप्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून व्यवस्था, नगरीय विकास, पेयजल, विद्युत, सड़क निर्माण, उद्योग, रोजगार और अन्य क्षेत्रों में हुए विकास का भी सिलसिलेवार ब्यौरा दिया। इसके पूर्व उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा शत-प्रतिशत घोषणाएं पूर्ण की गई हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान की विकास की दृढ़ इच्छा शक्ति के कारण प्रदेश की तस्वीर बदल चुकी है। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री नंदकुमार सिंह चौहान, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास, श्रम, स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री श्री दीपक जोशी उपस्थित थे।


aaमीडिया का काम है गलतियां उजागर करे और सरकार का काम है उसे सुधारे: श्री एस.के. मिश्रा


16 December 2017

भोपाल, 16 दिसंबर, 2017 । नई पीढ़ी के पत्रकारों को पुरानी पीढ़ी के और वरिष्ठ पत्रकारगण न केवल प्रशिक्षण दें, बल्कि मार्गदर्शन भी करें। सेन्ट्रल प्रेस क्लब के पदाधिकारियों एवं प्रबंध कार्यकारिणी के सदस्‍यों के सम्मान में राष्ट्रीय हिन्दी मेल द्वारा आयोजित एक समारोह में बतौर मुख्य अतिथि श्री एस.के. मिश्रा प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एवं जनसंपर्क विभाग ने कहा कि मीडिया का काम है गलतियां उजागर करे और सरकार का काम है उसे सुधारे। मध्यप्रदेश में मीडिया और सरकार के बेहतर संवाद की स्थिति का जिक्र करते हुए श्री मिश्रा ने कहा कि वरिष्ठ पत्रकारों को कोई ऐसा सिस्टम तैयार करना चाहिए, जिससे नई पीढ़ी के पत्रकारों की कार्यक्षमता में इजाफा हो और पत्रकारिता के प्रति उनकी रूचि समाज एवं सरकार के हित में कारगर साबित हो। प्रमुख सचिव श्री मिश्रा ने कहा कि आज जरूरत है कि जिन पत्रकारों ने अपनी आयु का एक लंबा समय पत्रकारिता के अनुभव समेटने में गुजारे हैं वे अपने अनुभव आज की नई पीढ़ी के पत्रकारों के साथ साझा करें, जिससे उनका मार्ग प्रशस्त हो सके। उन्होंने कहा कि मीडिया का काम होता है कि जहां जो गलतियां हो रहीं है उन्हे उजागर करे और सरकार का काम होता है कि मीडिया द्वारा बताई गई कमियों में सुधार करे जिससे समाज की बेहतरी के लिए कार्य हो सके। श्री मिश्रा ने सेन्ट्रल प्रेस क्लब के पदाधिकारियों एवं राजधानी के पत्रकारों द्वारा दिए गए सुझावों पर अमल करने की बात भी कही। उन्होंने बताया कि सिर्फ राजधानी के ही नहीं प्रदेश के सभी पत्रकारों के कल्याण के लिए योजनाओं पर अमल किया जाएगा। मिलन समारोह में राजधानी के वरिष्ठ पत्रकार और राष्ट्रीय एकता समिति के अध्यक्ष श्री महेश श्रीवास्तव, स्वदेश के प्रधान संपादक और वरिष्ठ पत्रकार, श्री राजेन्द्र शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार श्री एन.के. सिंह, वरिष्ठ पत्रकार श्री गिरीजाशंकर, राष्ट्रीय एकता समिति उपाध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार श्री ओमप्रकाश मेहता के अलावा सेन्ट्रल प्रेस क्लब के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अरुण कुमार दीक्षित, प्रदेश अध्यक्ष श्री गणेश साकल्ले, महासचिव श्री राजेश सिरोठिया, उपाध्यक्ष श्री सरमन नगेले, श्रीमती दीप्ति चौरसिया, श्री रवीन्द्र जैन, श्री वीरेन्द्र शर्मा, श्री अजय त्रिपाठी, श्री मनीष श्रीवास्‍तव, श्री धनंजय प्रताप सिंह, सचिव श्री अक्षत शर्मा, श्री भरत शास्‍त्री, श्री राजेश भाटिया, श्रीमती आरती शर्मा, श्री शिव हर्ष सुहालका, श्री इरशाद खान, कोषाध्‍यक्ष श्री केडी शर्मा समेत सभी वरिष्ठ पदाधिकारी एवं कार्यकारिणी के सदस्य उपस्थित थे। प्रारंभ में राष्ट्रीय हिन्दी मेल की ओर से सभी पत्रकारों एवं मुख्य अतिथि श्री एस.के. मिश्रा का स्वागत करते हुए प्रधान संपादक विजय कुमार दास ने कहा कि सेन्ट्रल प्रेस क्लब भोपाल में सन् 2003 से संचालित हो रहा है और यह एक मात्र ऐसी संस्था है जिसने पुरानी एवं नई पीढ़ी के पत्रकारों को एक साथ पत्रकारों के इस महत्वपूर्ण मंच पर लाने में सफलता हासिल की है। उन्होंने बताया कि 1973 से भोपाल में शुरू हुई पत्रकारिता के माध्यम से पत्रकार साथियों के बीच वे लगातार काम कर रहे हैं और जीवन के अंतिम क्षणों तक पत्रकार साथियों के लिए समर्पित रहेंगे। कार्यक्रम का संचालन करते हुए सेन्ट्रल प्रेस क्लब के महासचिव श्री राजेश सिरोठिया ने कहा कि राजधानी में सेन्ट्रल प्रेस क्लब की गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए सभी वरिष्ठ एवं युवा पत्रकारों का सहयोग उन्हें मिल रहा है। उन्होंने बताया कि सेन्ट्रल प्रेस क्लब के माध्यम से पत्रकार परिवारों का मिलन समारोह शीघ्र ही आयोजित होगा, ताकि पत्रकार परिवार भी एक-दूसरे को बेहतर तरीके से समझ सकें और परिवार के लोग भी यह जान सकें कि पत्रकारिता का मार्ग कितना कठिन और चुनौतीपूर्ण होता है।


aaदतिया में 25 राज्यों के क्रिकेटर आएंगे जनसम्पर्क मंत्री ने बैठक ली


16 December 2017

जनसंपर्क, जल संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने आज दतिया में 7 जनवरी से 14 जनवरी 2018 तक आयोजित होने वाली अखिल भारतीय क्रिकेट टूर्नामेंट (दतिया ट्राफी) के संबंध में बैठक में चर्चा की। मंत्री डॉ. मिश्र ने कहा कि बाहर से आने वाली क्रिकेट टीमों की ठहरने एवं खाने-पीने की बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। मंत्री डॉ. मिश्र ने कहा कि नगर पालिका अध्यक्ष को स्टेडियम के साथ ही व्यवस्था संबंधी अन्य तैयारी के लिए भरपूर मदद करें। बताया गया कि 25 प्रदेशों की टीमों से चर्चा कर आमंत्रित कर दिया है। जिसमें देश के प्रसिद्ध खिलाड़ी भी आने की संभावना है। टीमों में प्रसिद्ध नेशनल खिलाड़ी श्री अमित मिश्रा का भी आगमन हो रहा है। बैठक में भाजपा के जिलाध्यक्ष श्री विक्रम सिंह बुंदेला सहित अनेक जनप्रतिनिधि भी उपस्थित थे।
जनसंपर्क मंत्री डॉ. मिश्र ने किया दतिया में व्यापार मेले का भ्रमण
जनसंपर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने आज दतिया में व्‍यापार मेले में पहुँचकर भ्रमण किया। मंत्री डॉ. मिश्र ने मेले में विभिन्न प्रकार के झूलों का आनंद भी लिया। मंत्री डॉ. मिश्र ने नगर पालिका अध्यक्ष, उपाध्यक्ष को निर्देश भी दिए कि अगले वर्ष होने वाले व्यापार मेले में और अच्छी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें। जनसंपर्क मंत्री के साथ अनेक जनप्रतिनिधि ने भी मेले में भरपूर आनंद लिया।


सेन्ट्रल प्रेस क्लब के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विजय कुमार दास का जन्मदिन आज 65 वर्ष पूर्ण होने पर शुभचिंतकों ने दी बधाई और शुभकामनाएं
Our Correspondent :8 December 2017

भोपाल, 8 दिसंबर। मध्यप्रदेश और अविभाजित छत्तीसगढ़ राज्य के वरिष्ठ और ख्यात पत्रकार विजय कुमार दास का आज जन्म दिन है। उन्होंने 65 वर्ष पूर्ण कर 66 वर्ष में प्रवेश किया। इस अवसर पर प्रदेश और देश के धर्मगुरुओं, राजनेताओं, पत्रकारों और नौकरशाहों के साथ-साथ उद्योगजगत व समाजसेवियों एवं शहर के गणमान्य नागरिकों ने उन्हें बधाई व शुभकामनाएं दी हैं एवं उनके दिर्घायु व यशस्वी जीवन की कामना की है। श्री विजय कुमार दास 'राष्ट्रीय हिन्दी मेल' समाचार पत्र के संस्थापक एवं प्रधान संपादक है। श्री दास एक रॉयल फैमिली छत्तीसगढ़ राजनांदगांव मूल के हैं। विजय कुमार दास की पत्रकारिता की यात्रा 1973 से प्रारंभ हुई है। उन्होंने लगभग चार दशक से अधिक पत्रकारिता के क्षेत्र में न केवल नए मानदण्ड बनाएं हैं, बल्कि पत्रकारिता के पवित्र पेशे को प्रोत्साहित करने का भरपूर प्रयास किया है और अनवरत कर भी रहे हैं। श्री दास ने 2003 में मध्यप्रदेश की राजधानी से संचालित होने वाले 'सेन्ट्रल प्रेस क्लब' की स्थापना में प्रारंभ से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, वे उसके संस्थापक के साथ-साथ समन्वयक व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष है। सेन्ट्रल प्रेस की स्थापना के बाद से आपकी अगुवाई में अभी तक अनेक केन्द्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों के अलावा अनेक राजनेताओं की 'मीट द प्रेस' सफलता पूर्वक संपन्न हुई है। श्री विजय दास की विशेष पहल और प्रयास के चलते सेन्ट्रल प्रेस की टीम को लगभग 200 से अधिक भोपाल के पत्रकार, फोटो पत्रकार एवं विडियो जर्नलिस्ट को निजी आवास के लिए भूमि शिवराज सिंह चौहान सरकार ने आवंटित की है।


मुख्यमंत्री श्री चौहान से असम के पत्रकारों की भेंट
Our Correspondent :29 November 2017

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से आज यहाँ असम राज्य के पत्रकारों के दल ने सौजन्य भेंट की। यह दल राज्य के इतिहास, कला-संस्कृति, सुशासन के प्रयासों और विकास मंत्र को जानने के लिये प्रदेश के दौरे पर है। मुख्यमंत्री ने असम राज्य के जीवन मूल्यों और लोक संस्कृति की चर्चा करते हुये कहा कि असम की कला, संस्कृति, लोक जीवन और प्राकृतिक सौन्दर्य ने असम को भारत का विशिष्ट राज्य बनाया है। उन्होंने कहा कि असम और मध्यप्रदेश परस्पर एक-दूसरे से सीखकर अपने-अपने राज्यों में विकास के लिये नई पहल करेंगे। उन्होंने असम के नागरिकों को मध्यप्रदेश की ओर से शुभकामनाएँ दीं। पत्रकारों के दल ने मुख्यमंत्री को उनके कार्यकाल के 12 वर्ष पूर्ण होने पर बधाई एवं शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश और असम राज्य मिलकर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मंत्र 'सबका साथ-सबका विकास' पर आगे बढ़ेंगे और देश को आगे बढ़ायेंगे। पत्रकारों के दल ने असम के मुख्यमंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल की ओर से मुख्यमंत्री श्री चौहान को लिखे गये पत्र की प्रति भेंट की। श्री सोनोवाल ने पत्र में लिखा है कि श्री चौहान के नेतृत्व में मध्यप्रदेश विकास के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने श्री चौहान की तारीफ करते हुये कहा कि मध्यप्रदेश ने सभी वर्गों के लोगों को साथ लेकर विकास करने का नया मॉडल विकसित किया है। दल के सदस्यों ने राज्य की विकास प्रक्रियाओं की जानकारी ली। इस दौरे से दोनों राज्यों के बीच परस्पर विकास, सांस्कृतिक समझ और संबंध को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। असम के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के वरिष्ठ सूचना अधिकारी श्री जाहिद ए. तपादार ने असम के मुख्यमंत्री का पत्र पढ़कर सुनाया। असम के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के उप संचालक श्री प्रणजीत हजारीका ने दल की ओर से मुख्यमंत्री का स्वागत किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री चौहान का पारम्परिक परिधान पहनाकर स्वागत किया गया। इस मौके पर प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री श्री एस.के. मिश्रा एवं आयुक्त जनसम्पर्क श्री पी.नरहरि उपस्थित थे।


डिजिटल प्रेस क्लब का गठन:शिव हर्ष सुहालका बने अध्यक्ष: डिजिटल मीडिया का विकास और जन सरोकार होगा प्रमुख मुददा
Our Correspondent :23 November 2017

डिजिटल मीडिया से जुड़े महत्वपूर्ण पत्रकारों की बैठक में डिजिटल प्रेस क्लब का गठन किया गया. इसमें क्लब के पदाधिकारियों की नियुक्ति के साथ क्लब के भविष्य के कामकाज पर गंभीर चर्चा हुई. डिजिटल प्रेस क्लब के नवनियुक्त अध्यक्ष शिव हर्ष सुहालका ने क्लब के गठन के सम्बन्ध में जानकारी देते हुए बताया की डिजिटल मीडिया में काम कर रहे पत्रकारों के मुद्दों तथा डिजिटल मीडिया के समक्ष पैदा हो रही चुनौतियों के लिए क्लब की जरुरत काफी समय से महसूस की जा रही थी. साथ ही पत्रकारिता के इस दौर में मौजूद चुनौतियों से निपटने के लिए क्लब की महत्ता और बढ़ जाती है. उन्होंने कहा कि समाज के हर क्षेत्र में जारी क्षरण से पत्रकारिता भी प्रभावित हो रही है. ऐसे में पत्रकारीय सरोकारों को पत्रकारिता के एजेंडे में प्रमुखता से बनाये रखना आवश्यक है. सहालका ने कहा की डिजिटल प्रेस क्लब का गठन इन्हीं सवालों को लेकर किया गया है. क्लब की बैठक में शामिल पत्रकारों ने पत्रकारिता और क्लब के गठन से सम्बंधित मुद्दों पर चर्चा की. बैठक में सर्वसम्मत से क्लब के पदाधिकारी मंडल का भी गठन किया गया. इसमें शिव हर्ष सुहालका अध्यक्ष, डॉ नवीन आनंद जोशी और के के अग्निहोत्री उपाध्यक्ष, विनय द्विवेदी सचिव, कैलाश गुप्ता और आशीष महिर्षि सह सचिव तथा अनिल सिंह कोषाध्यक्ष बनाये गए हैं. बैठक में क्लब के भविष्य के कामों को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए.


मालवा श्रमजीवी पत्रकार संघ ने म. प्र. जनसंपर्क संचालनालय संचालक श्री अनिल माथुर को भेंट किया अभिनन्दन-पत्र
Our Correspondent :20 November 2017

भोपाल। मध्यप्रदेश जनसंपर्क संचालनालय के संचालक श्री अनिल माथुर से मालवा श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रतिनिधिमण्डल ने सौजन्य भेंट की व उनके द्वारा किए उत्कृष्ट कार्योंहेतु मालवा श्रमजीवी पत्रकार संघ ने स्मृति-चिन्ह भेंट किया । इस अवसर पर प्रदेश महासचिव एवं भोपाल-उज्जैन संभाग प्रभारी श्री दीपक जैन, जिला महासचिव श्री दीपेश ओझा, जिला उपाध्यक्ष श्री लखन गेहलोत, पं. श्री राजेश शर्मा, जिला संगठन सचिव श्री दिलीप शर्मा, जिला सहसचिव श्री विष्णु व्यास, पत्रकार श्री प्रियेश कोठारी मौजूद रहे। यह जानकारी सचिव संतोष तलोदिया ने दी


जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण पर राज्य-स्तरीय मीडिया कार्यशाला 22 नवम्बर को
Our Correspondent :27 October 2017

पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (एप्को) द्वारा 22 नवम्बर 2017 को 'जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण'' पर एक-दिवसीय राज्य-स्तरीय मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। एप्को ऑडिटोरियम भोपाल में होने वाली कार्यशाला में भोपाल, रीवा, ग्वालियर, सागर, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और शहडोल के मीडिया प्रतिनिधि भाग लेंगे। उक्त जिलों के जनसम्पर्क कार्यालयों से अपने-अपने जिले के विकासात्मक पर्यावरणीय और जलवायु परिवर्तन मुद्दों पर लिखने वाले 5-5 पत्रकारों को नामांकित कर निर्धारित प्रपत्र में जानकारी 16 नवम्बर 2017 तक ई-मेल ecoevents.epco@gmail.com पर भेजने को कहा गया है। कार्यपालन संचालक श्री अनुपम राजन ने बताया कि एप्को द्वारा जलवायु परिवर्तन के संबंध में हर जिले से निकलने वाले हिन्दी और अंग्रेजी के समाचार पत्र-पत्रिकाओं में लिखने वाले पत्रकारों के जमीनी स्तर के विचार, अनुभवों के आलेखों का संकलन कर एक मोनोग्राफ प्रकाशित किया जा रहा है। कार्यशाला इस प्रयोजन में सहायक सिद्ध होगी। जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण के बारे में जनता को जागरूक करने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। मीडिया जलवायु परिवर्तन से संबंधित विषयों पर सटीक कव्हरेज कर बड़े पैमाने पर सार्वजनिक भागीदारी बढ़ाने में सकारात्मक भूमिका निभाता है। कार्यशाला के माध्यम से मीडिया प्रतिनिधियों को जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण विषय पर गहराई से जानने और अपनी उत्सुकताओं के समाधान का मौका मिलेगा। कार्यशाला में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों के आने-जाने और ठहरने की व्यवस्था एप्को द्वारा की जाएगी।


पत्रकार पण्डित दीनदयाल जी ने दिया नया दर्शन
Our Correspondent :16 October 2017

दीनदयाल जी ने अपने राजनीतिक लेखों में एक नया वाद पैदा किया जिसे समन्वयवाद नाम दिया। राजनीतिक लिप्सा के आकांक्षी लोगों के लिए उन्होंने लिखा कि शिखर पर बैठने की इच्छा सबकी होती है मगर मंदिर के शिखर पर तो कौए भी बैठते हैं? हमें तो उस नींव का पत्थर बनने की आकांक्षा करनी चाहिए जो अपने कंधों पर मंदिर को भव्य स्वरूप देता है। उपाध्याय जी ने इसे खुद पर भी लागू किया। प्रसिद्ध विचारक दत्तोपंत ठेंगड़ी एक जगह लिखते हैं कि जनसंघ का अध्यक्ष बनने के लिए उन्हें दो बार आग्रह किया गया लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया। ---- हिन्दुस्तान की रत्नगर्भा धरा ने भारतीय पत्रकारिता में जिन महापुरूषों को जन्मा, उन्हीं में से एक पण्डित दीनदयाल उपाध्याय जी भी हैं। उनका पत्रकारीय-जीवन महज 20 साल रहा लेकिन अपने विचारों और लेखों से दुनिया को खासा प्रभावित किया। 1963 में जब दीनदयाल जी लन्दन गए और वहां पर विपक्ष के नेता के तौर पर जो उद्बोधन दिया, उस पर स्थानीय अखबार द गार्जियन ने लिखा कि यह वह शख्स है जिस पर भारत को विशेष ध्यान देना होगा। भविष्यवाणी तब सही साबित हुई जब पण्डित जी ने 1965 में दुनिया को एकात्म मानव-दर्शन दिया। इसके पहले विश्व, माक्र्सवाद और समाजवाद जैसे दर्शनों में अपना कल्याण देख रहा था। एक पत्रकार के तौर पर पण्डित जी का उद्भव सन् 1947 माना जाता है। उनके लिए धर्म और राष्ट्र से बड़ी मानवता थी इसलिए अपनी पत्रकारिता में भी इसे सर्वोपरि रखा। सृष्टि के प्रथम संचारक नारदजी हों या तिलक की लोकमान्य पत्रकारिता या जैसा गांधीजी ने 1888 में इंडियन ओपिनियन में कहा कि कोई भी धर्म या देश मनुष्यता से बड़ा नही हो सकता। इसी के समानांतर पण्डित उपाध्याय जी ने लोक कल्याण को ही पत्रकारिता का प्रमुख आधार माना। मशहूर पत्रकार थाम्पसन फ्रीडमैन के मुताबिक व्हाट वी पब्लिशड ऑर ब्राडकास्ट मे बी हर्टफुल, बट वी शुड बी अवेयर ऑफ द इम्पेक्ट ऑफ अवर वर्डस एण्ड इमेजेस ऑन द मिलियंस ऑफ लाइवस. पण्डित जी के पास खबरों का न्यायवादी दृष्टिकोण था। उनके लेखों, उपन्यासों व नियमित कॉलमों का अध्ययन करने पर हम पाते हैं कि उन्होंने निष्पक्ष आलोचना, उचित व सम्माजनक शब्दों का प्रयोग और सत्यपरक खबरों को ही मानवता के अनुकूल बताया। जुलाई 1953 में पांचजन्य ने वित्तीय बजट पर एक विशेषांक निकाला तो उन्होंने समीक्षा करते हुए लिखा कि पंचवर्षीय योजना को लेकर जिस तरह सरकार के केंद्रीय मंत्री की आलोचना हुई है, बाकी दलों को क्यों छोड़ दिया गया? उन्होंने सम्पादकीय में मूर्खतापूर्ण जैसे शब्द की जगह किसी अन्य शब्द का इस्तेमाल करने की सलाह दी। पं. दीनदयाल जी जब भी अखबार के दफतर आते तो न्यूज बनाने या शीर्षक कैसे लगाना इत्यादि पर सलाह-मशविरा करते। लखनऊ में जब संत फतेह सिंह किसी मुद्दे पर आमरण अनशन कर रहे थे तो पांचजन्य ने खबर का शीर्षक दिया : अकाल तख्त के काल.... मगर पण्डितजी ने इस शीर्षक को हटवाते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में कटुतापूर्ण शब्दों का प्रयोग नही होना चाहिए। आर्गनाइजर के पूर्व संपादक के.आर. मल्कानी के अनुसार, तीन दिनों से भी कम अवधि में जब हरियाणा, पश्चिम बंगाल तथा पंजाब की गैर-कांग्रेसी सरकारें गिरा दी गईं तो पांचजन्य ने एक व्यंगयचित्र छापा जिसमें तत्कालीन गृह मंत्री चव्हाण लोकतंत्र के बैल को काटते हुए दर्शाए गए थे। बहुतों को यह अतिवाद लगा। इस पर उपाध्याय जी की प्रतिक्रिया थी, चाहे व्यंगयचित्र में ही क्यों ना हो, गौ-हत्या का यह दृश्य मन को धक्का पहुंचाने वाला है। आज तो हम गाय काटते हुए वाीडियो देख रहे हैं। साफ है कि मानवता, पशुता के स्तर पर पहुंच गई है। राष्ट्रवादी पत्रकारिता पण्डितजी के विचारों में रची-बसी थी। इसका बेहतरीन उदाहरण देखते हैं कि तत्कालीन प्रधानमंत्री ने एक बार कहा कि अंग्रेज गए तो उन्होंने हमको बताया नही कि देश की सीमा क्या है? इसलिए कच्छ का यह हिस्सा हमारा था या नही, यह हमको पता नही। इस पर पण्डित जी ने बेबाकी से लिखा कि जिसको देश की सीमा ही मालूम नही, वह प्रधानमंत्री के दायित्वपूर्ण पद पर भला कैसे बने रह सकता है? उपाध्याय जी एक राजनीतिज्ञ थे इसलिए पत्रकारों या अखबारों की टीका-टिप्पणी को स्वच्छ आलोचना के तौर पर लेते थे। 1962 में एक अंग्रेजी अखबार ने पण्डित जी के भारत-पाक युद्ध पर लिखे लेख की कटु आलोचना की तो पण्डितजी ने उसका सहर्ष स्वागत किया। एक पत्रकार के रूप में हम गांधीजी को भी पाते हैं। 1942 में टाइम्स ऑफ इण्डिया की एक खबर पर महात्मा गांधी जी इस कदर नाराज हुए थे कि पूरा दिन उपवास कर बैठे थे! उपाध्याय जी ने अपने राजनीतिक लेखों में एक नया वाद पैदा किया जिसे समन्वयवाद नाम दिया। राजनीतिक लिप्सा के आकांक्षी लोगों के लिए उन्होंने लिखा कि शिखर पर बैठने की इच्छा सबकी होती है मगर मंदिर के शिखर पर तो कौए भी बैठते हैं? हमें तो उस नींव का पत्थर बनने की आकांक्षा करनी चाहिए जो अपने कंधों पर मंदिर को भव्य स्वरूप देता है। उपाध्याय जी ने इसे खुद पर भी लागू किया। प्रसिद्ध विचारक दत्तोपंत ठेंगड़ी एक जगह लिखते हैं कि जनसंघ का अध्यक्ष बनने के लिए उन्हें दो बार आग्रह किया गया लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया। पण्डित जी की राजनीतिक डायरी में प्रकाशित लेखों का अध्ययन करने पर मालूम चलता है और जो महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया, उसके मुताबिक उन्होंने देश की राजनीति को विकास का एम-7 मॉडल दिया। हवा-पानी-भाप-तेल-गैस-बिजली-आणविक शक्ति का न्यूनतम उपयोग करते हुए आवश्यकतानुरूप उत्पादन किया जाना चाहिए साथ ही शिल्पज्ञान को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। यह उनकी विकासवादी पत्रकारिता का प्रतीक है। स्पष्ट है कि एक पत्रकार के तौर पर पं. दीनदयाल जी की मानवतावादी दृष्टि, भारत के साथ-साथ विश्व के लिए भी मार्गदर्शीय और अनुकरणीय है। यही रास्ता पत्रकारिता का कल्याण और सर्वे भवन्तु सुखिन: के लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है।


मेधावी छात्रों का सम्मान समारोह
Our Correspondent :19 September 2017

भोपाल। खरगौन जिले के पत्रकार बंधुओं के मेधावी छात्र-छात्राओं जिन्होंने वर्ष 2017 में कक्षा 12वीं में 80 प्रतिशत अंक अर्जित किये। ऐसे मेधावी छात्र-छात्राओं को मध्यप्रदेश मीडिया संघ खरगौन द्वारा सम्मानित किया गया एवं खरगौन जिले के समाज सेवियों, पुलिस विभाग में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों का सम्मान किया गया। खरगौन के वल्लभा मैरिज गार्डन, आरती टाॅकिज, डायवर्सन रोड के हाॅल में आयोजित कार्यक्रम में भोपाल से पधारे चैरेवेति पत्रिका के प्रमुख संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार श्री जयकृष्ण गौड़, भगवानपुरा विधायक, समाजसेवी श्री जोशी जी एवं मध्यप्रदेश मीडिया संघ के प्रदेश अध्यक्ष जयवंत ठाकरे ने पुरस्कार वितरण किये। कार्यक्रम में पांच जिलों के पत्रकार बंधुआंे ने भाग लिया एवं उनके परिवारजन भी कार्यक्रम में शामिल हुए।


राजधानी में प्रारंभ होगा मीडिया उद्यमिता केन्द्र
Our Correspondent :11 September 2017

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के अंतर्गत राजधानी में एक मीडिया उद्यमिता केन्द्र की स्थापना की जाएगी। यह केन्द्र नीति आयोग की पहल के अनुरूप कार्य करेगा। मीडिया में उद्यमशीलता के प्रशिक्षण, मीडिया प्रबंधन और एक से अधिक माध्यमों में दक्षता के उद्देश्य से इस केन्द्र को महत्वपूर्ण माना गया है। जनसंपर्क मंत्री और विश्वविद्यालय की प्रबंध उप समिति के अध्यक्ष डॉ. नरोत्तम मिश्र की अध्यक्षता में आज मंत्रालय में प्रबंध उप समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में केन्द्र की उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा करते हुए केन्द्र प्रारंभ करने का अनुमोदन किया गया। बैठक में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला, कुलाधिसचिव श्री लाजपत आहूजा, संचालक जनसंपर्क श्री अनिल माथुर उपस्थित थे। बैठक में बताया गया कि देश में अपनी तरह के इस प्रथम केन्द्र में मीडिया के वर्तमान परिदृश्य के अनुसार प्रशिक्षण की व्यवस्था होगी। विश्वविद्यालय की विद्या परिषद द्वारा भी बीते माह इस केन्द्र को प्रारंभ करने का अनुमोदन दिया जा चुका है। केन्द्र के लिए विशेषज्ञों और सहयोगियों संस्थाओं के चुने जाने की कार्यवाही शीघ्र की जाएगी। आज की बैठक में सोशल मीडिया के क्षेत्र में गहन शोध की जरूरत को देखते हुए विश्वविद्यालय के अंतर्गत एक शोध केन्द्र स्थापित करने पर भी चर्चा हुई। बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश की प्रत्येक तहसील में विश्वविद्यालय से सम्बद्ध केन्द्र संचालित किया जाएगा, जो विभिन्न पाठ्यक्रम से विद्यार्थियों को जोड़ेगा। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देने के संबंध में भी निर्णय लिया गया। बैठक में विश्वविद्यालय के रीवा परिसर के निर्माण, नई अध्ययन संस्थाओं को विश्वविद्यालय से प्रदान की गई सम्बद्धता और अनुमोदन से संबंधित चर्चा हुई।


गौरी लंकेश ही नहीं, आवाज बुलंद करने के बदले इन 12 पत्रकारों ने भी गंवाई जान
Our Correspondent :6 September 2017

नई दिल्ली: वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की गोली मारकर हत्या के बाद एक बार फिर से व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. हमलावरों ने गौरी लंकेश के घर में घुसकर उन्हें गोली मार दी गई. पिछले कुछ साल पर नजर डालें तो कई मौकों पर पत्रकारों की हत्या कर दी गई. हमारे देश के संविधान में पत्रकारिता को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का दर्जा दिया गया है, लेकिन हाल के कुछ वारदातों पर नजर डालें तो ऐसा लगता है कि इस पेशे से जुड़े लोगों का जीवन खतरे में है. आइए हाल के उन 12 वारदातों पर नजर डालें जिसमें पत्रकार की हत्या कर दी गई.
1--13 मई 2016 को सीवान में हिंदी दैनिक हिन्दुस्तान के पत्रकार राजदेव रंजन की गोली मारकर हत्या कर दी गई. ऑफिस से लौट रहे राजदेव को नजदीक से गोली मारी गई थी. इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है.
2-- मई 2015 में मध्य प्रदेश में व्यापम घोटाले की कवरेज करने गए आजतक के विशेष संवाददाता अक्षय सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. अक्षय सिंह की झाबुआ के पास मेघनगर में मौत हुई. मौत के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है.
3-- जून 2015 में मध्य प्रदेश में बालाघाट जिले में अपहृत पत्रकार संदीप कोठारी को जिंदा जला दिया गया. महाराष्ट्र में वर्धा के करीब स्थित एक खेत में उनका शव पाया गया.
4-- साल 2015 में ही उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में पत्रकार जगेंद्र सिंह को जिंदा जला दिया गया. आरोप है कि जगेंद्र सिंह ने फेसबुक पर उत्तर प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री राममूर्ति वर्मा के खिलाफ खबरें लिखी थीं.
5-- साल 2013 में मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान नेटवर्क18 के पत्रकार राजेश वर्मा की गोली लगने से मौत हो गई.
6-- आंध्रप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार एमवीएन शंकर की 26 नवंबर 2014 को हत्या कर दी गई. एमवीएन आंध्र में तेल माफिया के खिलाफ लगातार खबरें लिख रहे थे.
7-- 27 मई 2014 को ओडिसा के स्थानीय टीवी चैनल के लिए स्ट्रिंगर तरुण कुमार की बड़ी बेरहमी से हत्या कर दी गई.
8-- हिंदी दैनिक देशबंधु के पत्रकार साई रेड्डी की छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में संदिग्ध हथियारबंद लोगों ने हत्या कर दी थी.
9-- महाराष्ट्र के पत्रकार और लेखक नरेंद्र दाभोलकर की 20 अगस्त 2013 को मंदिर के सामने उन्हें बदमाशों ने गोलियों से भून डाला.
10-- रीवा में मीडिया राज के रिपोर्टर राजेश मिश्रा की 1 मार्च 2012 को कुछ लोगों ने हत्या कर दी थी. राजेश का कसूर सिर्फ इतना था कि वो लोकल स्कूल में हो रही धांधली की कवरेज कर रहे थे.
11-- मिड डे के मशहूर क्राइम रिपोर्टर ज्योतिर्मय डे की 11 जून 2011 को हत्या कर दी गई. वे अंडरवर्ल्ड से जुड़ी कई जानकारी जानते थे.
12-- डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के खिलाख आवाज बुलंद करने वाले पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की सिरसा में हत्या कर दी गई. 21 नवंबर 2002 को उनके दफ्तर में घुसकर कुछ लोगों ने उनको गोलियों से भून डाला.


पत्रकार बीमा योजना का लाभ लेने 4 सितम्बर तक करें आवेदन
Our Correspondent :30 Aug, 2017

पत्रकार स्वास्थ्य एवं दुर्घटना समूह बीमा योजना का लाभ लेने के लिए पात्र पत्रकार 4 सितम्बर 2017 तक आवेदन कर सकते हैं। जिन पत्रकारों की बीमा पालिसी अगस्त माह में खत्म हो रही थी, उसे 30 सितम्बर तक के लिए बढ़ा दिया गया है। जिन पत्रकारों की पालिसी अक्टूबर माह तक है, उन्हें भी 4 सितम्बर 2017 आवेदन करना अनिवार्य है। अब पालिसी एक साथ एक अक्टूबर से संचालित की जायेगी। आवेदन-पत्र, प्रीमियम की तालिका और योजना की विस्तृत जानकारी जनसम्पर्क विभाग की वेबसाइट www.mpinfo.org पर उपलब्ध है। आवेदन सीधे जनसम्पर्क संचालनालय (अधिमान्यता शाखा) भोपाल भेजना है।


जन्म-दिवस (तीन अगस्त) पर विशेष
Our Correspondent :31 July 2017


व्यक्ति नहीं, व्यक्तित्व हैं राजेंद्र शुक्ल
राजेन्द्र शुक्ल... मध्यप्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य पर एक चमकदार नक्षत्र के रूप में उपस्थित यह नाम किसी व्यक्ति भर का नहीं है, बल्कि एक सम्पूर्ण व्यक्तित्व का हैं। व्यक्ति से लेकर व्यक्तित्व तक का उनका सफर ठीक वैसा है जो सोने का कुंदन में तब्दील होने का होता है। इस सच्चाई से भला कौन इंकार कर सकता है कि समय और समाज किसी व्यक्ति को नहीं एक व्यक्तित्व को ही याद रखता है। एक अमिट व्यक्तित्व के गुण-धर्म की चर्चा की जाये तो शिखर पर पहुँचकर भी विनम्र बने रहना सबसे बड़ा गुण है। एक शब्द में इसे कहा जाये तो विनम्रता। जहाँ तक राजेंद्र शुक्ल जी की बात हैं तो शायद उन्हें विनम्रता की प्रतिपूर्ति कहना कतई अतिशयोक्ति नहीं हैं। सरलता के गुण ने श्री शुक्ल को विशिष्ट बनाया। मेरे जनसंपर्क विभाग के एक सहयोगी अधिकारी और मित्र श्री मनोज खरे की दो लाइनें इस संदर्भ में याद आती हैं:- ।
जीत नहीं सकते तुम मुझको,क्योंकि कठिन नहीं, आसान बहुत हूँ।
नि:स्वार्थ सेवा, अथक परिश्रम, गहन समर्पण, अटूट निष्ठा, जरूरतमंदों की मदद के लिए सदैव तत्परता और लक्ष्य तक पहुँचाने के लिए अविराम यात्रा की ऊर्जा ने उन्हें भीड़ में अपनी पहचान दी है। पुन: उन्हीं मित्र की कविता की दो पंक्तियाँ याद आ रही हैं-
भीड़ में भीड़ बनकर रहे तो क्या रहे?भीड़ में अपनी निजी पहचान होनी चाहिए।
वे नवोन्मेषी हैं। उनके आंतरिक मन के अंतरिक्ष में विचार-पुंज सदा गतिशील रहते हैं। उनकी निरंतर कुछ नया और कुछ विशेष करने की ऊष्मा हर पल नये विचारों का प्रस्फुटन करती रहती है। लक्ष्य और चुनौतियों से जूझने की विकट जुझारू शक्ति है उनमें। सौंपे गये दायित्वों का कुशल संपादन और निर्वहन करने की क्षमता का आकलन कर विरोधी भी प्रशंसा किये बिना नहीं रहते हैं। वे अपना जीवन हर घड़ी संघर्षों के ताप में तपने देते हैं। वे काम के प्रति अपने आपको झोंक देते हैं। उन्हें पता है कि इन्हीं काँटों भरे रास्तों से गुजरकर ही मंजिल मिलेगी। असफलताएँ उन्हें नई ऊर्जा देती हैं। मुश्किलें उनके लिए अवसर बन जाती हैं। निराशा और हताशा उनके जीवन-कोष में है ही नहीं। वे जानते हैं कि जब जीवन की परीक्षाओं के घन एक बेडौल लोहे के टुकड़े पर निरंतर पड़ते हैं तो जल्दी ही वह टुकड़ा एक आकार ग्रहण कर लेता है जो जन उपयोगी होता है... समाज उपयोगी होता है... देश उपयोगी होता है। निश्चित रूप से व्यक्तित्व के निर्माण में भी ऐसा ही होता है या यूँ कहें कि यही व्यक्तित्व के निर्माण की प्रक्रिया भी है। श्री राजेन्द्र शुक्ल के व्यक्तित्व की उदारता, सहृदयता, संवेदनशीलता और सज्जनता के अद्भुत संयोजन में ऐसा व्यक्तित्व निर्मित हुआ हैं, जिसने सरल, सहज, उदार, स्नेही व्यक्तित्व की नई इबारत लिखी हैं। विशाल व्यक्तित्व के धनी का सशक्त पहलू व्यापक विचारधारा है। उनकी चिंतन क्षमता ने उनके व्यक्तित्व में व्यवहारिकता और अध्यात्मिकता का अनूठा संयोजन किया है। उनकी सफलताओं का आधार उनके करिश्‍माई व्यक्तित्व और करिश्‍माई सोच के चलते एक अलग पहचान बना रहा है। विचारों की व्यापकता का रूचि-नीति में भी परिलक्षित होती है। उनका यहीं सेवा-भाव जरूरतमंद की मदद करने में दिखता है। श्री शुक्ल में सेवा-संकल्प का समर्पित भाव, चुनौतियों की जिद और जूनून के साथ सामना करने का जज्बा उनके व्यक्तित्व के ऐसे पहलू है, जिन्होंने राजनीति को सेवा नीति में बदल दिया है। एक योगी की तरह हर आम-खास की बात, समस्या सुनना, मनन करना और जरूरतमंदों की सेवाभाव से मदद करना उनकी प्राथमिकता में रहता है। उनका यह ऐसा गुण है, जिसमें आम “जन” के “मन” से उनका एक गहरा और आत्मीयता पूर्ण रिश्ता बन जाता है। श्री राजेन्द्र शुक्ल को कभी अपनी छवि निर्माण के लिए प्रयास नहीं करने पड़े। उनकी सद्इच्छाओं ने उनकी छवि को इतना पुख्ता कर दिया है कि लाख कोशिशें उसे धुंधला कर पाने में अक्षम हैं। व्यक्तित्व का प्रभावी पहलू उनकी विशिष्ट संवाद क्षमता है। वे सीधे और सहज भाव से श्रोताओं के साथ सीधा सम्‍पर्क स्थापित कर उनकी समस्याओं का निदान करते हैं। सीधे संवाद की विशिष्ट क्षमता, विचारों की व्यापकता व्यवहार की सहजता, व्यक्तित्व की विशालता का अद्भुत संयोजन का ही नाम श्री राजेन्द्र शुक्ल हैं। श्री राजेन्द्र शुक्ल असाधारण व्यक्ति वाले आम आदमी है। वे दिखते साधारण है लेकिन उनका व्यक्तित्व असाधारण रूप से विशाल और प्रतिभा संपन्न हैं। मानवीय संवेदनाओं, अनुभूतियों से उदार गुणों से भरा दिल है जो हर पल पीड़ित मानवता की सेवा के लिए धड़कता है। वे कार्यों पर जितनी चौकस निगाह रखते हैं, उतनी उनको चिंता है कि दरवाजे पर आए गंभीर रोग से पीड़ित और हर दुखियारे की मदद कर उसका दु:ख-दर्द दूर किया जाए। सहजता, सरलता, सौम्यता, शुचिता के साथ ही तत्परता और त्वरित गति से जन-समस्याओं का निराकरण; ये वे गुण होते हैं जो राजनीति के क्षेत्र में काम करने वाले व्यक्ति को एक मुकाम तक पहुँचाते हैं। विन्ध्य की धरती पर जन्में श्री राजेन्द्र शुक्ल के जीवन और उनके व्यक्तित्व-कृतित्व में ऐसे ही गुणों का समावेश है, जो सार्वजनिक जीवन में और राजनीति में काम करने की विशेषताएँ होती हैं, राजनीति उनके लिए सेवा का भाव रही है।
ओहदा उनके लिए कभी पहचान नहीं बना
श्री शुक्ल ने अपने संस्कारवान पिता समाजसेवी स्व. श्री भैयालाल शुक्ल के गुणों को सदैव ध्यान में रखते हुए स्वयं को ढाला। ओहदा उनके लिए कभी पहचान नहीं बना, बल्कि श्री शुक्ल से ओहदा की पहचान बनी है। घीर-गंभीर ऋषि-मुनि मानव सेवा के लक्ष्य में एक तपस्वी की तरह लीन रहना उनका लक्ष्य है। उनकी सेवा भावना की तपस्या को कभी किसी पद का लालच भंग करने का साहसी ही नहीं जुटा पाया है। लोगों के जीवन में थोड़ी खुशियाँ ला सके और उनके दिलों में यह एहसास जगा सके कि उनका अपना है, अपने इस उद्देश्य में श्री राजेन्द्र शुक्ल पूरी तरह सफल हैं। रात-दिन विन्ध्य के विकास का सपना देखने वाले श्री राजेन्द्र शुक्ल ने अपनी जन्म-भूमि विन्ध्य के विकास के प्रति अपने दायित्व को बखूबी निभाया। उन्होंने विन्ध्य क्षेत्र के आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा पर्यटन विकास को अपनी प्राथमिकता में रखा है। अपने क्षेत्र के विकास के लिए उनके ड्रीम प्रोजेक्ट्स मुकुन्दपुर व्हाईट टाईगर सफारी, चाकघाट से इलाहाबाद और हनुमना से बनारस फोर-लेन का निर्माण, हवाई पट्टी अथवा गुड़ में विश्व का सबसे बड़े 750 मेगावाट सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना हो। श्री शुक्ल ने रीवा के चौतरफा विकास में विशेष रूचि ली है। इसी के चलते रीवा विकास शहर के रूप में उभरा है। रीवा सहित पूरे विन्ध्य को यातायात और संचार के साधन मिलने के लिए उन्होंने कायाकल्प करने का संकल्प लिया है। श्री शुक्ल ने अपने समाजसेवी पिता स्व. श्री भैयालाल शुक्ल की प्रेरणा से रीवा में स्थित लक्ष्मण बाग गौ-शाला को आदर्श गौशाला बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अपनी तमाम व्यस्तता के बाद भी श्री शुक्ल लक्ष्मण बाग गौ-शाला में जाकर गायों की सेवा कर अपने पिता स्व. श्री भैयालाल शुक्ल जी को सच्ची श्रद्धाजंलि अर्पित करते हैं। रीवा में तीन अगस्त 1964 को जन्में श्री राजेन्द्र शुक्ल ने युवा अवस्था में ही राजनीति के प्रति अपनी रूचि बता दी थी, जब वे वर्ष 1986 में रीवा इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए। व्यवसाय कृषि, तैराकी के शौकीन पहली बार वर्ष 2003 में विधानसभा के लिए चुने गए। उसके बाद उन्होंने निरंतर तीसरी बार अपनी विजय को बरकरार रखा। योग्य, कुशल प्रबंधन और प्रशासनिक क्षमता के धनी श्री शुक्ल को जब भी जो जिम्मेदारी सौंपी गई, उन्होंने प्रबंधन कौशल का बेहतर प्रदर्शन कर उसे परिणाममूलक बनाया। अपने बेहतर प्रबंधन से राजनेताओं के सामने श्री शुक्ल ने अपनी पहचान को नए-नए आयाम दिए। विवादों से दूर रहकर बिना शोरगुल के काम करते रहने की नीति पर वे चले। राजनीति को राष्ट्र हित में रखते हुए वे राष्ट्रवादी चिंतन के साथ अपने कदम को आगे बढ़ाना चाहते हैं। श्री शुक्ल को तीन कार्यकाल में मंत्रीमंडल में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली। वे मंत्री पद की कसौटी पर भी सदैव खरे उतरे। नेतृत्व के प्रति निष्ठा और राज्य सरकार के लक्ष्यों और कार्यक्रमों को पूरा करने की प्रतिबद्धता श्री शुक्ल की विशेषता हैं। ऊर्जा मंत्री के रूप में बिजली संकट से जूझते हुए मध्यप्रदेश को रोशन करने की उन्हें चुनौती मिली। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की मंशा के अनुरूप उन्होंने प्रदेश को बिजली संकट से उभारा। आज मध्यप्रदेश सरप्लस बिजली राज्य के रूप में खड़ा है। श्री शुक्ल ने जनसंपर्क मंत्री के रूप में भी एक अलग पहचान स्थापित की। पत्रकारों के हित में अनेक योजनाओं को अमली जामा पहनाया। मुख्यमंत्री श्री चौहान के विश्वास पर खरे उतरते हुए श्री शुक्ल वर्तमान में उद्योग तथा खनिज विभाग के दायित्व को बखूबी निभा रहे हैं। वे प्रदेश में औद्योगिक क्रांति का संकल्प लेकर राज्य में उद्योगों का जाल बिछाने का उन्होंने लक्ष्य तय किया हैं। खनिज आधारित उद्योगों की स्थापना तथा राजस्व वृद्धि करने में सफलता पायी है।


पेड न्यूज से संबंधित प्रकरणों पर हो त्वरित कार्यवाही
Our Correspondent :29 July 2017

पेड न्यूज से संबंधित प्रकरणों में रिटर्निंग आफिसर त्वरित कार्रवाई करें। कार्रवाई के बाद राज्य स्तरीय मीडिया सर्टिफिकेशन एण्ड मानीटरिंग कमेटी (एम.सी.एम.सी.) को भी जानकारी दें। राज्य स्तरीय एम.सी.एम.सी. की बैठक में पेड न्यूज से संबधित प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन के विषय में चर्चा हुई। बैठक में सदस्य श्री मोती सिंह ने कहा कि संबंधित नगरीय निकायों में प्रसारित एवं प्रकाशित खबरों पर नजर रखी जाये। सचिव राज्य निर्वाचन आयोग श्रीमती सुनीता त्रिपाठी ने कहा कि सभी रिटर्निंग आफिसर्स को इस संबंध में निर्देशित किया जा चुका है। उल्लेखनीय है कि अनुसूचित क्षेत्र की 14 नगरपालिका परिषद और 23 नगर परिषद में निर्वाचन होगा। अध्यक्ष पद का उप निर्वाचन 2 नगरपालिका परिषद और 2 नगर परिषद में होगा। अध्यक्ष को पद से वापस बुलाये जाने के लिये 2 नगरपालिका परिषद और एक नगर परिषद में निर्वाचन होगा। अनुसूचित क्षेत्र के नगरीय निकायों में खण्डवा जिले की नगर परिषद छनेरा, रतलाम जिले की नगर परिषद सैलाना, बैतूल जिले की नगरपालिका परिषद सारनी, नगर परिषद आठनेर एवं चिचोली, झाबुआ जिले की नगरपालिका परिषद झाबुआ, नगर परिषद रानापुर, थांदला, पेटलावद, अलीराजपुर जिले की नगरपालिका परिषद अलीराजपुर, नगर परिषद भाभरा, जोबट, खरगौन जिले की नगर परिषद भीकनगाँव, महेश्वर, मण्डलेश्वर, बुरहानपुर जिले की नगरपालिका परिषद नेपानगर, छिन्दवाड़ा जिले की नगरपालिका परिषद जुन्नारदेव, दमुआ, पांढुरना, सौंसर, नगर परिषद हर्रई, मोहगाँव, सिवनी जिले की नगर परिषद लखनादौन, मण्डला जिले की नगरपालिका परिषद मण्डला, नैनपुर, नगर परिषद निवास, बम्हनी बंजर, बिछिया, डिण्डोरी जिले की नगर परिषद डिण्डोरी, शहपुरा, बालाघाट जिले की नगर परिषद बैहर, शहडोल जिले की नगरपालिका परिषद शहडोल, नगर परिषद जयसिंह नगर, बुढ़ार, अनूपपुर जिले की नगरपालिका परिषद कोतमा, बिजुरी और उमरिया जिले की नगरपालिका परिषद पाली में निर्वाचन होगा। अध्यक्ष पद का उप निर्वाचन जिला खरगोन की नगरपालिका परिषद सनावद, ग्वालियर की नगरपालिका परिषद डबरा, सतना की नगर परिषद जैतवारा और मुरैना की नगर परिषद कैलारस में होगा। अध्यक्ष को पद से वापस बुलाने के लिये जिला नरसिंहपुर के नगरपालिका परिषद गाडरवारा, मुरैना जिले की नगरपालिका परिषद सबलगढ़ और विदिशा जिले की नगर परिषद शमशाबाद में निर्वाचन होगा। मतदान 11 अगस्त को और मतगणना 16 अगस्त को होगी। बैठक में उपसचिव राज्य निर्वाचन आयोग श्री गिरीश शर्मा, संयुक्त संचालक जनसंपर्क श्री आर.बी. त्रिपाठी, समिति के सदस्य श्री गिरीश उपाध्याय और श्री महावीर सिंह उपस्थित थे।


सुचरित्र युवा ही राष्ट्र निर्माण करेंगे - दीदी मंदाकिनी
Our Correspondent :28 July 2017

प्रसिद्ध कथावाचक और औजस्वी वक्ता दीदी मंदाकिनी ने युवाओं से आव्हान किया कि वे पाश्चात्य संस्कृति का अंधानुकरण न करें। पाश्चात्य संस्कृतिक की आंधी की परत जमा हो गई है, आवश्यकता इस बात की है कि हम अपनी अस्मिता को जागृत करें और उसे विकसित करें। सुचरित्र युवा और समाज ही राष्ट्र को शक्ति प्रदान करेंगे और राष्ट्र निर्माण करेंगे। रामचरितमानस मर्मज्ञ दीदी मंदाकिनी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित सत्रारंभ समारोह में द्वितीय दिवस ‘राष्ट्रनिर्माण में युवा’ विषय पर विद्यार्थियों को सम्बोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि राम राज्य में भौतिक दरिद्रता नहीं थी, रावण राज्य में भी नहीं थी, लेकिन वहां मानसिक दरिद्रता थी। युवाओं की वर्तमान स्थिति को लेकर उन्होंने कहा कि आज संस्कार, संस्कृति, ज्ञान सभी मौजूद हैं, लेकिन फिर भी युवाओं में भटकाव है। इस पर सबको मिलकर विचार करना चाहिए। उन्होंने आने वाले पत्रकारों से आव्हान किया कि वे कलम की शक्ति का सदुपयोग कर भारत को फिर से विश्व गुरु बनाएँ। सामाजिक व्यवस्था को लेकर उन्‍होंने कहा कि आज चहुँओर विकास हो रहा है। सड़कें, सेतु, विद्यालय, अस्पताल, तेज गति के वाहनों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन क्या यह वास्तव में विकास है। अस्‍पतालों की संख्या बढ़ने का अर्थ है कि रोग बढ़ रहे हैं। न्यायालयों की संख्या बढ़ रही है, इसका अर्थ है कि झगड़े बढ़ रहे हैं। तेज गति के वाहनों के कारण दूरियाँ कम हो रही हैं, लेकिन हृदयगत दूरी बढ़ रही है। रामचरितमानस के लक्ष्मण एवं सुपर्णखा के एक प्रसंग का वर्णन करते हुए दीदी मंदाकिनी ने कहा कि बढ़े हुए नाखून वासना का प्रतीक है। यह जब देह से आगे बढ़ जाये तो उसे काटना आवश्‍यक होता है, उसी प्रकार मनुष्य की वासना अमर्यादित हो जाये तो समाज में व्यक्ति के नाक-कान कट जाते हैं। प्रेम और वासना में अंतर है, पाश्चात्य संस्कृति के लोग इस बात को नहीं समझ पाते हैं। आज है विश्वास का संकट विद्यार्थियों को एक घटना का उदाहरण देते उन्होंने कहा कि आज मनुष्य को मनुष्य के ऊपर ही विश्वास नहीं रहा इसीलिए वह चैकीदारी के लिए वह कुत्ते पाल रहा है। प्रतिदिन मीडिया की खबरें देखकर, पीड़ा और दुख होता है। ऐसा लगता है कि सकारात्मक चिंतन समाप्त हो गया है । सफलता की होड़ यदि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के लिए हो तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन यह प्राणलेवा बन गई है। इसने आक्रामकता और टकराव का रूप ले लिया है। राजनीति ही नहीं कला, संगीत और खेल जगत में भी आक्रामकता देखने को मिलती है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने दीदी मंदाकिनी का शॉल-श्रीफल भेंट कर सम्मान किया। कार्यक्रम का संचालन पत्रकारिता विभाग की अध्यक्ष डॉ. राखी तिवारी ने किया।


समय, ईश्वर और स्वयंभू है- डॉ. अग्रवाल
Our Correspondent :28 July 2017

देश के राष्ट्रपति के पूर्व सचिव रहे डॉ. विजय अग्रवाल ने कहा कि समय, ईश्वर की तरह है और स्वयंभू है, जिसका निर्माण किसी ने नहीं किया। समय प्रबंधन कुछ भी नहीं है, स्वयं का प्रबंधन ही समय प्रबंधन होता है। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित सत्रारंभ समारोह के दूसरे दिन ‘समय प्रबंधन’ विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. अग्रवाल ने कहा कि अक्सर लोग समयबद्धता का पालन न करने के कारण दूसरों पर आरोप लगाकर बहाना बनाते हैं, जबकि वास्तव में कोई भी आपको आपके मन के विरूद्ध नहीं ले जा सकता और आपके समय में हस्तक्षेप कर सके। व्यक्ति ही समय प्रबंधन करने वाला मूल तत्व है। समय ईश्वर की तरह ही अदृश्य है। समय की कीमत को बताते हुए उन्होंने कहा कि समय का मापन नहीं किया जा सकता, यह एकमात्र एहसास है। समय ही जिंदगी में एकमात्र ऐसी अनमोल कीमती वस्तु है, जिसको ईश्वर ने सभी को समान रूप से दिया है। भगवान शिव ही हैं जो समय से परे हैं, इसीलिए उन्हें महाकाल कहा गया है। दुनिया में जितने भी महान लोग हुए हैं, उनके पास कुछ अतिरिक्त योग्यता नहीं थी, केवल उन्होंने समय का सही उपयोग करके खुद को महान बनाया। विद्यार्थियों को समय का सदुपयोग करने को लेकर उन्होंने कहा कि आप जिस समय जो काम करें उसी में ही तल्लीनता से लगें। इससे काम की गुणवत्ता में फर्क आयेगा। उन्होंने कहा कि समय आपकी पसंद या नापसंद के आधार पर मापा जाता है। जिस काम को आप पसंद करते हैं उसमें समय के बीतते का पता नहीं लगता। मन और समय के रिश्ते को समझना बहुत जरूरी है। ज्ञानयोग, कर्मयोग और भक्तियोग तीनों का मिश्रण ही समययोग का निर्माण करता है। इस सत्र में विश्वविद्यालय के कुलाधिसचिव श्री लाजपत आहूजा भी मंच पर मौजूद थे। सत्र का संचालन कम्प्यूटर विभाग के सह प्राध्यापक डॉ. मनीष माहेश्वरी ने किया।


पत्रकारिता के लिए संवेदनशील बने- श्री अंसारी
Our Correspondent :27 July 2017

माखनलाल चतुर्वेदी राष्‍ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में सत्रारंभ कार्यक्रम में शुभारम्‍भ के बाद तीन सत्र भी आयोजित हुए। ‘टीवी न्यूज़ का भविष्य’ विषय पर हुए सत्र को संबोधित करते हुए आज तक के न्यूज़ एंकर श्री सईद अंसारी ने कहा कि पत्रकारिता में संवेदनशील होना बहुत आवश्यक है। दूसरों के दर्द, तकलीफ को महसूस करने वाला व्यक्ति ही सफल और अच्छा पत्रकार होता है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य सिर्फ पेशा नहीं होना चाहिए,बल्कि मिशन होना चाहिए क्योंकि मिशन है तो ही मीडिया इंडस्ट्री में लम्बे समय तक टिका जा सकता है। पत्रकारिता के विद्यार्थियों को लेकर उन्होंने कहा की टीवी न्यूज़ में भविष्य उज्जवल है।आने वाले समय में विषय आधारित चैनल होंगे। स्कोप बढेगा लेकिन प्रतिस्पर्धा भी बढेगी, इसके लिए उन्हें तैयार होना चाहिए। आज टेलीविज़न न्यूज़ में भाषा और खबरों की समझ होने के साथ सृजनात्मकता होना भी आवश्यक है। एक टेलीविज़न न्यूज़ चैनल में लगभग 20 विभाग होते है जिनके लिए मानव संसाधन चाहिए। मीडिया में आने वाला समय विशेषज्ञता का होगा। विद्यार्थियों को प्रयास करना चाहिए कि इंटर्नशिप के दौरान ही वह अपनी नौकरी पक्की कर ले। टीवी न्यूज़ के भविष्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय स्तर पर शुरू हुए न्यूज़ चैनल के कारण पत्रकारों के लिए काफी अवसर उपलब्ध है। पत्रकारिता विभाग की अध्‍यक्ष डॉ राखी तिवारी ने सत्र का संचालन किया।
मनुष्‍य के मस्तिष्‍क का विस्‍तार है सिनेमा – श्री सेन
समारोह के तीसरे सत्र में फिल्‍म निदेशक श्री सुदीप्‍तो सेन ने फिल्‍म निर्माण में केरियर विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि फिल्‍म मनुष्‍य के मस्तिष्‍क और भावनाओं का विस्‍तार है, जो चीजें हम रोज महसूस करते हैं उसे सिनेमा आगे बढ़ाता है। उन्‍होंने कहा कि फिल्‍म निर्माण में केरियर के लिए हमें इस तरह से तैयार होना होता है कि फिल्‍म मैकिंग उद्योग हमें चुने। मशीन को चलाकर फिल्‍म का निर्माण नहीं किया जा सकता है। 122 वर्ष लम्‍बे इतिहास में सिनेमा पूरी तरह बदल गया है। दुनिया की नजरों में भारत बहुत बड़ा बाजार है। यह बात उन्‍होंने जब महसूस की, जब देश से अचानक लगातार कई सुंदरियां विश्‍व पटल पर उभर कर आईं और उन्‍हें मिस यूनिवर्स, मिस वर्ल्‍ड जैसे खिताब मिले। बाद में पता लगा कि एक सौंदर्य प्रसाधन की कंपनी का कारोबार 90 से लेकर 1900 करोड़ हो गया है। हॉलीवुड सिनेमा हमारे यहां की गरीबी-भुखमरी को दिखाकर करोड़ों रुपये कमा लेता है। इस सत्र का संचालन विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग के अध्‍यक्ष डॉ पवित्र श्रीवास्‍तव ने किया।‘विश्वविद्यालय एक परिचय’ पर आयोजित चतुर्थ सत्र में श्री संजय द्विवेदी ने विश्वविद्यालय का इतिहास और विकास, डॉ. पवित्र श्रीवास्‍तव ने प्रवेश अनुशासन और रैगिंग और डॉ. राखी तिवारी ने पारस्‍परिक सम्‍बन्‍ध, डॉ. राजेश पाठक ने परीक्षा विषय पर विद्यार्थियों को सम्‍बोधित किया।


नोबेल पुरस्कार विजेता श्री कैलाश सत्यार्थी ने किया युवाओं से आव्हान
Our Correspondent : 27 July 2017

‘भय मुक्त, सुरक्षित भारत बनाएँ’
शांतिदूत के रूप में पहचाने जाने वाले, नोबेल पुरस्कार से सम्‍मानित श्री कैलाश सत्यार्थी ने युवाओं से आव्हान किया कि वह भय मुक्त और सुरक्षित भारत के निर्माण के लिए आगे आएं। युवा समस्या नहीं, समाधान है। हमारी आज़ादी जब तक मुकम्मल नहीं है जब तक की हम बहन एवं बेटियों को सुरक्षित नहीं कर लेते। वेदों ने भी कहा है कि समाज के बेहतरी का विचार रखने वाले लोगो को एक साथ आना चाहिए। विश्वभर में भारत की छवि बदली है। अब हमे आशा भरी नज़रों से देखा जाने लगा है। यह विचार श्री सत्यार्थी ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के सत्रारंभ समारोह में व्‍यक्‍त किये। वे शुभारम्‍भ सत्र के मुख्‍य अतिथि थे। उन्‍होंने कहा कि हमारे मन में अन्‍याय, अत्‍याचार और गलत चीजों के खिलाफ गुस्‍सा होना चाहिए, क्‍योंकि वह एक ता‍कत है और परिवर्तनकारक होगा। दुनियाभर में नौजवानों, महिलाओं और बच्‍चों का हिंसा में उपयोग किये जाने को लेकर उन्‍होंने चिंता जताई और सवाल किया कि भारत जैसे देश में बच्‍चे कब सुरक्षित होंगे। हर घंटे, दो बच्‍चे यौन शोषण का शिकार हो रहे हैं। उन्‍होंने युवाओं से आव्हान किया कि वे परिवर्तन के लिए आगे आएं। जो लोग बाहर से सिर्फ आलोचना करते हैं वे इतिहास नहीं लिखते। इतिहास वो बनाते हैं जो हार या जीत की परवाह करे बगैर मैदान में उतर जाते हैं। दुनियाभर में बच्‍चों के शोषण को लेकर उन्‍होंने कहा कि यह तर्क पूर्णत: असत्‍य है कि गरीबी के कारण बच्‍चे पुस्‍तकों-स्‍कूलों से दूर हैं। यदि विश्‍वभर का एक सप्‍ताह के सेना का खर्च कम कर दिया जाए तो या फिर यूरोप में लिपिस्टिक-पाउडर पर खर्च होने वाला छठवां हिस्‍सा बचा लिया जाए या अमेरिका में तंबाखू पर होने वाले खर्च का पांचवा हिस्‍सा बचा लिया जाए तो दुनियाभर के सारे बच्‍चों को स्‍कूल में पढ़ाया जा सकता है। सभी बच्‍चों को प्राथमिक स्‍कूल भेजने पर मात्र 22 बिलियन डॉलर ही खर्च हो रहे हैं, जबकि सेना पर दो ट्रिलियन डॉलर प्रतिवर्ष खर्च होते हैं।
आम आदमी की ताकत से बदला संविधान
समारोह में श्री सत्‍यार्थी ने भारत में शिक्षा के अधिकार के कानून को लेकर किये गये उनके प्रयास का उल्‍लेख किया। उन्‍होंने कहा कि बालश्रम से मुक्‍त हुये बच्‍चों को स्‍कूल में दाखिला दिलाने के दौरान उन्‍हें अनुभव हुआ कि बच्‍चों की शिक्षा को लेकर कानून बनना चाहिए। लेकिन इसके लिए संविधान में संशोधन आवश्‍यक होगा। इस बारे में उन्‍होंने तत्‍कालीन प्रधानमंत्री श्री अटलबिहारी वाजपेयी से भी चर्चा की। इसके बाद उन्‍होंने कन्‍याकुमारी से यात्रा निकाली और इस यात्रा में 163 सांसद अलग-अलग स्‍थानों पर शामिल हुए। दिल्‍ली में यात्रा की समाप्ति पर प्रधानमंत्री, राष्‍ट्रपति बच्‍चों से भी मिले। यह एक आम आदमी की ताकत है कि चार महीने में भारत का संविधान बदला और शिक्षा का अधिकार कानून बना। आज इससे करोड़ों बच्‍चे लाभान्वित हो रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि हमारा देश लगातार आगे बढ़ रहा है। दुनियाभर में भारत की छवि बदली है। कई ऐसे देश हैं जो आज भारतीयों से प्रतिस्‍पर्धा के कारण चिढ़ते हैं और कुछ वीजा बंद करने की मांग कर रहे है, ऐसे भी देश हैं जहां भारतीय उनकी दौलत की बुनियाद बन चुके हैं।

नोबेल पुरस्‍कार के बाद चालीस हजार आमंत्रण मिले
विश्‍वभर में बालश्रम के विरुद्ध आंदोलन के नेतृत्वकर्ता श्री सत्‍यार्थी ने कहा कि वर्ष 2014 नोबेल पुरस्‍कार मिलने के बाद उन्‍हें विश्‍वभर से कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निमंत्रण प्राप्‍त हुए। उन्‍हें लगभग अभी तक 40 हजार आमंत्रण प्राप्‍त हुए। उनकी टीम ने इसका अध्‍ययन किया और पाया कि यदि वे इन सब कार्यक्रमों में भाग लेंगे तो उन्‍हें 175 वर्ष लगेंगे।
शिक्षा खुद को जानने की शुरुआत
श्री सत्‍यार्थी ने एक कहानी के माध्‍यम से विद्यार्थियों को बताया कि शिक्षा खुद को जानने की शुरुआत है, सही मायने में सीखने के लिए हमें अहंकार को छोड़ना होगा। उन्‍होंने मीडिया के विद्यार्थियों को कहा कि जिस पाठ्यक्रम को उन्‍होंने चुना है वह इस प्रकार का यज्ञ है जिसमें गुणात्‍मकता होगी। कलम की ताकत बहुत बड़ी होती है और लिखे और पढ़े गये शब्‍द कभी समाप्‍त नहीं होते। वे एक ईको सिस्‍टम का निर्माण करते हैं। हमारे यहां शब्‍द को आकाश भी कहा गया है। वर्तमान में टेलीविजन के टीआरपी ट्रैण्‍ड को लेकर उन्‍होंने कहा न्‍यूज चैनल में टीआरपी सैक्‍स स्‍कैण्‍डल, पॉलिटिकल स्‍कैण्‍डल और व्‍यक्तियों के आसपास ही है। टीवी मीडिया वंचित वर्ग और महिलाओं, बच्‍चों को कवर नहीं करता। जो विज्ञापन दिला सके वही कंटेंट टीवी पर नजर आता है। इस कारण समाज का एक बड़ा हिस्‍सा हमेशा पीछे छूट जाता है। उन्‍होंने कहा कि मीडिया को मुद्दों के फॉलोअप पर भी काम करना चाहिए। क्‍योंकि इसमें चेहरों के पीछे जिंदगियां होती है और काला-सफेद सत्‍य होता है।

बच्‍चों के चेहरों पर ईश्‍वर को देखा
श्री सत्‍यार्थी ने विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा किए। उन्‍होंने बताया कि किस तरह ‘संघर्ष जारी रहेगा’ पत्रिका शुरू करने के बाद पंजाब की एक घटना ने उनका जीवन बदल दिया। बंधुआ मजदूरों को पंजाब के गांव से छुड़ाने के दौरान उनकी पिटाई भी हुई। वे एक मजदूर के अनुरोध पर उसकी बेटी साबो को उन लोगों से छुड़ाने के लिए गये थे, जिसको मजदूर के मालिकों ने वेश्यावृत्ति के लिए बेच दिया था। इस मामले में उन्‍होंने दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय में बंदी प्रत्‍यक्षीकरण याचिका भी लगाई। बाद में 36 लोग न्‍यायालय के आदेश से मुक्‍त किये गये। दिल्‍ली में जब वे आये तो उन्‍होंने आजाद हुए बच्‍चों के चेहरों पर ईश्‍वर को देखा। कार्यक्रम की अध्‍यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.बृज किशोर कुठियाला ने कहा कि विद्यार्थियों को संकल्‍प लेना चाहिए कि वे केरियर के अलावा अपने देश और समाज के लिए क्‍या योगदान कर सकते हैं। नवागत विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उन्‍होंने कहा कि सत्रारंभ कार्यक्रम में समाज के प्रमुख व्‍यक्तियों को इसलिए आमंत्रित किया जाता है ताकि विद्यार्थी अपने केरियर के अतिरिक्‍त कुछ और ज्ञान भी प्राप्‍त कर सके, जो, उन्‍हें अपने जीवन में काम आए। कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम के संयोजक एवं जनसंचार विभाग के अध्‍यक्ष श्री संजय द्विवेदी ने किया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. कुठियाला ने श्री सत्‍यार्थी का शॉल-श्रीफल भेंटकर सम्‍मान भी किया। मंच पर पूर्व राष्‍ट्रपति ए.पी.जे. अब्‍दुल कलाम को श्रद्धा-सुमन भी अर्पित किए गए। प्रारम्‍भ में विद्यार्थियों ने सरस्‍वती वंदना प्रस्‍तुत की। कार्यक्रम में ‘अतुल्‍य भारतम’ और ‘मीडिया नवचिंतन’ पत्रिका के नये अंक का विमोचन भी किया गया। फोटो कैप्‍शन - फोटो नंबर – 8259 – नोबल पुरस्‍कार से सम्‍मानित श्री कैलाश सत्‍यार्थी विद्यार्थियों के साथ सेल्‍फी लेने से खुद को रोक नहीं पाए।


जनसंपर्क मंत्री डॉ. मिश्र हिन्दी पत्रकारिता दिवस समारोह में शामिल हुए
Our Correspondent :30 May 2017
जनसंपर्क, जल-संसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने आज हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर माधवराव सप्रे स्मृति समाचार-पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान में अलंकरण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि हिस्सा लिया। मंत्री डॉ. मिश्र ने समारोह में पत्रकार श्री विजय मनोहर तिवारी को माधवराव सप्रे पुरस्कार और कला समीक्षक श्री विनय उपाध्याय को महेश सृजन सम्मान से सम्मानित किया। अध्यक्षता प्रधान आयकर निदेशक मध्यप्रदेश डॉ. राकेश कुमार पालीवाल ने की। जनसंपर्क मंत्री डॉ. मिश्र ने कहा कि संग्रहालय के कार्यक्रम सार्थक और उत्साहवर्धक होते हैं। सम्मानित हुए पत्रकार और लेखक अपने क्षेत्र में समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं। डॉ. मिश्र ने श्री तिवारी और श्री उपाध्याय को बधाई दी। संग्रहालय के संस्थापक-संयोजक श्री विजयदत्त श्रीधर ने डॉ. नरोत्तम मिश्र का पुष्प-गुच्छ और शाल से स्वागत किया। श्री राकेश पाठक ने संग्रहालय की गतिविधियों की जानकारी दी। श्री राकेश दीक्षित ने आभार माना। इस अवसर पर राजधानी के वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, पत्रकारिता के शोधार्थी उपस्थित थे।


नरेन्द्र मोदी भारत के लिए ईश्वरीय वरदान तीन साल में भारत की छवि विश्व शिखर पर- शिवराज सिंह चौहान

Our Correspondent :25 May 2017
भोपाल। भारतीय जनता पार्टी प्रदेश मीडिया की एक दिवसीय प्रादेशिक कार्यशाला का उद्घाटन आज प्रदेश कार्यालय पं. दीनदयाल परिसर में मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने दीप प्रज्जवलित कर किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आजादी के बाद देश को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के रूप में क्रांतिकारी, दूरदृष्टा, निर्णय लेने वाला नेतृत्व मिला है। श्री नरेन्द्र मोदी का तीन वर्ष का कार्यकाल बेमिसाल रहा है। गांव, गरीब, किसान, मजदूर, आम आदमी को अपनी सरकार होने की सुखद अनुभूति तो हुई है, वहीं श्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक नेता के रूप में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश की सम्मानजनक पहचान बनाई है। उन्होनें श्री नरेन्द्र मोदी को देश के लिए ईश्वरीय वरदान बताते हुए उनके कृतित्व और व्यक्तित्व की भूरि-भूरि सराहना की। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चैहान ने कार्यशाला में उपस्थित मीडिया प्रभारियों और प्रवक्ताओं से कहा कि श्री नरेन्द्र मोदी के उल्लेखनीय परफार्मेंस की छवि जन-जन के मानस पटल पर अंकित करने के कार्य में जुट जायें। 26 मई से 15 जून तक आयोजित ‘मोदी फेस्ट’ अभियान में जन-जन को केन्द्र सरकार की तीन वर्ष की उपलब्धियों से दृश्य-श्रव्य सभी संचार माध्यमों से रूबरू करायें। मुख्यमंत्री श्री चौहान का प्रदेश मीडिया प्रभारी श्री लोकेन्द्र पाराशर ने फूल-मालाओं से स्वागत किया। प्रदेश उपाध्यक्ष श्री विजेश लूनावत का प्रदेश सह मीडिया प्रभारी श्री संजय गोविन्द खोचे ने स्वागत किया। कार्यशाला का संचालन प्रदेश सह मीडिया प्रभारी श्री सर्वेश तिवारी ने किया। आभार प्रदर्शन प्रदेश प्रवक्ता सुश्री राजो मालवीय ने आभार व्यक्त किया। श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के तीन वर्षों के कार्यकाल को स्वर्ण युग बताते हुए कहा कि तीन वर्षों के नेतृत्व में श्री नरेन्द्र मोदी को समाजशास्त्रियों, विश्लेषकों ने युग-पुरूष, राष्ट्र ऋषि के रूप में संबोधित किया है और विश्व के सर्वमान्य नेताओं में अग्रणी बताया है। उन्होंने कहा कि एनडीए प्रथम अटलजी के नेतृत्व देश की विकास दर आठ प्रतिशत पहुंची थी, महंगाई सिमट गयी थी। यूपीए के दौर में डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में पिछले 10 वर्षो में विकास दर 4 प्रतिशत पर सिमट गयी और महंगाई ने पंख पसारे। नीतिगत अस्त व्यस्तता से श्री नरेन्द्र मोदी को सामना करना पड़ा लेकिन उनके अथक प्रयासों, शीघ्र निर्णयात्मक पहल से देश की विकास दर लगभग 8 प्रतिशत पहुँच रही है और महंगाई का दंश टूट गया है। भारत की दुनिया में नई पहचान बनी है। उन्होंने बताया कि मोदी फेस्ट के प्रारंभिक दिन 26 मई को सेतु के उदघाटन के साथ तीन वर्षो की उपलब्धियों का जश्न मनाया जायेगा। प्रदेश की जनता के नाम संबोधन सभी नगरीय निकायों के मुख्यालयों पर सुना जायेगा। इसी तरह 31 को प्रदेश की जनता के नाम मुख्यमंत्री का संबोधन 23040 ग्राम पंचायतों में सुना जायेगा। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ग्राम पंचायत से केन्द्र तक सत्ता में है। पार्टी प्रवक्ताओं, मीडिया प्रभारियों पर गंभीर दायित्व है। वे इस अभियान को गंभीर दायित्व के रूप में पूरा करें। जनता और संचार माध्यम सकारात्मक भाव से सूचना सज्जित होकर गंतव्य तक पहंुचे और पार्टी तथा राज्य एवं केन्द्र सरकार की सकारात्मक छवि का सृजन कर यश के भागीदार बनें। उत्खनन नीति की धुरी मेहनतकश होंगे श्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा कि नर्मदा सेवा यात्रा में नदी संरक्षण के अनुरूप सकारात्मक वातावरण बना है। हरे भरे मध्यप्रदेश की कल्पना साकार हुई है। प्रकृति और नदियों के संरक्षण के अनुरूप वातावरण बना है। खण्डवा के मीडिया प्रभारी श्री सुनील जैन और सिराजुद्दीन परफेक्ट छायाकार ने सिंहस्थ का चित्र भेंट किया। सभी ने छायाचित्र की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

राष्ट्रवाद, विकास, सुशासन, अंत्योदय भाजपा का विचार- श्री विजेश लुणावत


दूसरे सत्र में पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री विजेश लुणावत ने संबोधित करते हुए कहा कि 26 मई से देशव्यापी मोदी फेस्ट का 21 दिवसीय अभियान आरंभ होगा, इसमें आपकी महत्वपूर्ण भागीदारी होगी। जन-जन तक प्रचार माध्यमों से श्री नरेन्द्र मोदी के ‘‘सबका साथ सबका विकास’’ तुष्टीकरण किसी का नहीं, सभी को न्याय सभी को समान अवसर का संदेश संप्रेषित करें। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता आधारित राजनैतिक दल है। देश में पार्टी के 12 करोड़ कार्यकर्ता है। मध्यप्रदेश में कार्यकर्ताओं की शक्ति अंक बल एक करोड़ है। यही पार्टी संगठन की असली शक्ति है जिसने केन्द्र में सत्तासीन किया और प्रदेश में 13 वर्षो से भाजपा विकास और सुशासन के लिए समर्पित है। पार्टी का लक्ष्य अंत्योदय है और गांव, गरीब, किसान, मजदूर, आम आदमी पार्टी और सरकार की रचनात्मक जनहितैषी गतिविधियों की धुरी है। उन्होंने कहा कि पार्टी का विस्तार जिला, मंडल, मतदान केन्द्र, नगर ग्राम केन्द्र तक हुआ है। मतदान केन्द्र सशक्त हुए है। इन्हें आने वाली चुनौतियों के लिए सजग, तत्पर और सज्जित करना है। चुनाव की रणभूमि में विजय स्थल हमारा मतदान केन्द्र है जिसकी सुदृढ़ बनावट और सशक्तिकरण पर हमारी रणनीति निर्भर होती है। वर्ष भर में 6 कार्यक्रमों का आयोजन हमें संगठनात्मक रूप से सशक्तिकरण का मार्ग सुझाता है। श्री विजेश लुणावत ने कहा कि 1980 में भारतीय जनता पार्टी के गठन के दौरान मुंबई अधिवेशन में पार्टी का ताज ग्रहण करते हुए श्री अटलबिहारी वाजपेयी ने अंधेरा छटने, सूर्य की किरणे विकीर्ण होने की भविष्यवाणी की थी। 16 मई 2014 को लोकसभा चुनाव में पार्टी को जनादेश मिलने और 26 मई को भारत में प्रचंड बहुमत वाली श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार के गठन के साथ वह भविष्यवाणी फलित हुई है। इसी सफलता के बाद मोदी सरकार सफलता के तीन वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में देशव्यापी मोदी फेस्ट का आयोजन किया जा रहा है। केन्द्र की उपलब्धियां जन-जन तक पहुँचाने में जुट जायें, मोदी सरकार की उपलब्धियां हमारी धरोहार है। तीसरे सत्र में आईटी विभाग के प्रदेश संयोजक श्री शिवराज डाबी ने प्रजेन्टेशन दिया और कहा कि इलेक्ट्रानिक मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण हो गयी है। यह संचार का प्रभावी माध्यम है। सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने के लिए आईटी की शक्ति को अंगीकार करें। मीडिया संपर्क प्रमुख डॉ. अनिल सौमित्र ने कहा कि मोदी सरकार 26 मई को तीन वर्ष पूरे कर रही है। केन्द्र सरकार की तीन वर्षो की उपलब्धियों को जन जन तक पहंुचाने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करें। उन्होंने कहा कि आर्थिक, सामाजिक एवं विभिन्न मुद्दों पर मोदी सरकार ने ऐतिहासिक उपलब्धियां अर्जित की है।

अपनी उपयोगिता सिद्ध करें मीडिया प्रभारी - लोकेन्द्र पाराशर


समापन सत्र को संबोधित करते हुए पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी श्री लोकेन्द्र पाराशर ने कहा कि आमतौर पर सभी राजनैतिक दल एक जैसे दिखते है लेकिन भारतीय जनता पार्टी एकमात्र ऐसा राजनैतिक दल है जो अन्य दलों से भिन्न है। हमारे पास आत्मशुद्धि से परिपूर्ण नेताओं की विशाल श्रृंखला है। हमारे यहां नेतृत्व के प्रति अटूट श्रद्धा है और यही हमारे दल की पूंजी है। उन्होंने कहा कि हम राजनीति के क्षेत्र में बौद्धिक कार्य करने के लिए निकले है। समसामयिक मुद्दों और सामूहिक विषयों पर हमारी पकड़ होनी चाहिए। हमें अपनी उपयोगिता सिद्ध करनी है। उन्होंने कहा कि हम संवेदनशील सरकार और संगठन के कार्यकर्ता है। संवाद, संपर्क और समन्वय के साथ हम कार्य करें। श्री पाराशर ने दिल्ली में संपन्न हुई राष्ट्रीय मीडिया कार्यशाला के विषयों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला में प्रदेश प्रवक्ता श्री राहुल कोठारी, सुश्री राजो मालवीय, श्री हिदायतुल्ला शेख, श्री उमेश शर्मा, श्री रजनीश अग्रवाल, श्री राजपालसिंह सिसौदिया, मीडिया संपर्क प्रमुख डॉ. अनिल सौमित्र सहित संभागीय मीडिया प्रभारी, जिला मीडिया प्रभारी एवं जिला सह मीडिया प्रभारी उपस्थित थे।


सकारात्मकता और नकारात्मकता के बीच खड़ा है सोशल मीडिया

Our Correspondent :22 May 2017
भोपाल, 20 मई। सोशल मीडिया के कारण यह एक पुनर्जागरण का समय है। हमें इससे जुडऩा पड़ेगा। सोशल मीडिया ऐसा माध्यम है, जिसका सदुपयोग भी किया जा सकता है और दुरुपयोग भी। आज सोशल मीडिया नकारात्मकता और सकारात्मकता के बीच खड़ा है। आवश्यकता है कि हम इन दोनों के बीच अपने विवेक को खड़ा करें। यह विचार वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. पुरुषोत्तम दुबे ने 'सोशल मीडिया : आज का यथार्थ और भविष्य की आहटें' विषय पर आयोजित संविमर्श में व्यक्त किए। संविमर्श का आयोजन माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय और श्री मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति, इंदौर के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. पुरुषोत्तम दुबे ने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से हम अपने विचारों को अभिव्यक्त कर सकते हैं। उन्हें पुष्ट और दृढ़ कर सकते हैं। अपनी कलाओं को व्यक्त कर अपनी प्रतिभा से सबको परिचित करा सकते हैं। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत आक्षेप लगाना उचित नहीं है। हमें अपने विचार प्रकट करते समय अपशब्द और अमर्यादित भाषा का उपयोग नहीं करना चाहिए। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया का उपयोग आगे बढऩे के लिए किया जाना चाहिए। युवाओं के लिए बेहतर विकल्प : मुख्य अतिथि एवं वरिष्ठ खेल पत्रकार प्रो. सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी ने बताया कि आज युवा लेखकों के लिए समाचार पत्र एवं पत्रिकाओं में रचनात्मक लेखन के लिए स्थान नहीं है। ऐसे में युवाओं के सामने सोशल मीडिया बेहतर विकल्प की तरह आया है। प्रो. चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया के खतरों के प्रति ध्यान दिलाते हुए कहा कि युवाओं को इंटरनेट पर बहुत अधिक आश्रित नहीं रहना चाहिए। गूगल पर जानकारी तो मिल सकती है, लेकिन ज्ञान नहीं। गूगल ने हमें आलसी बना दिया है। अच्छा लिखने के लिए गूगल की जगह, किताबों को स्रोत बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के कारण हमें लिखने की जो आजादी मिली है, उसके खतरे भी हैं। लिखने की आजादी की भी एक सीमा तय होनी चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि लिखते समय हम स्वविवेक और आत्मसंयम का ध्यान रखें। 2040 तक सब डिजिटल : विश्वविद्यालय के नवीन मीडिया तकनीकी विभाग की अध्यक्ष डॉ. पी. शशिकला ने कहा कि भारत में इंटरनेट का उपयोग करने वाले लोगों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। इंटरनेट क्रांति के कारण दुनिया में भी तेजी से बदलाव आ रहा है। वर्ष 1990 में जब कुछ ही कम्प्युटर इंटरनेट के माध्यम से आपस में जुड़े थे, आज करोड़ों कम्प्युटर वर्ल्ड वाइड वेब के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2040 में कम्प्युटर और मोबाइल ही नहीं, बल्कि हमारा घर, कार और दूसरे अन्य गैजेट भी आपस में जुड़े होंगे। डॉ. शशिकला ने बताया कि लगभग 3000 साल पहले एक तमिल कवि ने अपनी कविता में कहा था कि हम सब एक ही दुनिया के नागरिक हैं और आपस में एक-दूसरे से जुड़े हैं। आज का सोशल मीडिया इसी अवधारणा पर आधारित है। आपस में प्रवृत्ति का विस्तार है सोशल मीडिया : कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि प्रकृति का नियम है परिवर्तन और मनुष्य की प्रवृत्ति है कि वह इस परिवर्तन को स्वीकार करता है और उसे नकारता भी है। भगवान ने जब मनुष्य को बनाया, तब उन्होंने उसे मस्तिष्क भी दिया। मनुष्य ने विचार किया कि उसे जो अंग दिए गए हैं,, उसकी सीमाएं हैं। अपने अंगों की कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिए ही मनुष्य ने अपने मस्तिष्का उपयोग करते हुए पहिया, औजार, मशीन, कैमरा, माइक, स्पीकर और कम्प्युटर आदि का आविष्कार किया। उन्होंने बताया कि आपस में बात करने की प्रवृत्ति का विस्तार ही सोशल मीडिया है। सोशम मीडिया में जो संवाद है, उसका स्वरूप वैसा ही है, जैसा हमारे आम जीवन और साहित्य में है। यह समाज को तय करना चाहिए कि सोशल मीडिया में किस प्रकार के संवाद को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और उसकी सीमाएं क्या होनी चाहिए। उद्बोधन से पूर्व कार्यक्रम में श्री मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति, इंदौर की ओर से प्रतिवर्ष प्रकाशित किए जाने वाले कैलेण्डर का विमोचन किया गया। इस अवसर पर संस्था के कार्य और प्रतिष्ठित पत्रिका वीणा का परिचय संपादक राकेश शर्मा ने दिया। धन्यवाद ज्ञापन विश्वविद्यालय के कुलाधिसचिव लाजपत आहूजा ने व्यक्त किया। संविमर्श में एक खुले सत्र का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन डॉ. पवन मालिक ने किया।


पीआरएसआई भोपाल के संस्थापक अध्यक्ष अरविन्द चतुर्वेदी का सम्मान

Our Correspondent :24 April 2017
राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस पर नेसेसिटी ऑफ डिसिप्लिन इन टूडेज इनवायरमेंट विषय पर आयोजित सेमिनार में भोपाल चैप्टर के संस्थापक अध्यक्ष अरविन्द चतुर्वेदी को शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह से सम्मनित किया गया। इस अवसर पर श्री चतुर्वेदी ने सभी वर्तमान पदाधिकारियों व सदस्यों को बधाई देते हुए चैप्टर के कार्यों को सराहा, साथ ही उपस्थित लोगों को अनुशासन की जीवन में महत्ता और इसका पालन करने के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि जब भोपाल चैप्टर 1986 में शुरू किया गया, उस समय मात्र 17 लोग ही इस चैप्टर से जुड़े थे। जनसंपर्क विषय को लोग प्रोफेशन के रुप में स्वीकार नहीं करते थे। पीआरएसआई के लगातार प्रयासों से आज जनसंपर्क एक प्रोफेशन के रुप में प्रतिष्ठित हो चुका है। पंडित माखनलाल चतुर्वेदी के बड़े भतीजे होने के नाते उन्होंने बाल्यकाल में दद्दा के साथ जुड़ी खट्टी-मिट्ठी यादों को लोगों के साथ साझा किया। इसी के साथ उन्होंने मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि एशिया के प्रथम पत्रकारिता विश्वविद्यालय की परिकल्पना एवं धरातल पर उतरने तक उससे जुड़े संस्मरणों को सुनाया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित मीडिया विधार्थियों से उन्होंने अत्यंत ही भावनात्मक लहजे में संवाद करके जनसंपर्क प्रोफेशन से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिन्दुओं का उल्लेख किया। इस गरिमापूर्ण कार्यक्रम में चैप्टर के अध्यक्ष पुष्पेन्द्रपाल सिंह, सचिव डॉ. संजीव गुप्ता, कोषाध्यक्ष मनोज द्विवेदी, उपाध्यक्ष डॉ. अविनाश वाजपेयी, प्रचार-प्रसार प्रभारी योगेश पटेल, नेशनल काउंसिल प्रतिनिधि विजय बोन्द्रिया, उमा भार्गव, विष्णु खन्ना, जागरण विश्वविद्यालय के प्रो. योगेन्द्र श्रीवास्तव, अभिषेक जैन सहित बड़ी संख्या में मीडिया प्रोफेशनल्स, माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय एवं जागरण विश्वविद्यालय के मीडिया विद्यार्थी उपस्थित रहे।


भास्कर समूह के चेयरमैन रमेशचंद्र अग्रवाल का निधन

Our Correspondent :12 April 2017
अच्छे लोगों को भगवान भी जल्दी बुला लेता है, सभी जगह अच्छे लोगों की कमी होती है! रमेश जी को सामाजिक चेतना और सीधे-सच्चे इंसान के रूप में हमेशा याद किया जायेगा। भगवान आत्मा को शांति दे। सादर नमन। श्रद्धांजलि।
दैनिक भास्कर समाचार पत्र समूह के चेयरमैन श्री रमेशचंद्र अग्रवाल का बुधवार सुबह निधन हो गया। वे 73 वर्ष के थे। रमेशजी सुबह 9:20 बजे की फ्लाइट से दिल्ली से रवाना हुए और 11 बजे अहमदाबाद पहुंचे। एयरपोर्ट पर उन्हें दिल का दौरा पड़ा। उन्हें अपोलो हाॅस्पिटल ले जाया गया था, लेकिन डॉक्टरों की कोशिशों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका। पीएम नरेंद्र मोदी ने रमेशजी के निधन पर शोक व्यक्त किया। मोदी ने ट्वीट किया, ''श्री रमेशचंद्र अग्रवाल के निधन से दुख पहुंचा। मीडिया जगत में उनके उल्लेखनीय योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं श्री रमेशचंद्र अग्रवाल के परिवार के साथ हैं। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे।'' मुख्यमंत्रियों ने भी जताया शोक...
- रमेशजी के निधन की सूचना मिलने पर गुजरात के सीएम विजय रूपाणी ने अहमदाबाद में उनकी पार्थिव देह के दर्शन कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
- मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट किया, ''भास्कर समूह के चेयरमैन श्री रमेश अग्रवाल जी के असामयिक निधन का समाचार अत्यंत दुखदायी है। वे संवेदनशीलता, त्वरित निर्णय के लिए याद किए जाएंगे। श्री रमेशचंद्र अग्रवाल जी के परिजनों और भास्कर समूह के प्रति संवेदना प्रकट करता हूं। मध्यप्रदेश ने वास्तव में अपना एक अनमोल रत्न खो दिया है।''
- बीजेपी प्रेसिडेंट अमित शाह ने ट्वीट किया, ''रमेशचंद्र अग्रवालजी के निधन से गहरा दुख पहुंचा है। उनका निधन पत्रकारिता और भारतीय मीडिया के लिए बड़ी क्षति है।''
- कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने रमेशजी को मीडिया जगत का पुरोधा और संवेदनशील समाजसेवी बताते हुए उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया। सिंह ने कहा कि रमेशजी उनके अभिन्न मित्र थे। उनके निधन से मीडिया जगत में जो रिक्तता पैदा हुई है, उसे भरना कठिन होगा।
- कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भास्कर समूह ने मीडिया के क्षेत्र में अनेक नए प्रतिमान स्थापित किए हैं। यही कारण है कि आज वैश्विक मीडिया जगत में भास्कर समूह और रमेशजी का नाम शीर्ष के लोगों में शुमार है। मीडिया के साथ समाजसेवा और धार्मिक गतिविधियों में भी रमेशजी के काम को हमेशा याद रखा जाएगा।
लंदन के डिप्टी मेयर ने भी दी श्रद्धांजलि
- लंदन के डिप्टी मेयर राजेश अग्रवाल ने ट्वीट किया, ''रमेशजी बहुत इन्स्पायरिंग और जिंदादिल शख्सियत थे। उनके परिवार के प्रति संवेदनाएं।''
- पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह, झारखंड के सीएम रघुवर दास, केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय और इंडिया टीवी के एडिटर इन चीफ रजत शर्मा, संत श्री भय्यूजी महाराज और गुजरात बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू वाघाणी ने भी रमेशजी के निधन पर शोक जताया।
- राज्यवर्धन सिंह राठौर ने शोक व्यक्त करते हुए ट्विटर पर लिखा, ''दैनिक भास्कर समूह के चेयरमैन रमेशचंद्र अग्रवाल के निधन से दुख हुआ। भास्कर परिवार के 4.4 करोड़ पाठक उनकी विरासत हैं।''
- वेंकैया नायडू ने लिखा, ''दैनिक भास्कर समूह के चेयरमैन रमेशचंद्र अग्रवाल जी के असमय निधन से हैरान हूं। परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएं।''
- शेखर गुप्ता ने ट्वीट किया, ''रमेशचंद्र अग्रवाल जी के निधन से काफी दुख हुआ। वो आज के दौर की पत्रकारिता के जनक थे। दैनिक भास्कर को दुनिया का सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला अखबार बनाया।''
1958 से की थी शुरुआत
- 30 नवंबर 1944 को उत्तर प्रदेश के झांसी में जन्मे रमेशजी 1956 में पिता सेठ श्री द्वारकाप्रसाद अग्रवालजी के साथ भोपाल आ गए।
- उन्होंने 1958 में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से दैनिक भास्कर की नींव रखी। 1983 में इंदौर संस्करण की शुरुआत की। 1996 में भास्कर पहली बार मध्य प्रदेश से बाहर निकला और राजस्थान पहुंचा।
- रमेशजी के विजन और स्पष्ट लक्ष्य का ही नतीजा है कि आज भास्कर 14 राज्यों में 62 संस्करण के साथ न सिर्फ देश का नंबर-वन अखबार है, बल्कि सर्कुलेशन के मामले में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा अखबार बन गया है।
- रमेशजी के ही नेतृत्व में समूह ने हिंदी अखबार दैनिक भास्कर, गुजराती अखबार दिव्य भास्कर, अंग्रेजी अखबार डीएनए, मराठी समाचार पत्र दिव्य मराठी, रेडियो चैनल माय एफएम और डीबी डिजिटल को मीडिया जगत में सबसे अग्रणी बनाया।
- रमेशजी के परिवार में बेटे सुधीर अग्रवाल, गिरीश अग्रवाल, पवन अग्रवाल और बेटी भावना अग्रवाल हैं।
देश के 50 सबसे ताकतवर लोगों में शामिल थे
- रमेशजी ने भोपाल यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस की डिग्री ली। उन्हें पत्रकारिता में राजीव गांधी लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।
- 2003, 2006 और 2007 में इंडिया टुडे ने उन्हें भारत के 50 सबसे ताकतवर लोगों की लिस्ट में शामिल किया था।
- रमेशजी को Forbes ने भारत के 100 सबसे अमीर लोगों की 2011 और 2012 की लिस्ट में शामिल किया था।
भोपाल कर्मस्थली थी, दिल ग्वालियर में था
- ग्वालियर में रमेशजी के साथ परछाई की तरह रहने वाले सत्य कुमार मिश्रा बताते हैं, ''रमेशजी ने ग्वालियर के ही विक्टोरिया कॉलेज से पढ़ाई की। आज ये एमएलबी कॉलेज कहलाता है। ग्वालियर से रमेशजी को बहुत लगाव था। भले ही भोपाल उनकी कर्मस्थली थी, लेकिन दिल हमेशा ग्वालियर में ही रहता था। देश में अग्रवाल परिचय सम्मेलन की शुरुआत रमेशजी ने ग्वालियर से कराई। ग्वालियर मेला प्राधिकरण के वे चेयरमैन भी रहे और कई सामाजिक संस्थाओं के साथ जुड़े रहे। ग्वालियर की छत्री मंडी रामलीला समिति से वे हमेशा जुड़े रहे। धार्मिक कार्यक्रमों में उनका योगदान हमेशा रहता था।''
- वे कहते हैं, ''भले ही रमेशजी को डायबिटीज थी, लेकिन बहादुरा के लड्डू और एसएस कचौरी वाले की कचौरी उन्हें बहुत ज्यादा पसंद थी। जब भी ग्वालियर आते, वे इसे खाना नहीं भूलते थे। शहर के कई लोग जो अखबार में आते रहते थे, रमेश जी उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलते थे।''


जनसंपर्क मंत्री ने दैनिक भास्कर समूह के प्रमुख श्री रमेशचंद्र अग्रवाल के निधन पर दुख व्यक्त किया
Our Correspondent :12 April 2017
जनसम्पर्क, जल-संसाधन एवं संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने दैनिक भास्कर समाचार-पत्र समूह के प्रमुख श्री रमेशचंद्र अग्रवाल के अवसान पर दुख व्यक्त किया है। जनसंपर्क मंत्री डॉ. मिश्र ने कहा कि श्री अग्रवाल ने हिन्दी पत्रकारिता के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। देश में जब अंग्रेज अखबारों के श्रंखलाबद्ध प्रकाशन होते थे उस दौर में उन्होंने हिन्दी दैनिक का विस्तार करते हुए राष्ट्र भाषा के प्रचार को भी बल दिया। जनसंपर्क मंत्री ने कहा कि स्व. श्री अग्रवाल ने पत्रकारिता के माध्यम से समाज हित में अपने दायित्वों का निर्वहन किया। श्री अग्रवाल हँसमुख स्वभाव के व्यक्ति थे। उन्होंने समाज-सेवा के कार्यों में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी सेवाओं को भुलाया नहीं जा सकता।
जनसंपर्क मंत्री ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और उनके शोकाकुल परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की है।
पुष्प चक्र अर्पित
जनसंपर्क मंत्री डॉ. मिश्र ने स्व. श्री रमेशचंद्र अग्रवाल की पार्थिव देह अहमदाबाद से आज शाम भोपाल के स्टेट हैंगर पहुँचने पर पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।


गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान समारोह 14 अप्रैल को
Our Correspondent :12 April 2017

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित 'गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान समारोह' का आयोजन रवीन्द्र भवन में 14 अप्रैल, 2017 को किया जाएगा। इस अवसर पर वर्ष 2014 के लिए गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान वरिष्ठ पत्रकार श्री उमेश उपाध्याय को और वर्ष 2015 के लिए सम्मान वरिष्ठ पत्रकार श्री विजय मनोहर तिवारी को प्रदान किया जाएगा। बाबा साहब भीमराव आंबेडकर जयंती प्रसंग पर आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रख्यात साहित्यकार श्री नरेंद्र कोहली और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष श्री नंदकुमार साय होंगे। इस अवसर पर वंचित वर्ग के समग्र विकास के लिए व्यवहारिक उपाय एवं समरस समाज के लिए मीडिया और साहित्य का दायित्व विषय पर व्याख्यान का भी आयोजन है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के सांस्कृतिक एवं खेलकूद आयोजन प्रतिभा-2017 का पुरस्कार वितरण समारोह भी आयोजित किया जाएगा।
भारतीय भाषायी पत्रकारिता के माध्यम से मूल्यों की स्थापना और संवर्धन, सत्यान्वेषण, जनपक्षधरता, गहरे सामाजिक सरोकार और अप्रतिम सृजनात्मक योगदान के लिए माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान की स्थापना की गई है। यह सम्मान किसी एक कृति, रचना या उपलब्धि के लिए न होकर सुदीर्घ साधना एवं उपलब्धि के लिए देय है। विगत वर्षों में इस सम्मान से श्री आलोक मेहता, श्री राजेंद्र शर्मा, डा. नंदकिशोर त्रिखा, श्री रामबहादुर राय, श्री रमेश नैयर, श्री मदनमोहन जोशी और श्री श्यामलाल यादव को सम्मानित किया जा चुका है। सम्मान के अंतर्गत दो लाख रुपये नकद तथा प्रशस्ति-पट्टिका प्रदान की जाती है।
वर्ष 2014 के लिए गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान से सम्मानित श्री उमेश उपाध्याय पिछले तीन दशक से मीडिया की हर विधा में अपनी छाप छोडऩे वाले देश के ख्यातनाम पत्रकार, एंकर, संचार विशेषज्ञ और शिक्षाविद् हैं। श्री उपाध्याय पीटीआई भाषा, दूरदर्शन, जीटीवी, होम टीवी, जी न्यूज, एनसीएनएल, सब टीवी, जनमत और नेटवर्क-18 सहित अन्य संस्थानों में महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वर्तमान में श्री उपाध्याय रिलांयस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रेसीडेंट एवं मीडिया डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। इसके साथ ही वे विश्वविद्यालय की महापरिषद और भारतीय जनसंचार संस्थान की कार्यपरिषद के सदस्य हैं।
वर्ष 2015 के लिए गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान से सम्मानित श्री विजय मनोहर तिवारी बीस साल के पत्रकारीय जीवन में 20 राज्यों की आठ लंबी यात्राएं कर भारत के विविध रंगों को सबके सामने लाने के लिए पहचाने जाते हैं। एक लेखक के तौर पर भी उनकी पहचान है। प्रिय पाकिस्तान, हरसूद 30 जून और भारत की खोज में मेरे पांच साल उनकी चर्चित पुस्तकें हैं।


सोशल मीडिया के प्रशिक्षण पर विचार हो - विश्वास सारंग
शिष्यों में लोकप्रिय रहे पत्रकार स्व. देवलिया के स्मृति में हुआ अनूठा आयोजन

Our Correspondent :5 March 2017
स्वाधीनता संग्राम के दौरान नेता शब्द आदर, सम्मान और समर्पण का परिचायक था लेकिन आजादी के बाद इस शब्द का सम्मान घट गया। सोशल मीडिया ने जनता की आवाज बुलंद की है,इससे समाज के बीच से अच्छे लोगों की पहचान सहज होने लगी है। सहकारिता राज्यमंत्री विश्वास सारंग ने आज कहा कि शासन के प्रतिनिधि होने के नाते वे सोशल मीडिया के शिक्षण प्रशिक्षण को पाठ्यक्रम में जगह दिलाने का प्रयास करेंगे। श्री सारंग यशस्वी पत्रकार भुवन भूषण देवलिया की स्मृति में पं. माधव राव सप्रे समाचार पत्र संग्रहालय के सभागार में आयोजित व्याख्यान माला में “सोशल मीडियाःअवसर और चुनौतियां’’ विषय पर चर्चा करते हुए विचार व्यक्त कर रहे थे।

डॉ.सर हरिसिंह गौर विवि, सागर के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग में विभागाध्यक्ष रहे वरिष्ठ पत्रकार स्व. भुवन भूषण देवलिया की स्मृति में ये कार्यक्रम छह सालों से स्व. भुवन भूषण देवलिया व्याख्यान माला समिति की ओर से आयोजित किया जा रहा है। इस अवसर पर अपने गुरू और मार्गदर्शक को याद करने के लिए सागर विवि के पत्रकारिता विभाग के पूर्व विद्यार्थियों के साथ ही अन्य पूर्व विद्यार्थी भी इस आत्मीय कार्यक्रम में उपस्थित हुए। राजधानी में आयोजित हो रहे विभिन्न कार्यक्रमों की श्रंखला में इस आयोजन ने तकनीकी आधार पर कई समाजोपयोगी सूत्र उजागर किए हैं। आज की व्याख्यान माला में राज्यसभा टीवी, नई दिल्ली के कार्यकारी निदेशक राजेश बादल, सागर के पत्रकारिता विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो.प्रदीप कृष्णात्रे, प्रो.दविंदर कौर उप्पल,माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विवि के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. कमल दीक्षित,पत्रकार शिवअनुराग पटैरया ने अपने विचार व्यक्त किए।

इस अवसर पर पत्रिका समूह इंदौर में कार्यरत मुख्य उप संपादक अर्जुन रिछारिया को राज्य स्तरीय भुवन भूषण देवलिया पत्रकारिता सम्मान से अलंकृत किया गया। इस अवसर पर सर्वश्री राजेश सिरोठिया, अशोक मनवानी, डॉ.बी.के.दुबे,सुश्री सुनीता बोहरे, और आलोक सिंघई ने अतिथियों को पुष्प गुच्छ स्मृतिचिन्ह और तुलसी के पौधे भेंट करके उनका अभिनंदन किया। सभी अतिथियों ने स्व. भुवन भूषण देवलिया के चित्र पर माल्यार्पण करके उनके प्रति अपनी श्रद्दांजलि अर्पित की।कार्यक्रम में भुवन भूषण देवलिया स्मृति व्याख्यानमाला समिति की संयोजक और स्व. देवलिया जी की धर्मपत्नी श्रीमती कीर्ति देवलिया भी उपस्थित थीं।

राज्य मंत्री श्री सारंग ने कहा कि आजादी के बाद आई सरकारों ने आम नागरिकों को अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर अराजकता भरा माहौल दिया है। इससे लोगों में देश के प्रति कर्तव्यबोध विकसित नहीं हो पाया। इसकी वजह हमारी चुनाव प्रणाली रही है। आजाद हिंदुस्तान में पहली बार लाल किले की प्राचीर से दिया गया भाषण भी राजनीतिक मजबूरियों की उपज था और आज भी देश का हर नेता राजनीतिक नजरिए से ही अपना भाषण देता है। इसकी वजह ये है कि उसे अगले पांच सालों में एक बार फिर चुनाव जीतना होता है जिसके लिए उसे अपने राजनैतिक हितों पर गौर करना पड़ता है। उन्होंने किसी राजनैतिक दल का नाम लिए बगैर कहा कि आज देश में व्यक्ति निर्माण के प्रयास किए जा रहे हैं। इसलिए वे सरकार से बात करेंगे कि आम लोगों में सोशल मीडिया के सदुपयोग की समझ पैदा करने के लिए इसे स्कूली पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि रोटी,कपडा और मकान तो जेल में भी मिल जाते हैं पर वहां जाने वाले समाज के साथ से वंचित कर दिए जाते हैं। इसलिए जब समाज सबसे महत्वपूर्ण अवयव है तो इसे जोड़ने में सोशल मीडिया का भरपूर इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे स्वयं सोशल मीडिया पर चलाए जाने वाले आधारहीन दुष्प्रचार अभियानों का शिकार होते रहे हैं। कई बार किसी व्यक्ति विशेष की राष्ट्रविरोधी दुर्भावना को भी सोशल मीडिया पर संरक्षित किया जाने लगता है। बाद में ये कैम्पेन झूठे निकलते हैं। इसलिए सोशल मीडिया पर चर्चा करने वालों की सामाजिक जवाबदारी भी तय होनी चाहिए।

प्रमुख वक्ता के तौर पर राज्यसभा टीवी नई दिल्ली के कार्यकारी निदेशक राजेश बादल ने कहा कि सीमित संसाधनों के दौर में भुवन भूषण देवलिया जैसे समर्पित पत्रकार आंचलिक पत्रकारों को जोड़ने वाली कड़ी थे। वे पत्रों के माध्यम से आंचलिक पत्रकारों से संवाद स्थापित करते थे और उनका मार्गदर्शन करते थे। देवलिया जी स्वयं पत्रकारिता के चलते फिरते संस्थान थे। उन्होंने कहा कि डॉ.सर हरिसिंह गौर विवि, सागर के पत्रकारिता विभाग को स्व. भुवन भूषण देवलिया के व्यक्तित्व और कृतित्व पर शोध कार्य करना चाहिए। इससे समाज को संवारने की इच्छा रखने वाले विद्यार्थियों को मार्गदर्शन मिलता रहेगा। श्री बादल ने कहा कि सोशल मीडिया पश्चिमी देशों में विकसित हुआ है। उन देशों ने अपने सामाजिक बिखराव को समेटने में इसका इस्तेमाल किया। जबकि हमारे देश में इसे हम सामाजिक बिखराव के कारणों पर आक्रोश व्यक्त करने के लिए उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम कभी असहिष्णु नहीं रहे पर आज सोशल मीडिया लोगों को गाली देने का माध्यम भी बन गया है। इसके बावजूद सोशल मीडिया कई सामाजिक बदलावों का जनक भी बना है। इसलिए इसके सदुपयोग के लिए लोगों को प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।

प्रमुख वक्ता के रूप में जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के दिल्ली सेंटर में प्रोफेसर और सागर विवि के पत्रकारिता के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रदीप कृष्णात्रे ने कहा कि स्व. देवलिया जी के सामाजिक संपर्कों और विभाग के अध्यापकों के बीच समन्वय के कारण ही सागर के पत्रकारिता विभाग ने उपलब्धियां हासिल कीं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ने बहुत तेजी से अपना असर जमाया है। अब यहां लोकप्रियता सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है जबकि पुरातन मीडिया में विश्वसनीयता पर अधिक जोर दिया जाता था। पहले समाचार कुछ ही समय तक चर्चा में रहता था पर सोशल मीडिया के आ जाने से समाचार की अवधि लंबी हो गई है। इसलिए घटनाओं पर काफी लंबे समय तक चर्चाएं होती रहती हैं। श्री कृष्णात्रे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जनता से जुड़ाव का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें अब प्रेस वार्ता करने की जरूरत नहीं पड़ती वे सीधे जनता के बीच पहुंच जाते हैं। इस बदले हालात में पत्रकारिता का स्वरूप कैसा होना चाहिए फिलहाल इस पर कोई स्पष्ट नजरिया अब तक नहीं बन सका है। उन्होंने कहा कि जिस तरह सड़क पर सही गाड़ी चलाने के लिए किसी आजादी की जरूरत नहीं होती उसी तरह सोशल मीडिया पर सही गलत का फैसला भी हमें स्वयं करना होगा। न तो इस पर किसी प्रकार का अंकुश लगाया जाना चाहिए और न ही इस पर समाज विरोधी लोगों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। जिस तरह मिलिटरी रूम में दुश्मन के सभी पहलुओं पर विचार होता है उसी तरह सोशल मीडिया पर समाज के सभी पहलुओं पर विचार होना चाहिए। सही गलत का फैसला जनता स्वयं कर लेती है। समिति की ओर से वरिष्ठ पत्रकार शिव अनुराग पटैरया ने कार्यक्रम के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आधुनिक पत्रकारिता के प्रति स्व. भुवन भूषण देवलिया जी की जो सोच थी ये कार्यक्रम उस संकल्प का प्रकटीकरण है। इससे पता चलता है कि आपके अच्छे कामों की पदचाप आपके जाने के बाद भी गूंजती रहती है। पत्रकार राजेश सिरोठिया ने भी अपने विचार व्यक्त किए। जनसंपर्क अधिकारी अशोक मनवानी ने कहा कि श्री देवलिया के अवसान के 26 वर्ष बाद भी उनके विद्यार्थी उन्हें शिद्दत से याद करते हैं। उनका दृष्टिकोण राष्ट्रीय था और उन्होंने सैकड़ों नवोदित पत्रकारों को लेखन के गुर सिखाए।

कार्यक्रम का संचालन कर रहे श्री पद्म भंडारी ने सोशल मीडिया पर बढ़ रहे अवसरों और चुनौतियों पर चर्चा के लिए खुले सत्र का आयोजन भी किया जिसमें कई लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए। आयोजन में पूर्व संचालक भाषा और इतिहासकार श्री शम्भू दयाल गुरू, स्व. देवलिया के सुपुत्र श्री आशीष देवलिया, श्री सतीश एलिया, सुश्री अपर्णा एलिया, श्री व्ही.के. दुबे, सुश्री अरुणा दुबे, उप संचालक जनंसपर्क श्री अजय वर्मा, श्री मनोज पाठक, श्री पुष्पेन्द्र पाल सिंह, सागर से आए पत्रकार रजनीश जैन सहित अनेक पत्रकार, जनसंपर्क अधिकारी और नागरिकगण उपस्थित थे।


स्व. भुवन भूषण देवलिया सम्मान-व्याख्यान 5 मार्च को
एक आंचलिक युवा पत्रकार को मिलेगा पुरस्कार

Our Correspondent :11 Feb. 2017
भोपाल 10 फरवरी 2017 / वरिष्ठ पत्रकार स्व. भुवन भूषण देवलिया की जयंती के अवसर पर राजधानी में रविवार, 5 मार्च को आयोजन हो रहा है। स्व. भुवन भूषण देवलिया व्याख्यान माला समिति, भोपाल का यह आयोजन का छठवां वर्ष है। इस अवसर पर स्व. भुवन भूषण देवलिया स्मृति पुरस्कार से एक युवा पत्रकार को सम्मानित भी किया जाएगा। जल्द ही इसकी घोषणा होगी।
माधव राव सप्रे समाचार पत्र संग्रहालय में स्व. देवलिया जी की जयंती के अवसर पर प्रासंगिक विषय पर व्याख्यान भी आयोजित किया जा रहा है। व्याख्यान को अनेक वरिष्ठ पत्रकार सम्बोधित करेंगे। श्री बी.बी.देवलिया (1937-1991) ने सागर में रहकर पत्रकारिता, वकालत, साहित्य और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया।
उल्लेखनीय है कि इस आयोजन में स्थानीय पत्रकारों, लेखकों सहित डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के अनेक पूर्व विद्यार्थी हिस्सा लेते हैं।


जनसंपर्क मंत्री डॉ. मिश्र ने किया शोक व्यक्त
Our Correspondent :11 Feb. 2017
जनसंपर्क, जलसंसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने भोपाल के वरिष्ठ प्रेस छायाकार श्री रज्जाक खान के निधन पर दुख व्यक्त किया है।
मंत्री डॉ. मिश्र ने श्री खान को श्रद्धांजलि देते हुए शोकाकुल परिजन को यह दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की है।


जनसंपर्क मंत्री डॉ. मिश्र ने दी पत्रकार श्री तिवारी को बधाई
-आलोक सिंघई

Our Correspondent :11 Feb. 2017
जनसंपर्क, जलसंसाधन और संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र आज भारत भवन में आयोजित एक पुस्तक विमोचन समारोह में सम्मिलित हुए।
मंत्री डॉ. मिश्र ने पुस्तक लेखक वरिष्ठ पत्रकार श्री विजय मनोहर तिवारी को उनकी नव प्रकाशित कृति के लिए बधाई दी। डॉ. मिश्र ने समारोह के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत से भी भेंट कर उनका अभिवादन किया।


सरसंघचालक ने किया माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कैलेंडर का विमोचन
भारत की ज्ञान परंपरा पर केंद्रित है विश्वविद्यालय का कैलेंडर

Our Correspondent :11 Feb. 2017
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कैलेंडर का विमोचन किया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला भी उपस्थित थे।
सरसंघचालक डॉ. भागवत ने कैलेंडर के विषय और उसके आकल्पन की सराहना की है।
विश्वविद्यालय का वर्ष 2017 का कैलेंडर भारत की ज्ञान परंपरा पर केन्द्रित है। 12 पृष्ठीय कैलेंडर में पृथक-पृथक पृष्ठों पर चार वेदों ऋग्वेद, यजुर्वेद, अथर्वेद एवं सामवेद की व्याख्या के साथ उपनिषद्, रामायण, महाभारत और गीता को रेखांकित किया गया है। इसके साथ ही प्राचीन भारत के शिक्षा के चार केंद्र नालंदा, तक्षशिला, विक्रमशिला एवं सांदीपनी आश्रम का उल्लेख हैं। कैलेंडर में भारतीय तिथियों को भी दर्शाया गया है। महत्वपूर्ण तीज-त्यौहारों के साथ शासकीय अवकाश की भी जानकारी कैलेंडर में शामिल की गयी है। विगत वर्ष (2016) का कैलेंडर सिंहस्थ पर केन्द्रित था, जिसमें कुम्भ की संचार परंपरा को वर्णित किया गया था।


जनसंपर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने दी पत्रकारों को बधाई

Our Correspondent :25 Jan. 2017
जनसंपर्क, जल संसाधन एवं संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र ने राजधानी में पं. माधवराव सप्रे समाचार पत्र संग्रहालय और शोध संस्थान द्वारा सम्मानित सभी पत्रकार बंधुओं को हार्दिक बधाई दी है।
जनसंपर्क मंत्री डॉ. मिश्र ने कहा कि प्रिंट, इलेक्ट्रानिक मीडिया और सोशल मीडिया से जुड़े कलमकारों के प्रोत्साहन के लिए राज्य सरकार भी प्रतिबद्ध है। सप्रे संग्रहालय द्वारा पत्रकारों का सम्मान सराहनीय और अनुकरणीय है।
जनसंपर्क मंत्री डॉ. मिश्र ने पत्रकार सम्मान समारोह की आयोजक संस्था सप्रे संग्रहालय के प्रमुख श्री विजयदत्त श्रीधर को भी बधाई दी है।


 
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